Different leaders, one common charge, ‘Is Delhi police new private army of RSS?’

6

The outrage against Monday’s police attack targeting peaceful protesters in Delhi refuses to die down.

As if the social media outrage was not enough, now the political heavyweights too have launched unprecedented attack against the city cops.

From Delhi chief minister Arvind Kejriwal to the CPI-M general secretary Sitaram Yechury, all blamed the Delhi police for turning into what they said was a private army of the RSS.

Kejriwal, who’s currently undergoing naturopathy treatment for his cough in Bengaluru, tweeted, “Del pol being used by BJP/RSS as their pvt army to terrorize n teach lesson to anyone opposing BJP/RSS. I strongly condemn attck on students.”

Kejriwal’s tirade against Delhi police didn’t end here. He accused the Centre’s Narendra Modi government of being ‘at war’ with the students.

He said, “FTII, Rohith case, Hyd Univ, IITs and now brutal attack on Del students. Modi govt seems to be at war with students all across.”

Yechury for his part wondered if the Commissioner BS Bassi’s men were taking orders directly from the RSS.

His tweet read, “Barbaric assault on students by Delhi Police at RSS HQs. Police take orders directly from RSS! Is this Rule of Law?

Delhi police had mercilessly thrashed students including girls, who were protesting against the death of the Dalit student Rohith Vemula. They were stopped, thrashed brutally pulled down on the ground by the men in uniform amidst constant howling and yelling.

6 COMMENTS

  1. ठेकेदारों को कोड नेम से होता है भुगतान

    Wed, 13 Aug 2014 07:51:35 | Jaipur Hindi News

    जयपुर। नगर निगम में रिश्वतखोरी के खेल में हर शख्स अपना किरदार निभाता है। फिर चाहे वह ठेकेदार हो या अधिकारी, पार्षद हो या फिर बाबू। इन लोगों की सांठगांठ का दायरा इतना बड़ा है कि आम जनता को सुविधा मिले, इससे पहले ही योजना का आधा पैसा इनकी जेब में पहुंच रहा है। एसीबी की जांच में मंगलवार को जो जानकारी सामने आई वह चौकाने वाली है। इसके अनुसार सड़क बनाई गई या फुटपाथ, पार्क या फिर सीवर, हर योजना का 30 से 40 प्रतिशत पैसा बंदरबांट किया जाता था।

    पर्ची पर लिखा “यस”

    एसीबी ने जो पर्चियां बरामद की हैं उसमें भुगतान के लिए सीईओ ने सीधे यस लिख रखा है। आदर्श इलेक्ट्रिकल कांट्रेक्टर की यह फाइल सोमवार को कैशियर से बरामद की थी। इसे 31 लाख रूपए का भुगतान किया गया।

    ऎसे होती है पैसे की बंदरबांट

    कार्य आवंटन

    2 से 3 प्रतिशत सीईओ

    2 से 3 प्रतिशत एक्सईएन

    कार्य प्रमाणीकरण

    0.5 प्रतिशत एसई

    3 से 5 प्रतिशत जेईएन

    3 से 5 प्रतिशत एईएन

    3 से 5 प्रतिशत एक्सईएन

    0.4 प्रतिशत एक्सईएन का बाबू

    0.3 प्रतिशत टीए

    0.4 प्रतिशत अकाउंटेंट

    0.4 प्रतिशत एएओ

    0.5 प्रतिशत एफए

    2 प्रतिशत सीईओ

    भुगतान

    0.25 प्रतिशत कैशियर

    5 प्रतिशत सीईओ

    2 से 5 प्रतिशत पार्षद

    (इसमें कुछ ऎसे भी अधिकारी और पार्षद हैं जो शामिल नहीं होते )

    गलती पड़ रही भारी : एसीबी की एक गलती उसी पर भारी पड़ रही है। अगर एसीबी ने इस मामले में भी फोन टेपिंग की होती तो कई अन्य सुराग उसके हाथ लगते और बड़े खुलासे होते।

    हकीकत : सड़क बनाई नहीं और पांच सालों से भुगतान का आरोप

    वार्ड नंबर 48 में सीसी सड़क के नाम पर पांच साल से फर्जी भुगतान का मामला सामने आया है। इसमें स्वायत्त शासन विभाग जांच भी कर रहा है। जानकारी के अनुसार करीब पांच साल पहले 100 करोड़ खर्च कर जवाहर नगर की हर कच्ची बस्ती की सड़क सीसी कर दी गई थी, इसके बावजूद यहां पांच सालों से निर्माण दिखाकर पुरूषोत्तम जेसवानी ने हेराफेरी की। एक ऎसा ही मामला वार्ड नंबर 50 का है। सिंधी कॅालोनी में छह महीने पहले सड़क बनाकर भुगतान किया गया और फिर छह महीेने बाद बिना निर्माण किए 48 लाख रूपए हड़प लिए गए। इसकी भी जांच चल रही है। दोनों ही मामले में जांच अधिकारी मुख्य अभियंता केके शर्मा को फाइलें ही नहीं दी जा रही हैं।

    अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें.

