“Make In India” Vs “Make India”… by Alka Lamba

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अलका लाम्बा

आम आदमी की सरकार,आम आदमी द्वारा,आम आदमी के लिये”…

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने अपने फैसलों से साबित कर दिखाया की वह सही मायनों में आम आदमी की सरकार है।

हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने “Make In India” और “Make India” पर चर्चा को जन्म दिया, जिस पर बहस भी शुरू हो चुकी है उम्मीद करती हूँ की बहस एक सही दिशा में आगे बढ़ेगी।
जिस देश में आज भी 30 करोड़ भारतीय भूखे सोते हो, जहाँ शिक्षा और स्वास्थ पर अभी बहुत काम होना बाकि हो और जहाँ आज भी हर नागरिक को मुलभुत सुविधा उपलब्ध् कराना एक चुनोती हो वहाँ “Make In India” पर प्रश्न उठना स्वभाविक ही है।
अरविन्द केजरीवाल ने “Make In India” से पहले “Make India” को जरुरी बताते हुये कहा है की अगर भारत में 6 बिंदुओं पर तय समय सीमा पर गंभीरता और ईमानदारी से काम किया जाये तो हमें देश विदेश जाकर निवेशकों से भारत में निवेश करने की अपील नहीं करनी पड़ेगी। उल्टा निवेशक भारत आकर भारत में निवेश की इच्छा ज़ाहिर करने लगेगें।

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जरुरत है तो बस निवेशकों के लिये ज़मीन तैयार करने और एक ऐसा माहौल पैदा करने की जो उनमें हमारे देश के प्रति एक विश्वास पैदा कर सके।

दिल्ली के मुख्यमंत्री ने जिन 6 बिंदुओं की बात कही है वह है, शिक्षा,स्वास्थ,सुरक्षा,इंफ्रास्ट्रक्चर,पानी और जस्टिस प्रणाली। उन्होंने भारत की 130 करोड़ की आबादी को एक सबसे बड़ा संसाधन बताते हुये उस पर निवेश करने की बात कही है।

दिल्ली में आप की सरकार बनाने के तुरंत बाद सबसे पहले अरविन्द केजरीवाल ने अपने चुनावी वायदे “बिजली हाफ़ पानी माफ़” को पूरा किया।

जिसके परिणाम सरकार बनने के 6 महीनों के भीतर ही दिखने शुरू हो गए। दिल्ली के आम आदमी को एक बड़ी राहत तो मिली ही साथ में हर दिन 4 मिलयन गैलन पानी की बचत होनी शुरू हुई जिसका फ़ायदा यह हुआ की आज 1लाख 25 हज़ार घरों को जिनको अभी तक पानी नहीं मिल पाया था आज मिलने लगा है।

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बिजली कंपनियाँ जो अभी तक अपने घाटे में होने का राग अलाप रहीं थी आज अचानक मुनाफ़ा कमाते दिखने लगी। DERC की जन सुनवाई में आम आदमी पार्टी के विधायकों ने हिस्सा लेते हुये आम आदमी का पक्ष रखा और DERC पर दबाव बनाया और बिजली के बड़े दाम वापस लेने की बात कहते हुये आगे दाम ना बढ़ाये जाने का भी पुर्जोर विरोध भी किया।

#AAP की दिल्ली में 49 दिनों की पिछली सरकार की माँग पर CAG द्वारा बिजली कंपनियों के खातों की जाँच करवाई गई। कुछ अख़बारों की ख़बरों से पता चला की CAG ने अपनी जाँच में बिजली कंपनियों को 8 हज़ार करोड़ की हेराफेरी का दोषी भी पाया है। उम्मीद करते है की CAG की रिपोर्ट जल्द ही संसद के पटल पर रखी जायेगी ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

दिल्ली सरकार ने अपने पहले स्वराज बजट में शिक्षा और स्वास्थ को एहमियत देते हुये शिक्षा के बजट को 106% तक बढ़ाया और स्वास्थ बजट को 45% तक बढ़ाया जो पहले ना तो कभी सुनने को मिला और नहीं ही देखने को।यही कुछ कदम शिक्षा और स्वास्थ के प्रति दिल्ली सरकार की गंभीरता को भी दर्शाता है।

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नागरिक और महिला सुरक्षा पर दिल्ली सरकार काफी गंभीरता से काम करते हुये आगे बढ़ रही है,पब्लिक यातायात साधनों में CCTV कैमरे लगवाना उसी का एक हिस्सा है।

न्याय प्रणाली,इंफ्रास्टक्चर पर भी दिल्ली सरकार गंभीरता से आगे बड़ रही है। उम्मीद करती हूँ की यह बहस एक सार्थक दिशा में आगे बढेगी और देश को उसका फ़ायदा मिल पायेगा।

शुभकामनायों सहित
जय हिन्द!


The author is an Aam Aadmi Party’s MLA from Chandni Chowk and Parliamentary Secretary, Tourism in Delhi government.

NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

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