कॉल ड्राप को लेकर सरकार सतर्क, टेलीकॉम कंपनियों की ‘चोरी’ पकड़ने के लिए दिए जांच के आदेश

0

कॉल ड्रॉप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. सरकार ने टेलिकॉम रेग्यूलेटर ट्राई से टेलीकॉम कंपनियों के टेरिफ प्लान की जांच करने को कहा है. जिससे यह पता लगाया जा सके कि कंपनियां कहीं टेरिफ प्लान के तहत होने वाले फोन कॉल से कॉल ड्रॉप कर ज्यादा फायदा तो नहीं उठा रही हैं.

गौरतलब है कि मोबाइल ऑपरेटरों को चोतावनी दी गई थी कि वॉयस कॉल पर अधिक मुनाफा के लिए कंपनी स्पेक्ट्रम की क्षमता को ना भूलें. और यही कारण था कि  बीते दिनों देश की सभी बड़ी टेलीकॉम कम्पनियों ने कॉल ड्रॉप के मसले पर साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. इस कॉन्फ्रेंस में भारती एयरटेल के सीईओ, वोडाफोन इंडिया आइडिया और रिलायंस के अधिकारी भी मौजूद थे.

Also Read:  Assam professor dies allegedly due to wrong surgery in Delhi

इस कॉन्फ्रेंस में टेलीकॉम कंपनियों का कहना था कि स्पेक्ट्रम और टावरों की कमी के कारण कॉल ड्रॉप एक बड़ी परेशानी बनती जा रही है और आगे ये और भी विकराल रुप लेगी. कंपनियों ने बताया कि ‘लगभग 7-10 हज़ार साइट्स फिलहाल लॉक्ड हैं या फिर बंद हैं. इसके अलावा क्रिटिकल एरियाज में 12 हज़ार साइट्स नॉन एक्वारेबल की श्रेणी में हैं. कुल मिलकर लगभग 20 हज़ार साइट्स की कमी है.  इन मोबाइल कंपनियों का कहना है कि नेशनल टेलीकॉम टावर पॉलिसी की ज़रूरत है जिसके  तहत कंपनियों को सरकारी बिल्डिंगों, सरकारी ज़मीन और डिफेन्स लैंड पर टावर लगाने की मंजूरी मिल सके और टावर्स को 24 घंटे बिजली मिले ‘

Also Read:  "Salman Khan is friend, but friendship not above nation"

गौरतलब हो कि सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों के इस बयान पर पलटवार करते हुए कहा था कि कॉल ड्रॉप की समस्या पिछले आठ महीनों में बढ़ी है. सरकार ने साफ निर्देश दिया था कि टेलीकॉम कंपनियां नई टॉवर पॉलिसी की मांग करने के बजाए नेटवर्क को बेहतर बनाएं. लेकिन अब जबकी जाँच के आदेश दिए गए हैं, तो इस मामले को  लेकर टेलिकॉम कंपनियां कितनी सतर्क होती है, यह तो वक़्त के साथ ही पता चलेगा.

Also Read:  अखिलेश की तरफ से जारी लिस्ट के बाद सपा-कांग्रेस गठबंधन पर अनिश्चितता

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here