देश का माहौल ठीक है और शाह रुख, नारायणमूर्ति और अरुंधति जैसे देशद्रोही इसे खराब कर रहे हैं

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इरशाद अली

देश में इस समय जो असहिष्णुता का माहौल उभर कर आया है जिसके चलते कलाकार, साहित्यकार, चितंक और विचारकों का जुड़कर एक हो जाना सामने आया सरकार के विरोध में उससे केन्द्र की भाजपा सरकार ना सिर्फ हिल चुकी है बल्कि इस माहौल को नकारने की पूरी तरह से तैयारियां भी कर चुकी है।

चूँकि इस समय बिहार चुनाव के नतीजे आने का इंतज़ार है, इस लिए मोदी जी चुप बैठे हुए है उसके बाद यक़ीन मानिए वो एक-एक करके इन सबसे निपटने वाले है।

पीएमओ कार्यालय पूरी तरह से अपने प्यादे सेट कर चुका है। विरोध के इस स्वर को और बढ़ने से रोकने के लिए पहला तीर सरकार अनुपम खेर के बतौर छोड़ रही है। दो दिन पहले एक बड़ी पदयात्रा कर के सोनिया और राहुल सहित कई बड़े नेता राष्ट्रपति से मिले थे।

अब उसी कड़ी में इसी तरह की रैली का वर्जन टू अनुपम खेर साहब लेकर आ रहे है। रिपोर्ट्स के अनुसार इंडिया गेट से कलाकारों, साहित्यकारों और विचारकों के साथ वो राष्ट्रपति से मिलकर ज्ञापन देने वाले है कि देश में माहौल बहुत अच्छा है।

चारों ओर अमन-चैन है। किसी अखलाक को उन्मादी भीड़ ने घर से निकालकर नहीं मारा और ना ही फरिदाबाद के सुनपेड़ गांव में मासूमों को सोते हुए दबंगो ने जलाया और ना ही सरकार के कारिन्दें कोई ऐसी बयानबाजी करते है जिससे देश का माहौल खराब हो।

न ही विख्यात चिंतक एम एम कलबुर्गी की हत्या हुई, न ही गाय के मामले पर मणिपुर में एक मुसलमान की हत्या हुई। देश में माहौल एक दम ठीक है । असहनशीलता का ड्रामा तो बस सरकार को बदनाम करने की बदनाम करने की साज़िश है|

न ही भाजपा के सांसद आदित्यनाथ की संस्था ने दादरी में हिन्दू चरमपंथियों को हथ्यार देनी की बात की, न ही आदित्यनाथ के मंच से मुस्लिम महिलाओं के शवों को क़ब्र से निकालकर बलात्कार करने की धमकी दी गयी।

और जब भी किसी ने अगर ऐसी ओछी हरकत करने की हिम्मत की तो प्रधानमंत्री महोदय ने तत्परता दिखाते हुए अपने उस सांसद या मंत्री के खिलाफ कार्रवाई की ।

और जो इतनी अच्छी सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं वह सिर्फ और सिर्फ देश द्रोह कर रहे हैं । इनफ़ोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति खुद को क्या समझते हैं जो इस देश में आसनशीलता की बात करने की जुर्रत कर दी।

सलमान रश्दी ने भी खुद के मुसलमान होने का आखिरकार सबूत पेश कर ही दिया जब उन्होंने दादरी मामले पर मोदी सरकार की भर्त्स्ना कर डाली ।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी मूडीज ने जब मोदी को असहनशीलता पर लगाम लगाने केलिए कहा तो हमें यह पता चला की यह एजेंसी भी देश को कमज़ोर करने के साज़िशों में शामिल है। मूडीज की रिपोर्ट तैयार करने वाला शख्स फ़राज़ सय्यद इतिहासकार इरफ़ान हबीब का दामाद निकला । यह अलग बात कि हबीब की सुपुत्री समन हबीब की शादी किसी फ़राज़ सय्यद से नहीं बल्कि एक अमित मिश्रा से हुई है।

शाह रुख खान ने भी ये दिखा दिया कि आखिरकार वह भी पाकिस्तानी निकले ।

धार्मिक असहनशीलता के ऊपर बवाल ने एक बात साबित कर दी कि देश का अगर कोई भला चाहता है तो वह है अनुपम खेर जैसे महान देशभक्त।

तो मैं अनुपम खेर की बात कर रहा था।

अनुपम खेर जी ये सारी बाते राष्ट्रपति जी से करने वाले है। चूँकि हम जानते है कि सरकार के पास काबिल लोगों का अभाव है वर्ना एफटीआईआई में गजेन्द्र चैहान और बारहवीं पास स्मृति ईरानी देश के शिक्षा नीतियों को ना बना रहे होते।

अब मोदी सरकार चाहती है कि कलाकार टाइप लोग आगे आकर कहे कि देश में सबकुछ सही-सही चल रहा है। अच्छे दिन आए हुए है तो ये मौका है दल बदलने का क्योंकि इस समय की चाटूकारिता बहुत काम आने वाली है। बहुत सम्भव है कि सरकार अगले कुछ दिनों में किसी बड़े सम्मान या ओहदे से अनुपम खेर साहब को उनकी इस मेहरबानी के लिए नवाज दे।

इस मुद्दे से एक बात और ज़ाहिर हो गयी है कि जहां आसनशीलता का विरोध करने वालों में देश के जाने माने बुद्धिजीवी हैं तो सरकार की हाँ में हाँ मिलाने वालों का वर्ग उन औसत स्तर के चाटुकार लोगों से भरा पड़ा है जो अपने अपने क्षेत्रों में खुद एक कहानी बन चुके हैं।

दूसरी तरफ मुन्नवर राणा या इस तरह के दूसरे अदबनवाज लोगों को सरकार अपने खेमे में करना चाहती है ताकि लोगों को लगे जिन्होंने सम्मान लौटाये है उन्होंने राजनीति की है। तो सरकार की इस नयी चाल को समझने की जरूरत है क्योंकि उन्होंने अपने प्यादे लगाने शुरू कर दिये है। अब आगे देखना ये मजेदार होगा कि इस कड़ी में कौन-कौन और जुड़ता है।

और अरुंधति रॉय का क्या कहना, बुकर अवार्ड का मिलना तो बस एक इत्तेफ़ाक़ था और अंदर से वह देश की सबसे बड़ी दुश्मन हैं। इंतज़ार कीजिये, क्या पता शाह रुख खान की तरह यह भी शायद लव जिहाद की दोषी न निकलें।

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