गोरखपुर: BRD मेडिकल कॉलेज में हुई बच्चों की मौत मामले में डॉ. कफील खान की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर युवक का CM योगी के नाम खुला पत्र

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिले गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले साल अगस्त महीने में हुई नवजातों की मौत मामले को लेकर राज्य के एक युवा ने सीएम योगी के नाम एक खुला पत्र लिखा है। अपने आप को यूपी का एक राष्ट्रवादी नागरिक बताने वाले मसीहुज़्ज़मा अंसारी नाम के युवक ने सीएम योगी को लिखे पत्र में मासूमों की मौत के मामले में अभियुक्त बनाए गए इंसेफलाइटिस वार्ड के प्रभारी रहे डॉक्टर कफील खान के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग की है।

(AFP)

बता दें कि बच्चों की मौत मामले में मीडिया में हीरो से जीरो बने डॉ कफील खान की जमानत को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी हुई है। डॉ कफील को पिछले साल सितंबर महीने में गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद से ही वह गोरखपुर जेल में बंद है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 सितम्बर 2017 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी। तब से वे जेल में बंद हैं। गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त के महीने में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की सप्लाइ रुक जाने की वजह से सैकड़ों मासूम बच्चों की मौत हो गई थी।

युवा द्वारा CM योगी को लिखा गया पत्र इस प्रकार है:-

सेवा में,
माननीय योगी आदित्यनाथ जी
मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

विषय: गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में निरंतर हो रही बच्चों की मौत और डॉक्टर कफ़ील ख़ान की निष्पक्ष जांच कराने के सम्बंध में।

महोदय,
आप के संज्ञान में ये बात है कि पिछले वर्ष बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में ऑक्सीजन की कमी से हुई बच्चों की मौत के मामले में बहुत से लोगों पर कार्यवाही हुई है जिसमें 9 लोग आज भी जेल में हैं। उन 9 लोगों में सबसे जूनियर डॉक्टर कफील खान भी जेल में हैं जिन्हें बच्चों की मौत का दोषी बताया गया था जो कि घटना के दिन छुट्टी पर थे।

माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, मैं आप के संज्ञान में ये बात लाना चाहता हूं कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत का सिलसिला अब तक थमा नहीं है। लगातार ख़बरें आ रही हैं कि अभी भी बच्चों की मौत निरंतर हो रही है। कुछ दिनों पहले ही गोरखपुर के न्यूज़ पोर्टल ने एक ख़बर प्रकाशित की थी कि मेडिकल कॉलेज में पिछले 6 महीनों में 300 से ज़्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। एक दूसरी ख़बर के अनुसार मौत का ये आंकड़ा 445 के लगभग है। बच्चों की मौत का ये आंकड़ा चौंकाने वाला है और संदेह पैदा करने वाला भी है कि आख़िर मौत का ये सिलसिला संयोग मात्र है, लापरवाही है या फिर किसी साज़िश का हिस्सा?

अगस्त 2017 में गोरखपुर मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन की क़िल्लत से हुई बच्चों की मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया था। बच्चों की लगातार हो रही मौत से सारा देश ग़म में डूबा हुआ था। उस विषम परिस्थिति में कुछ लोगों ने अपनी मेहनत लगन और कर्तव्यनिष्ठा से बहुत से बच्चों की जान बचायी। इंसान के रूप में फ़रिश्ते बनकर लोगों की सहायता की और बहुत सी सम्भावित मौतों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन लोगों में सबसे प्रमुख नाम डॉक्टर कफील खान का है जिसे उस वक़्त बहुत से मीडिया चैनल्स ने कवर किया था। कई दिनों तक न्यूज़ चैनल्स पर डॉक्टर कफील खान फ़रिश्ते बने रहे।

माननीय मुख्यमंत्री जी, जैसे ही आप का दौरा गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में हुआ उसके बाद सारी कहानी बदलने लगी। डॉ. कफील पर एक के बाद दूसरे आरोप लगाए जाने लगे। और फिर अंततः मीडिया डॉ. कफील खान को विलेन साबित करने में कामयाब हो गया। कुछ दिनों बाद बक़रीद के दिन डॉ. कफील की गिरफ़्तारी हो गयी । तब से अब तक लगभग 6 महीने हो चुके हैं और डॉ. कफील खान जेल में हैं।

महोदय, मैं आप से ये प्रश्न करना चाहता हूँ कि आख़िर इस बात की जाँच क्यों नहीं होनी चाहिए कि जब डॉ. कफील खान व अन्य आरोपी जेल में हैं तो फिर ये बच्चों की मौतों का सिलसिला कैसे बढ़ता जा रहा? ये मौत कैसे हो रही? अब कौन से कारण हैं जो लगातार हो रही मौत के ज़िम्मेदार हैं? अगर दोषी अंदर हैं तो बाहर कौन है जो मौत के कारोबार में संलग्न है?

माननीय मुख्यमंत्री जी, हमें पूर्ण विश्वास है कि आपके निष्पक्ष जाँच के आदेश के पश्चात ही लोग जेलों में बंद हैं और निष्पक्ष जाँच में जो भी दोषी हो उसे सज़ा अवश्य होनी चाहिए। मगर मैं बस आप का वचन याद दिलाकर एक विनती करना चाहता हूँ कि जिस गोरखपुर में आपने एतिहासिक शब्द कहा था कि मैं किसी के साथ भी धर्म, पंथ व सम्प्रदाय के आधार पर अन्याय नहीं होने दूँगा, उसी गोरखपुर की धरती पर गोरखपुर के लाल डॉ. कफील के साथ जाँच में भेदभाव होने की बातें सामने आर ही हैं। अगर ये सच है तो ये आप के न्याय के वचन और गोरखपुर की पावन धरती का अपमान होगा।

माननीय योगी जी, बच्चों की मौत और उस से सम्बन्धित बहुत से पहलू हैं जिसकी आड़ में असल दोषी बचे हुए हैं। अभी भी जो मौत की ख़बरें आर ही हैं उनसे ये स्पष्ट है कि मौत का सम्बंध किसी और गिरोह व कारण से है। डॉ. कफील  अपने विभाग में एक जूनियर डॉक्टर मात्र हैं जिन्हें कोई भी आर्थिक विभागीय निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त नहीं है जिसका उन्हें मुलज़िम बनाया गया है। अगर आप पुनः उच्च स्तरीय जाँच करवाएँ तो शायद असल दोषियों तक क़ानून का हाथ पहुँच सकता है। योगी जी, आप जैसे ईमानदार, धार्मिक और राष्ट्रवादी मुख्यमंत्री से ही निष्पक्ष जाँच की कामना की जा सकती है।

धन्यवाद

-मसीहुज़्ज़मा अंसारी
(उत्तर प्रदेश का एक मानवतावादी व राष्ट्रवादी नागरिक)

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