मानसून सत्र से पहले मोदी की तैयारियाँ, सर्वदलीय बैठक में कहा लैंड बिल पर आगे बढ़ना चाहिए

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मानसून सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी अपनी तैयारियों में लग गए है| आज सुबह मोदी के सर्वदलीय बैठक में सभी दलों को संसद के समय को सही उपयोग करने की सलाह दी और कहा की संसद की कारवाही को सही से चलाना हम सभी की ज़िम्मेदारी है| सही ही उन्होंने विवादित भूमि विधयेक बिल को सभी दलों से आगे बढ़ाने के लिए सहयोग माँगा|

संसद सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में मोदी ने कहा की देशहित में सभी दलों को पिछले सत्र में चर्चा किये गए मुदों के आगे बढ़ाना चाहिए|

संसद में भूमि विधेयक, जीएसटी विधेयक और रियल इस्टेट विधेयक जैसे महत्वपूर्ण विधायी कार्यों के लंबित होने के बीच सरकार ने सर्वदलीय बैठक में सभी दलों से इसे जल्द से जल्द पारित कराने में सहयोग मांगा।

संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से शुरू हो रहा है और इसके 13 अगस्त को समाप्त होने की संभावना है।

वही दूसरी और कांग्रेस और अन्य दलों ने मानसून सत्र के हंगामेदार होने के संकेत दिए| कांग्रेस और अन्य विरोधी दल बीजेपी और सरकार को ललित मोदी प्रकरण, व्यापम घोटाले, वसुंधरा राजे मामले पर घेरने और वसुंधरा और शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे की माँग कर रहे है|

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी है और हमें इसके लिए पहल करनी होगी लेकिन यह जिम्मेदारी सभी को उठानी होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह समय आगे बढ़ने का है। हम सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा। देशहित सर्वोपरि है। पिछले सत्र में जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है।’’

समाजवादी पार्टी के नेता रामगोपाल यादव का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘यह समय है कि हमें सभी पक्षों की राय को समाहित करते हुए भूमि विधेयक के मुद्दे पर आगे बढ़ना चाहिए। हमें इस मुद्दे पर सकारात्मक रूप से आगे बढ़ना चाहिए।’’

मोदी ने कहा कि संसद का मानसून सत्र छोटा है और इसलिए इस समय का सदुपयोग महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने में किये जाने की जरूरत है और सरकार इसके लिए तैयार है।

सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, जदयू, सपा, बसपा, राजद, अन्नाद्रमुक, द्रमुक और वामदलों के अलावा राजग के विभिन्न सहयोगी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिनिधि नहीं आया।

उल्लेखनीय है कि कांग्रेस ने कल सुषमा, वसुंधरा और शिवराज को हटाने की ‘न्यूनतम कार्रवाई’ करने की मांग करते हुए संसद में सुचारू रूप से कामकाज चलाने की जिम्मेदारी सरकार पर डाल दी थी। वहीं भाजपा ने कांग्रेस एवं विपक्ष के संभावित प्रहारों का पुरजोर तरीके से जवाब देने का निर्णय किया है जिससे संसद सत्र के हंगामेदार होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

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