  2. रिश्वत युग

    Tue, 26 Aug 2014 08:08:42 | Editor Choice Hindi News

    बधाई हो। कलियुग समाप्त हो गया और रिश्वत युग आ गया है। सतयुग सबसे अच्छा था जिसमें सब खुश थे। त्रेता में थोड़ा बदलाव आया लेकिन तब भी धर्मधीरा था।

    द्वापर युग से इंसानियत में गिरावट आनी शुरू हो गई थी लेकिन तब भी जीत धर्म की हुई थी। इसके बाद कलियुग आया। कलियुग जैसा चल रहा था वह आपको पता ही है लेकिन अब तो लगता है कि कलियुग भी खत्म हो गया और रिश्वत युग शुरू हो गया। तभी एक ही दिन में एक अफसर, एक थानेदार और एक दलाल रिश्वत लेते पकडे गए। वाह क्या बात है।

    प्रतिदिन रिश्वती पकड़े जा रहे हैं लेकिन फिर भी वे नहीं डर रहे हैं। क्यों डरे? अब तो साफ हो गया है कि अगर आप रिश्वत लेते पकड़े जाते हैं तो रिश्वत देकर छूट भी सकते हैंं और ज्यादातर छूट ही तो रहे हैं। रिश्वत का दूसरा नाम है भ्रष्टाचार। सरकारी महकमों में आज कल तीन तरह की रिश्वत चल रही है।

    एक जायज रिश्वत, दूसरी नाजायज रिश्वत और तीसरी गला घोंटू रिश्वत। जरा इन्हें ढंग से समझ लीजिए। जायज रिश्वत यानी वह रिश्वत जो आपको सरकारी टेण्डरों की एवज में देनी ही देनी है। ठेकेदार पहले से ही अपने धंधे में इसका प्रॉविजन लेकर चलता है।

    यह दस से पन्द्रह प्रतिशत तक होती है। इसे व्यापारी या व्यवसायी यूं समझता है जैसे वो गायों को चारा डाल रहा है। इस रिश्वत तो देने में उसका दिल नहीं दुखता। लेकिन यह न समझिए कि यह रिश्वत वह अपनी जेब से दे रहा है। नहीं, वह इस जायज रिश्वत को सरकारी खजाने से ही वसूलता है। दूसरी कहलाती है नाजायज रिश्वत। पंद्रह प्रतिशत से ज्यादा दी जाने वाली रिश्वत नाजायज है।

    यह देने के बाद व्यवसायी कहता है- अजी कुत्तों को टुकड़ा डाल दिया जिससे वे भौंके और काटे नहीं। और तीसरी है गला घोंटू रिश्वत। इसमें रिश्वतखोर ठेकेदार की छाती पर सवार होकर उसका खून पीने लगता है और ठेकेदार भ्रष्टाचार निरोधक विभाग में जाकर घंटी बजाता है। हम तो अपने नरेन्द्र मोदी से यही कहना चाहते हैं- मोदी भाई, तुम तो बस एक काम कर दो।

    इस देश से रिश्वत खत्म करा दो। कसम से जब तक जियो तब तक प्रधानमंत्री बने रहना। कम से कम इस देश को रिश्वत युग से छुटकारा तो मिले लेकिन क्या यह उनके बस की बात है?

    -राही

  3. स्विस बैंकों से चुपचाप ठिकाने लग रहा ब्लैक मनी!

    भाषा | Jun 29, 2014, 06.58PM IST

    ज्यूरिख/नई दिल्ली

    ब्लैक मनी के खिलाफ जंग में भारत का सहयोग करने की स्विट्जरलैंड की प्रतिबद्धता के बीच यह बात सामने आई है कि स्विस बैंक में जमा पैसे के वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने के लिए ऐसे पैसे को सोने और हीरे के व्यापार की कमाई का मुलम्मा चढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

    इन बैंकों में जमा ब्लैक मनी के पीछे के वास्तविक व्यक्तियों के ग्राहकों की पहचान छिपाने के लिए हीरा व्यापार, सोने व अन्य आभूषणों का निर्यात, शेयर बाजार के सौदे एवं नई पीढ़ी की वर्चुअल करंसी के जरिए मनी ट्रांसफर जैसे तरीके अपनाए जा रहे हैं।

    ऐसे समय में जब स्विस बैंकों में भारतीयों के ब्लैक मनी जमा करने को लेकर स्विट्जरलैंड सरकार पर कार्रवाई करने का भारी दबाव है, स्विट्जरलैंड के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि यह यूरोपीय देश भारत को सोने का निर्यात करने वाला एक प्रमुख केंद्र बन गया है।

