कहीं बदल तो नहीं गए हमारे मोदी जी

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कपिल मिश्र

जब मैंने सवाल उठाया कि कहीं हमारे प्रधानमंत्री ISI के इशारे पे तो नहीं चल रहे, कई लोगो के फ़ोन आये कि हाँ जो कुछ भी हो रहा है वो समझ से तो बाहर है। ये वो शख्स तो नहीं जिनको देश ने दो वर्ष पहले प्रधानमंत्री के पद पर बैठाया था।

एक के बदले दस सर लाने की बात नहीं है, पर क्या कोई मानेगा कि ये वही शख्स है जो मनमोहन सिंह को पाकिस्तान को लव लेटर भेजने का ताना मारता था आज न केवल बिना बुलाये नवाज शरीफ के घर पहुँच जाता है वहीँ ये निर्णय भी ले लेता है कि हिन्दुस्तान पर हुए आतंकवादी हमले की जांच अब ISI और पाकिस्तान की सेना के लोग करेंगे।

जो शख्स ये कहता था कि जब तक हफीज सईद और दाऊद इब्राहिम हिंदुस्तान के हवाले न हो जाये तब तक पाकिस्तान से कोई बात नहीं होनी चाहिए, वो शख्स अचानक state sponsored terrorism की पूरी भारत की लड़ाई को ही हाशिये पर डाल देता है।

आतंकवादी अफजल गुरु को शहीद मानने वाली मेहबूबा मुफ़्ती अचानक से इनकी natural ally बन गयी। सज्जाद लोन जैसा व्यक्ति भाजपा के कोटे से कश्मीर में मंत्री बनाया जाता है। भाजपा की कश्मीर में सरकार बनने के ठीक 24 घंटे के अंदर तिरंगा फहराना और भारत माता की जय बोलना इतना बड़ा गुनाह बन जाता है कि निहत्थे छात्रो पर उनके कैम्पस में घुस कर पुलिस घेर कर मारती है और इस बर्बरता के 24 घंटे के बाद भी एक भी पुलिस वाले पर कार्यवाही नहीं होती। यहाँ ये बताना बहुत जरुरी है कि NIT Srinagar सीधा केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है।

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आज किसी भी हिन्दुतानी से पूछ लो कि क्या ये वो ही मोदी जी है, हर कोई कहेगा नहीं कुछ तो गड़बड़ है। कुछ तो है जो अजीब है, समझ नहीं आ रहा है।

केवल पाकिस्तान के मुद्दों की बात नहीं है, अब चाहे वो सोने के व्यापारियों का मुद्दा ही क्यों न हो, ऐसा कैसे हो सकता है दो साल पहले इसी मुद्दे पर तब की सरकार को जोरदार तरीके से घेरने वाला बंदा आज वही कर रहा है जिसका दो साल पहले विरोध कर रहा था। कुछ तो गड़बड़ है।

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धारा 370 का मामला हो या आधार कार्ड का, मनरेगा की बात हो या लैंड बिल की हर बात पर मोदी जी का रवैया 2 साल पहले के रवैये से बिल्कुल उलट।

कहीं बदल तो नहीं गए हमारे मोदी जी। ये वो शख्स तो नहीं हो सकता। क्या कोई भरोसा करेगा कि पूर्व सैनिको के सम्मान में लंबे चौड़े भाषण देने वाला व्यक्ति जब प्रधानमंत्री बन गया तब 15 अगस्त की शाम को जंतर मंतर पर पुर्व सैनिको को लाठियों से पुलिस द्वारा पिटवाया गया । उनकी वर्दी फाड़ी गयी, मैडल छीने गए।

बांग्लादेशी नागरिको पर भड़काऊ भाषण देने वाले मोदी जी के 2 साल के कार्यकाल में एक भी गलत तरीके से भारत में रह रहे बांग्लादेशी पर कार्यवाही नहीं हुयी बल्कि एक ही दिन में 14,000 बांग्लादेशियों को नागरिकता दिलाने वाले पहले प्रधानमंत्री बने मोदी जी।

इटली के मरीन्स पर जोरदार देशभक्ति से भरा हुआ भाषण देने वाला जब PM बना तो क्या हुआ, हिन्दुस्तानियों को मारने वाले इटली के सैनिको को कभी भी भारत न आना पड़े इसका निर्णय लिया गया।
सोनिया गांधी तो खुद इटली से है, इसलिए मोदी जी ने खूब इलज़ाम लगाये पर अब मोदी जी का क्या इटली कनेक्शन है जो सोनिया गांधी जी की सरकार से भी दो कदम आगे जाकर इटली के सैनिको के पक्ष में निर्णय लिया गया।

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पलटी खाने वाले मामलो की लिस्ट अंतहीन है पर सवाल आज मोदी जी की नियत पर है। इनमे से ज्यादातर मामले सीधे देशहित से जुड़े है।

डर ये है कि कहीँ कोई दबाव में तो काम नहीं करवा रहा हमारे PM से? क्यों एकदम बदल गए है हमारे मोदी जी?

जो लोग मेरी ISI का एजेंट वाली आशंका पर ये कह रहे है कि भाषा ठीक नहीं थी उनमे से भी ज्यादातर लोग ये कह रहे है कि एजेंट तो नहीं पर ISI का दोस्त, ISI के भाई या लंगोटियां यार जैसा कुछ कुछ तो नज़र आता है।

मामला गंभीर है। चिंता का विषय है। चुप्पी घातक है।

जय हिन्द। भारत माता की जय

Kapil Mishra is the Tourism Minister in Delhi government. Views expressed here are the author’s own and jantakareporter.com doesn’t subscribe to them.

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