Arvind Kejriwal orders probe on why govt ads didn’t carry words, socialism and secularism

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Delhi government has apologised for what it said was an error for missing words in its advertisement published in English newspapers on the Constitution Day celebrations on Thursday.

A statement from the government said that the chief minister, Arvind Kejriwal, had taken stern view of this error.

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It said, ‘Words – Socialist and Secular are erroneously missing from the text published in the English advertisement. The Chief Minister has taken a stern view of the matter and has directed the Director of Information and Publicity to conduct an inquiry and submit a report within four days.”

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The Director has been asked to ascertain how such important components of the Preamble of the Constitution went missing from the text.

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The inquiry will focus on whether some mischief was involved in this matter.

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The two words were not a part of the original Preamble of the Constitution but were introduced through the 42nd Constitution Amendment Act in 1976.

1 COMMENT

  1. rajesh kumar
    नरेंद्र दामोदर दास मोदी
    6 hours ago
    यह ऐसे प्रधानमंत्री हुए जिन्होंने 1965 मेंअपनी फीएट कार खरीदने के लिए पंजाब नेशनलबैंक से पांच हजार ऋण लिया था। मगर ऋण की एक किश्त भी नहीं चुका पाए। 1966 में देहांत हो जाने पर बैंक ने नोटिस भेजा तो उनकी पत्नी ने अपनी पेंशन के पैसे से कार के लिए लिया गया ऋण चुकाने का वायदा किया और फिर धीरे धीरे बैंक के पैसे अदा किए।
    हम बात कर रहे हैं प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की। उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने भी उनकी ईमानदार पूर्वक जिंदगी में उनका पूरा साथ दिया। शास्त्री की यह कार आज भी जनपथ स्थितउनकी कोठी [अब संग्रहालय] में आज भी मौजूद है।अब इस कोठी में लालबहादुर शास्त्री संग्रहालय बना दिया गया है।
    पढ़ें:शास्त्री का अस्थि कलश संग्रहालय में ‘कैद’ इस संग्रहालय में अनेक ऐसी चीजें प्रदर्शित की गई हैं।जो उनकी ईमानदारी को दर्शाती हैं। लोग यहां आकर उनकी सादगी और ईमानदारी भरी जिंदगी के बारे में जानकर भावुक हो जाते हैं।
    ऐसी एक घटना के बारे में बताना जरूरी हो जाता है। यह बात 1962 के करीब की है। उस समय शास्त्री जी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव थे।उस समय देश के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लालनेहरू थे।उन्हें पार्टी के किसी महत्वपूर्ण काम से कश्मीर जाना था। पंडित नेहरू ने उनसे जाने के लिए कहा तो वह लगातार मना कर रहे थे। पंडित नेहरूभी चकरा गए कि वह ऐसा क्यों कर रहे हैं। पंडित नेहरूउनका बहुत सम्मान करते थे। बाद में उन्होंने वहां नहीं जाने के बारे में कारण पूछ ही लिया।पहले तो वह बताने को राजी नहीं हुए, मगर बहुत कहने पर उन्होंने जो कुछ कहा उसे सुनकर पंडित नेहरू की भी आंखों में आंसू आ गए। शास्त्री जी ने बताया कि कश्मीर में ठंड बहुत पड़ रही है और मेरेपास गर्म कोट नहीं है। पंडित नेहरू ने उसी समयअपना कोट उन्हें दे दिया और यह बात किसी को नहीं बताई। लाल बहादुर शास्त्री जब प्रधानमंत्री बने तो इसी कोट को पहनते रहे। इस प्रकार दो प्रधानमंत्री ने पहना यह कोट। उनके लिए समर्पित इस संग्रहालय में यह कोट प्रदर्शित है।इसी संग्रहालय में रखा गए है प्रधानमंत्री का टूटा कंघा, टूटी टार्च, दाढ़ी बनाने वाली सामान्य मशीन, सामान्य ब्रस व अन्य सामान।जो वहां पहुंचने वाले हर व्यक्ति को चौंकाते हैंकि देश को ऐसा भी प्रधानमंत्री मिल चुका है।इसी संग्रहालय में उनका शयन कक्ष है जिसमें एक तख्त औरकुछ कुर्सियां मौजूद हैं। जो कहीं से भी किसी विशिष्ठ व्यक्ति की नजर नहीं आतीं।
    ऐसे थे लाल बहादुर.

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