    इस साल के शुरुआत से यहां से भारत के साथ करीब 6 अरब स्विस फ्रैंक (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) मूल्य के सोने का व्यापार हुआ है। सरकारी एवं बैंकिंग सूत्रों के मुताबिक इस बात का संदेह बढ़ रहा है कि स्विस बैंकों से भारत एवं अन्य स्थलों में धन पहुंचाने के लिए सोना और हीरा व्यापार का इस्तेमाल किया जा रहा है।

  4. सेना भर्ती परीक्षा को लेकर हुआ एक और बड़ा खुलासा

    Wed, 03 Sep 2014 09:03:54 | Rajasthan Hindi News

    सीकर। सेना भर्ती लिखित परीक्षा के खुलासे से पहले जांच एजेंसी एटीएस के पास जो मोबाइल नम्बर आए थे वे सीकर के किसी युवक के थे। उन्हीं नम्बरों से एक युवक ने अजमेर कई बार बात की थी।

    एटीएस ने इस नम्बर पर नजर रखना शुरू कर दिया। हालांकि इन नम्बरों से कोई बड़ी बात सामने नहीं आने पर बाद में यह मामला सीकर पुलिस को सौंप दिया गया। सूत्रों की माने तो इसी नम्बर के आधार पर बीकानेर के गिरोह तक पहुंचा गया था।

    सेना भर्ती करवाने में दलाल की भूमिका सामने आने व मोबाइल नम्बरों के आधार पर सीकर पुलिस ने अजमेर पुलिस अधीक्षक से भी सम्पर्क किया था।

    यह पूरा मामला मोबाइल नम्बरों पर हुई बातचीत के आधार पर ही होने तथा किसी के मामला दर्ज नहीं करवाने के कारण सीकर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर पाई। ऎसे में सीकर पुलिस सीकर में जिस युवक ने अजमेर बात की थी उसके बारे में पूछताछ कर रही है।

    गिरोह के जुड़े हो सकते हैं तार

    अजमेर से भर्ती करवाने के नाम पर सीकर के युवक से बात करने वाले के तार बीकानेर के गिरोह से जुड़े होने की आशंका है।

    पुलिस अगले माह सीकर में होने वाली भर्ती रैली को लेकर भी मुस्तैद है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भर्ती से पहले इस तरह का नेटवर्क सीकर में तो सक्रिय नहीं है।

    तीन लोग लाए थे पेपर

    सेना भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण की जांच में सामने आया है कि दिल्ली से तीन जने पेपर की प्रतियां बीकानेर लाए थे। ये तीनों उत्तरप्रदेश के हैं। पुलिस जांच अब इन्हीं पर केन्द्रित कर आगे बढ़ाई जा रही है।

    जिला पुलिस अधीक्षक संतोष्ाकुमार चालके ने बताया कि बड़ा सूत्रधार सुरेन्द्र शर्मा है जो आगरा के सदर बाजार थाना इलाके में पायल कोचिंग सेंटर चलाता है।

    यह गाजियाबाद निवासी सेना के पूर्व हवलदार प्रमोदकुमार व पूर्व सिपाही मेरठ निवासी तेजवीरसिंह यादव से दिल्ली में मिला था। ये तीनों ही परीक्षा के पेपर बीकानेर लेकर आए।

  5. एक परिवार, तीस सदस्य, सारे अनपढ़

    Mon, 08 Sep 2014 13:27:52 | Rajasthan Hindi News

    सीकर/दांतारामगढ़। सरकार शिक्षा पर करोड़ों रूपयों खर्च कर रही है। जगह-जगह स्कूल खोल रखे हैं। शिक्षकों को हर माह मोटी तनख्वाह दी जा रही है। एक भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं रखने के प्रयास हो रहे हैं।

    प्रयास किस कदर किए जा रहे हैं, इसका अंदाजा दांतारामगढ़ के पास गांव गौरिया-भारीजा के एक परिवार को देख सहज लगाया जा सकता है। यहां के मंगला बावरिया व उसकी पत्नी सामरी के 21 बेटे-बेटी हैं।

    पोते-पोतियों की संख्या मिलाने पर परिवार में सदस्यों की संख्या तीस से अधिक पहुंचती है। मगर विडम्बना है कि सारे सदस्य निरक्षर हैं। शिक्षा का उजाला इस परिवार तक चार दशक में भी नहीं पहुंच पाया।

    परिवार का कोई भी सदस्य ना खुद कभी स्कूल गया और ना ही इन्हें कोई पढ़ाने यहां आया। मंगला के बच्चे गांव के सरकारी स्कूल के पास से रोज पानी लेकर आते हैं, मगर इन्हें कभी किसी ने स्कूल की राह नहीं बताई।

    ना ही पढ़ने का जज्बा पैदा किया। यह परिवार सदस्यों की संख्या के लिहाज से संभवतया सीकर जिले का सबसे बड़ा परिवार है।

    अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर

    करें.

LEAVE A REPLY