2006 मुंबई लोकल ट्रेन धमाकों में 9 साल बाद आया फैसला, 13 में से 12 दोषी, एक बरी

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2006 में मुंबई के लोकल ट्रेन में हुए धमाकों मे 9 साल बाद आज लंबे इंतजार के बाद फैसला आ गया। इस फैसले में 13 आरोपियों में से 12 लोगों को दोषी करार दिया गया है, जबकि एक आरोपी अब्दुल वाहिद को बरी कर दिया गया है।

वह दिन मंगलवार 11 जुलाई 2006 का शाम का वक्त था जब लोकल ट्रेनों से लोग अपने-अपने घरों की तरफ लौट रहे थे कि तभी माटुंगा से मीरा रोड के बीच एक के बाद एक 7 धमाके हुए थे। इन धमाकों मे 188 लोगों की मौत हो गई थी और, 828 से भी ज्यादा लोग घायल हुए थे।

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इस धमाके की जांच एटीएस ने तेजी से करते हुए एक एक कर 13 लोगों को गिरफ्तार कर पूरी साजिश को बेनकाब करने का दावा किया। एटीएस ने बताया कि पाकिस्तान की शह पर प्रतिबंधित संगठन सिमी के लोगों ने धमाकों को अंजाम दिया।

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लेकिन जैसे-जैसे अदालत में मुकदमा आगे बढ़ा एटीएस की कहानी पर सवाल उठने लगे और ज्यादातर आरोपी अदालत में अपने इकबालिया बयान से भी मुकर गए। साथ ही आरोप लगाया कि मारपीट कर जबरदस्ती उनसे बुलवाया गया और इतना ही नहीं मोबाइल फोन के सीडीआर से उनका लोकेशन भी धमाकों की जगह स्थापित नहीं हो सका।

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शायद यही कारण रहा होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने 2008 में दो साल के लिए इसकी कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और फिर 2010 में इस पर कार्रवाई सुरू हो पाई।

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इन आरोपीयों के नाम क्रमशः कमाल अहमद मोहम्मद वकील अंसारी, डॉ. तनवीर अहमद मोहम्मद इब्राहिम अंसारी, मोहम्मद फैजल अताउर रहमान शेख, एतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्धीकी, मोहम्मद मजिद मोहम्मद शफी,  शेख मोहम्मद अली आलम शेख, मोहम्मद साजिद मगरब अंसारी, अब्दुल वाहिद दीन मोहम्मद शेख, मुजम्मील अतउर रहमान शेख, सोहेल मेहमूद शेख, जमीर अहमद रेहमान शेख, नावीद हुसेन खान/राशीद हुसेन खान, आसिफ खान बशीर खान हैं।

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