राज्य सभा सीट के लिये अनुपम खेर की तिगड़मों का खुद भाजपा में भारी विरोध

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अनुपम खेर को राज्यसभा भेजे जाने के फैसले पर अंतिम मुहर लगने वाली हैं, लेकिन दूसरी तरफ खुद संगठन के अंदर खेर का भारी विरोध देखा जा रहा है। मुम्बई मिरर की खबर के अनुसार खेर खुद को राज्यसभा भेजे जाने के लिए जमकर अभियान चला रहे हैं। पार्टी के कुछ लोगों का कहना है कि खेर की कोशिशों को देखकर वे काफी हैरान हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि खेर ने सरकार द्वारा दिए गए कुछ पदों के प्रस्ताव को समय की कमी होने की बात कह अस्वीकार कर दिया था।

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खबर के अनुसार खेर ने FTII प्रमुख के पद को भी अपनी व्यस्तता का हवाला देकर ठुकरा दिया था। उन्होंने नैशनल फिल्म डिवेलपमेंट कॉर्पोरेशन (NFDC) के बोर्ड में भी शामिल होने में अनिच्छा दिखाई थी। ऐसे में खेर द्वारा राज्यसभा जाने की इतनी दिलचस्पी दिखाए जाने पर काफी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के एक नेता ने कहा, ‘ऐसा कैसे हुआ कि एकाएक वह राज्यसभा सांसद बनने के लिए इतने इच्छुक हो गए हैं।’

पार्टी सूत्रों ने बताया कि खेर के नाम पर पार्टी द्वारा राज्यसभा नामांकन के लिए विचार नहीं किया गया, लेकिन नामांकन के लिए दौड़ खत्म होने के काफी बाद खेर सोशल मीडिया पर इसे लेकर लिखने लगे। पार्टी 7 सीटों में से 6 के लिए नाम तय कर चुकी है। अब खेर ने सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से लिख दिया कि उन्हें सातवीं सीट खुद को मिलने की उम्मीद है।

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कश्मीरी पंडितों के एक संगठन ने भी इसका भारी विरोध किया उन्होंने कहा, खेर इसके लायक नहीं है। उन्होंने समाज के लिए क्या किया है, और भी बहुत सारे दिग्‍गज हैं जिन्होंने पंडित समुदाय के लिए काम किया है। पिछले एक साल से खेर ने राज्‍य सभा सीट पर अपनी आंखें गड़ा रखी थी। इस अ‍वधि में उन्‍होंने हमारा ज्यादा नुकसान किया है।

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बता दें कि पिछले साल अनुपम खेर ने इंटॉलरेंस और अवार्ड वापसी जैसे मुद्दों पर मोदी सरकार का बचाव किया था। उन्होंने अवार्ड लौटाने वाले साहित्यकारों को भी निशाने पर लिया था। साथ ही उन्होंने अवार्ड वापसी अभियान के खिलाफ मोर्चा भी निकाला था। उन्होंने भारत माता की जय बोलने और जेएनयू जैसे मामलों में भी केंद्र सरकार के रूख का समर्थन किया था।

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