मोदी जी, ये चुप्पी कब टूटेगी

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इरशाद अली

कोई दिन ऐसा नहीं जा रहा जब देश में कहीं ना कहीं साम्प्रदायिक चरमपंथ अपनी कारगुजारियों को दिखाने से बाज आता हो। किसी ना किसी बहाने से देश में अस्थिरता पैदा करने वाले लोगों को जिस तरह का संरक्षण दिया जा रहा है वो किसी से छुपा हुआ नहीं है।

दुनियाभर में अपनी वाचाल प्रवृत्ति के कारण पहचाने जाने वाले देश के प्रधान पीएम मोदी की इस तरह की चुप्पी और बर्बर घटनाओं को लेकर किया गया उनका मौन बता देता है कि वे किस तरह का संस्कृतिक विकास देश में ला रहे है।

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अभी ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति का रोजा जबरदस्ती तुड़वा दिया गया था जबरन उसके मुंह में रोटी भरकर। क्या हुआ उस नेता का कुछ नहीं बल्कि उसके जैसे दूसरे लोगों को नया जोश इस तरह की घटनाओं से मिला और आज इस तरह के लोग हर प्रांत, गांव, कस्बें में पैदा हो गए जो अपने तरह के नये मुद्दे उठाकर इस लहर को एक बड़ी मुहिम में बदलने के लिए प्रयासरत् है।

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कभी गौमांस, कभी लाउण्डस्पीकर, कभी घर वापसी, कभी लवजेहाद कितने विवाद आपको गिनवाए जिनका कोई अस्तित्व ही नहीं उनको एक बड़ा आंदोलन बनाकर कभी मुज्जफरनगर, कभी दादरी, कभी अटाली खड़ा कर दिया जाता है और देश का प्रधान मौन रहता है। सरकार अपने इस लगभग दो वर्ष के कार्यकाल में एक माहौल बनाने में जरूर कामयाब रही जिसके चलते एक वर्ग विशेष में भय, असुरक्षा और पलायन बड़ा है। हाल ही मैं हुए विसहेड़ा में हुई हत्या को लेकर राष्ट्पति तक को बोलना पड़ा लेकिन देश के प्रधान की चुप्पी नहीं टूटती। ये हैरान कर देना वाला पहलू प्रधानमंत्री का है कि आखिर वो अब तक चुप क्यों है।

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NOTE: Views expressed are the author’s own. Janta Ka Reporter does not endorse any of the views, facts, incidents mentioned in this piece.

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