एकलव्य यह देश शर्मिंदा है, द्रोणाचार्य अब तक जिंदा है

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दिलीप मंडल

ये सचमुच ज्ञान के मंदिर हैं, जहां दरवाजे पर पुजारी मतलब कि प्रोफेसर लट्ठ और चाकू लेकर खड़ा है.

संवैधानिक रिजर्वेशन की वजह से इनके मंदिरों में SC, ST, OBC के स्टूडेंट्स की संख्या लगभग 50% हो गई है. लेकिन फैकल्टी यानी शिक्षक अभी वही हैं. उनकी सामाजिक संरचना कम बदली है.

उनका मंदिर शूद्रों और अतिशूद्रों के प्रवेश से अशुद्ध हुआ जा रहा है.

वे हिंसक हो गए हैं. वे खूंखार हैं. वे इंटरव्यू यानी वाइवा में उन्हें फेल कर सकते हैं. IIT रुड़की की तरह उन्हें निकाल बाहर कर सकते हैं. वे उन्हें क्लास में अपमानित या उपेक्षित कर सकते हैं. वे बेहद हिंसक हैं. वे एकलव्यों का सामाजिक बहिष्कार कर सकते हैं. वे रोहित की जान ले सकते हैं.

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ये कोल्ड बल्डेड मर्डर है. सोचा समझ कर की गई हत्या.

बीजेपी का एक केंद्रीय मंत्री बंदारू दत्तात्रेय, दूसरी केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को ऑफिशियल चिट्ठी लिखता है कि आंबेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन पर कार्रवाई कीजिए. इस पर कार्रवाई होती है. स्मृति ईरानी के निर्देश पर वाइस चांसलर पांच छात्रों के सामाजिक बहिष्कार का नोटिस जारी करके है.

BHE minister Bangaru Dattatreya's letter to Smriti Irani
BHE minister Bangaru Dattatreya’s letter to Smriti Irani

दो आरोप है. आप दत्तात्रेय का पत्र देखें. फांसी पर ग्लोबल बहस में जब इस देश के कई जज, प्रोफेसर, मानवाधिकार कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं, तब कैंपस में इसपर सेमिनार करना अपराध बताया गया है. एबीवीपी के जिस छात्र ने मारपीट का आरोप लगाया था, वह खुद यूनिवर्सिटी को लिखकर माफी मांग चुका है. सामाजिक बहिष्कार अपने आप में क्रूरता है. दलितों को यह सजा देने के और भी मायने हैं.

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यह कोल्ड ब्लड मर्डर है. सोच समझकर की गई हत्या. रोहित वेमुला की हत्या की गई है.

अगर रोहित वेमुला पर शोक मनाने के लिए और नाराजगी जताने सिर्फ दलित बहुजन आगे आते हैं, हाशिमपुरा और भागलपुर दंगों या अखलाक के लिए अगर सिर्फ मुसलमान रोता है, लक्ष्मणपुर बाथे नरसंहार के लिए सिर्फ OBC या दलित दुखी होते हैं, भगाना या खैरलांजी अगर सिर्फ दलित महिलाओं का मुद्दा है, कंधमाल को लेकर शोक मनाने का दायित्व अगर सिर्फ ईसाइयों का है, दांतेवाड़ा का दर्द अगर सिर्फ आदिवासियों को होता है…

…. तो लोगों का नागरिक बनाना तो छोड़िए, इंसान बनाना भी पूरा नहीं हुआ है. वे अपने अपने कबीलों के सदस्य हैं, जिन्हें इतिहास ने एक नक्शे के अंदर रहने को मजबूर कर दिया है.

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RSS के बगलबच्चा संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी ABVP की शिकायत के बाद जब रोहित वेमुला समेत पांच छात्रों को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी हॉस्टल से जबर्दस्ती निकाला गया, तो अपने कमरे से ‘खतरनाक सामान’ यानी बाबा साहेब और सावित्रीबाई फुले की तस्वीर लेकर वे बाहर आए. जिस बच्चे के हाथ में बाबा साहेब की तस्वीर है, वह रोहित है, जिसे RSS और प्रोफेसरों ने मिलकर आज मार डाला. गांव का रहने वाला एक बच्चा, तमाम तनाव, परिवार की महत्वाकांक्षा, अकेलेपन का बोझ झेल रहा होता है, और यूनिवर्सिटी उसके सामाजिक बहिष्कार का आदेश जारी कर देती है.

एकलव्य यह देश शर्मिंदा है,
द्रोणाचार्य अब तक जिंदा है.

Dilip Mandal is a senior journalist and former editor of India Today magazine (Hindi)

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