“ठुल्ला” कहे जाने से कैसे भंग हुई दिल्ली की शांति, अदालत ने पुलिसकर्मी से स्पष्टीकरण मांगा

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दिल्ली की एक अदालत ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दायर करने वाले पुलिस कांस्टेबल से यह बताने के लिए कहा है कि केजरीवाल के दिल्ली पुलिस को कथित रूप से ‘ठुल्ला’ कहने से किस तरह शांति भंग हुई है।

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अनु अग्रवाल ने कहा कि कथित टिप्पणी व्यक्तिगत थी या सामान्य प्रवृत्ति की थी? क्या कथित अपमान का इरादा शांति भंग करने के लिए उकसाना था, स्पष्टीकरण दें। अदालत ने इस बाबत 31 जुलाई को अगली तारीख तय की। शिकायतकर्ता कांस्टेबल हरविंदर की ओर से पेश हुए वकील एल एन राव ने अदालत में दलील दी कि केजरीवाल के ‘ठुल्ला’ कहने से पूरी दिल्ली पुलिस का मनोबल कम हुआ है।

उन्होंने दावा किया कि हाल में एक साक्षात्कार के दौरान मुख्यमंत्री के दर्जे के किसी व्यक्ति की ओर से ‘ठुल्ला’ कहने से दिल्ली पुलिस का मनोबल कम हुआ है और इसका इरादा शांति भंग करने के लिए उकसाना है। राव ने साथ ही कहा कि केजरीवाल ने जानबूझकर पूरे पुलिस बल का अपमान किया है और यहां के पुलिसकर्मियों में गैरजरूरी उकसावा एवं असंतोष पैदा किया है।

गोविंदपुरी थाने में तैनात कांस्टेबल ने 22 जुलाई को शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उसने केजरीवाल की टिप्पणी से अपना अपमान होने का दावा किया था। कांस्टेबल ने अपनी याचिका में कहा कि ठुल्ला जैसे अपमानजनक और नीचा दिखाने वाले शब्द का इस्तेमाल करना पूरे दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को सुस्त और अकर्मण्य कहने के बराबर है। इसलिए इस शब्द ने शिकायतकर्ता के परिवार, रिश्तेदारों और मित्रों समेत आम जनता की आंखों में उसकी प्रतिष्ठा धूमिल की है।

इसमें कहा गया कि देश की राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री जैसे किसी सांवैधानिक पद पर होने की वजह से अरविन्द केजरीवाल बहुत प्रभावशाली हैं, लोगों के बीच उनकी अच्छी खासी पहुंच है और इसलिए उनके शब्दों से दिल्ली पुलिस की सार्वजनिक छवि प्रभावित होती है। याचिकाकर्ता ने अदालत से आईपीसी की धारा 500 (मानहानि) और 504 (शांति भंग करने के लिए उकसाव के इरादे से अपमान) के तहत केजरीवाल को सम्मन भेजने का अनुरोध किया। पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने भी केजरीवाल के ‘ठुल्ला’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर अपनी नाराजगी का संकेत दिया था।

 

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