सर्वोच्च न्यायालय ने पटाखों पर रोक लगाने से इनकार किया

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सर्वोच्च न्यायालय ने दीपावली के मौके पर पटाखों पर पूरी तरह से रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने पटाखों से होने वाले नुकसान और इससे होने वाले ध्वनि और वायु प्रदूषण के बारे में जागरूकता फैलाने के अपने पहले के दिशा-निर्देशों को लागू करने में विफल रहने पर केंद्र सरकार से अपनी नाखुशी भी जताई।

प्रधान न्यायाधीश एच.एल.दत्तू और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की खंडपीठ ने बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र और अन्य प्राधिकारियों को प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया में पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में प्रचार अभियान शुरू करने को कहा। अदालत ने कहा है कि यह अभियान त्योहार के मद्देनजर 31 अक्टूबर से 12 नवंबर के बीच चलाया जाए।

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अदालत ने इसके साथ ही अपने पहले के इस आदेश को दोहराया कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच पटाखे जलाने पर रोक रहेगी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र सरकार ने उसके 16 अक्टूबर के आदेश पर अमल नहीं किया। अदालत ने केंद्र द्वारा कार्रवाई न करने पर निराशा जताई।

सालिसीटर जनरल रंजीत कुमार ने अदालत को बताया कि प्रचार सामग्री तैयार है और इसे दीपावली के पहले प्रकाशित कर दिया जाएगा। इस पर पीठ ने कहा, “जब हमने 16 अक्टूबर को आदेश दिया था तो हमारा आशय यह था कि इस पर अमल हो और विज्ञापनों का लगातार प्रकाशन हो।”

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यह याचिका तीन मासूमों, छह माह के अर्जुन गोपाल और आरव भंडारी तथा 14 माह की जोया भसीन की तरफ से दायर की गई है। इन बच्चों के पिता वकील हैं जिन्होंने यह याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि दशहरा-दीपावली पर पटाखे चलाने पर रोक लगाई जाए वरना दिल्ली की हवा और जहरीली हो जाएगी।

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इन बच्चों के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से आग्रह किया कि लोगों से किसी एक जगह आकर पटाखा छोड़ने के लिए कहा जाए।

इस पर प्रधान न्यायाधीश दत्तू ने कहा, “हम पटाखा छोड़ने वाले सभी लोगों से ये नहीं कह सकते कि वे इसके लिए नेहरू मैदान जाएं।”

सिंघवी ने कहा कि पटाखा छोड़ने के लिए कोई तर्कसंगत समय सीमा ही तय कर दी जाए। इस पर न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, “आप एक ऐसा आदेश मांग रहे हैं जिसे लागू नहीं कराया जा सकता।”

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