अनुपम खेर और रजत शर्मा को राज्यसभा की सदस्यता का तोहफा मिल सकता है : रिपोर्ट्स

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केन्द्र सरकार ने राज्यसभा की सदस्यता के लिये अपने नुमाइन्दें चुनने की प्रक्रिया शुरू कर दी हैं।

सरकार चाहती है कि ये प्रक्रिया सोमवार 25 अप्रैल को संसद सत्र शुरू होने से पहले ही हो जानी चाहिए क्योंकि नरेन्द्र मोदी सरकार को राज्‍यसभा से जीएसटी समेत कई अहम बिल पास कराने हैं। इसके लिए उसे गैर एनडीए व गैरयूपीए सपा, एआईएडीएमके, बीएसपी, बीजेडी आदि का समर्थन चाहिए होगा।

हालाकिं नए सदस्‍यों के मनोनयन से राज्यसभा में बिल पारित कराने में सरकार की विपक्ष पर निर्भरता पर कोई खास अंतर नहीं पड़ेगा, लेकिन जुलाई में 54 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में भाजपा की स्थिति जरूर थोड़ी मजबूत होगी।

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जनसत्ता की खबर के अनुसार भाजपा ने राज्यसभा में मनोनयन के जरिए भरी जानी वाली सीटों के लिए सांसदों के नाम जल्द ही घोषित करने का फैसला किया है। अपुष्ट खबरों के मुताबिक सोमवार 25 अप्रैल को संसद सत्र शुरू होने से पहले यह एलान हो सकता है।

इन खबरों के अनुसार सुब्रमण्‍यम स्वामी, मलयाली अभिनेता सुरेश गोपी, पत्रकार स्वप्नदास गुप्त, ओलिंपिक मेडल विजेता मैरीकॉम, अर्थशास्त्री नरेंद्र जाधव, पूर्व सांसद व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू, अभिनेता सलमान खान के पिता सलीम खान, पत्रकार रजत शर्मा और अभिनेता अनुपम खेर में से ये सीटें भरी जा सकती हैं। राज्यसभा में 12 मनोनीत सदस्य होते हैं। अभी पांच सीटें खाली हैं। अपुष्ट खबरों में बताया जा रहा है कि रजत शर्मा और अनुपम खेर के नाम तय हो गए हैं।

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सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा के लिए नामांकित की जाने वाली शख्सियतों में पांच नाम तकरीबन तय माने जा रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा नाम है लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी में शामिल हुए सुब्रमण्यन स्वामी का। स्वामी अक्सर अपने कानूनी दांवपेंच से कांग्रेस खासकर गांधी परिवार के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहते हैं।

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वैसे तो मनोनीत सदस्य किसी पार्टी के नहीं होते, लेकिन वोटिंग के वक्त अमूमन वे सरकार के पक्ष में ही मतदान करते हैं। ऐसे में पांच सदस्‍यों के मनोनयन से राज्यसभा में भाजपा की स्थिति मजबूत होगी। संविधान के मुताबिक सदस्यों का मनोनयन राष्ट्रपति करते हैं। साहित्य, कला, विज्ञान, समाजसेवा आदि क्षेत्रों में महारत रखने वाले लोगों को राज्यसभा सदस्य मनोनीत किया जा सकता है। व्यावहारिक तौर पर उन्हीं सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं, जिन्हें सत्ताधारी पार्टी चाहती है।

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