नारी निकेतन में रह रहीं लड़कियों व महिलाओं की स्थिति दयनीयः दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालिवाल

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दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालिवाल ने शुक्रवार रात भर नारी निकेतन में गुजारीं हैं और पूरी रात उन महिलओं की आपबीती भी सुनीं।

दिल्ली में निर्मल छाया कॉम्पलेक्स में बने नारी निकेतन में रहने  वाली लड़कियों व महिलाओं की स्थिति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल जयहिंद ने पूरी रात उनके बीच रहकर गुजारी। उनके साथ महिला आयोग की मेंबर सारिका चौधरी व प्रोमिला गुप्ता भी थी।

आज सुबह जब स्वाति मालिवाल वहां से लौटीं तो उन्होंने बताया कि रात में जाने का उद्देश्य यह था कि ‘वे बड़े अधिकारियों की गैरमौजूदगी में वहां रहने वाली लड़कियों व महिलाओं से बात करना चाहती थी क्योंकि हो सकता है कि यदि वे दिन के समय जाती तो शायद वे अपनी बात खुलकर न बता पाती।‘

स्वाति मालिवाल ने बताया कि नारी निकेतन में मानसिक रूप से विक्षिप्त (मेंटली चैलेंज्ड) और सामान्य महिलाओं को एक साथ रखा गया है, जिससे स्थिति काफी असामान्य बनी हुई है।

उन्होंने बताया कि पुलिस कई बार किसी केस में लड़कियों को यह कहकर नारी निकेतन लेकर आती हैं कि उन्हें एक-दो दिन में वापस लेकर जाएंगे, लेकिन फिर वापस लेने नहीं आते। उन्होंने बताया कि नारी निकेतन में घरेलू हिंसा(डोमेस्टिक वॉलियंस), ट्रैफिकिंग, रास्ता भटकने, मानसिक रूप से विक्षिप्त और अंडर ऐज में किसी के साथ बिना पेरेंट्स की मर्जी के शादी करने वाली अधिकतर लड़कियां व महिलाएं हैं। कई लड़कियां ऐसी भी हैं जिनका मेन्टल हॉस्पिटल में ट्रीटमेंट हो रहा होता है और पेरेंट्स छोड़कर चले जाते हैं और वापस लेने नहीं आते हैं।

इसके अलावा डोमेस्टिक हेल्प करने वाली कई लड़कियां नारी निकेतन में थी। जिनके साथ मारपीट व सेलरी न देने की घटना घटी और पुलिस में मामला जाने के बाद पुलिस उन्हें यहां छोड़ कर चली गई है लेकिन उन्हें यहां से निकाला जा सकता है लेकिन कोई निकालने वाला नहीं है।

साथ ही नारी निकेतन में रही रही बंगाल की दो और असम की एक लड़की ने बताया कि उन्हें दिल्ली नौकरी दिलाने के लिए लाया गया था लेकिन जैसे ही वह रेलवे स्टेशन पर ऊतरी तो उन्हें इस बात का आभास हो गया कि उन्हें यहां बेचने के लिए लाया गया है। दोनों ने पुलिस की मदद ली तो ट्रैफिकर्स से तो बच गई लेकिन पुलिस उन्हें यहां नारी निकेतन में छोड़ गई, जहां से वे बाहर निकलना चाहती हैं। अब उन्हें अपने घर का भी पता है लेकिन उन्हें यहां से निकालने वाला कोई नहीं है। नारी निकेतन में जेल की तरह उनका एक एक दिन कट रहा है।

हालांकि अधिकतर लड़कियां से यहां बाहर निकलना चाहती है। कई लड़कियां ऐसी हैं जो नाबालिग थी और किसी के साथ जाकर बिना पेरेंट्स की मर्जी के उन्होंने शादी कर ली थी। अब वे न घर जा सकती है क्योंकि उन्हें डर है कि उनकी शादी कहीं और न करा दी जाए। स्वाति मालिवाल ने बताया कि उन्हें एक लड़की ऐसी भी मिली जिसे जीबी रोड से वहां आने वाले एक क्लाइंट से छुड़वाया है।

इसके साथ- साथ सुविधाओं के नाम पर अव्यवस्था भी है.

उन्होंने कहा कि नारी निकेतन में व्यवस्थाओं को लेकर बात की जाए तो यहां सफाई का बहुत बुरा हाल है।  मैंटली चैलेंज्ड व सामान्य लड़कियों व महिलाओं के लिए अलग-अलग टायलेट नहीं हैं। टायलेट की संख्या बहुत कम है। खाना भी बहुत अच्छी क्वालिटी का नहीं दिया जाता है। पीने का पानी भी पूरे दिन नहीं आता। दिन में अगर प्यास लगे तो नल का खारा पानी पीना पड़ता है। रात के समय इतने मच्छर हैं कि सोना बहुत मुश्किल है। नारी निकेतन के अलावा निर्मल छाया कॉम्पलेक्स में एक शार्ट स्टेड होम है जहां बेड 45 है लेकिन रहने वाली 90 लड़कियां है। ऐसे में उन्हें भी बहुत परेशानी झेलनी पड़ रही हैं।

इन्हीं सभी कारणों को देखते हुए स्वाति ने शनिवार को दिन में दोबारा से जाने का निर्णय लिया, साथ ही इस विजिट को लेकर एक रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी जो सरकार को सौंपी जाएगी।

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