किसान आंदोलन: मंदसौर जा रहे योगेंद्र यादव, मेधा पाटकर और स्‍वामी अग्निवेश को पुलिस ने हिरासत में लिया

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मध्य प्रदेश के मंदसौर जा रहे स्‍वराज इंडिया के प्रमुख योगेंद्र यादव और सामाजिक कार्यकर्ताओं मेधा पाटकर और स्‍वामी अग्निवेश को रविवार(11 जून) को हिरासत में ले लिया गया है। मंदसौर में घुसने से पहले ही पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया। 

तीनों से साथ करीब दर्जनों कार्यकर्ताओं को भी मंदसौर के पड़ोसी जिले रतलाम के धोधर टोल प्‍लाजा पर पुलिस ने रोक दिया। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, योगेन्द्र यादव, मेधा पाटेकर और स्वामी अग्निवेश को रतलाम के जाहोरा में धारा 151 के तहत हिरासत में लिया गया।

पुलिस ने कहा कि उनके दौरे से मंदसौर की शांति भंग हो सकती है, जिस वजह से इन्हें हिरासत में लिया गया है। मेधा पाटकर के साथ स्वामी अग्निवेश, योगेंद्र यादव, डॉ सुनीलम और पारस सखलेचा को उस समय पुलिस हिरासत में लिया गया जब वे मंदसौर जाने का प्रयास कर रहे थे।

बता दें कि इससे पहले किसानों के पीड़ित परिवारों से मिलने जा रहे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया था, जिसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है। हालांकि, कांग्रेस उपाध्यक्ष ने जमानत लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन जब प्रशासन ने उन्हें पीड़ित परिवारों से मिलने की इजाजत दे दी तो उन्होंने जमानत लेना स्वीकार कर लिया।

शिवराज ने खत्म किया उपवास

इस बीच मध्यप्रदेश में चल रहे किसान आंदोलन के दसवें दिन शनिवार(10 जून) को भोपाल के दशहरा मैदान में ‘शांति बहाली के लिये’ अनिश्चितकालीन उपवास पर बैठे प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार(11 जून) को उपवास तोड़ दिया। बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जूस पिलाकर उपवास तुड़वाया। बता दें कि बीते शनिवार को सूबे में शांति बहाली ना होने तक उन्होंने उपवास पर रहने का ऐलान किया था।

शिवराज ने कहा कि जब-जब राज्य में किसानों पर संकट आया, मैं मुख्यमंत्री आवास से निकलकर उनके बीच पहुंच गया। हम नया आयोग बनाएंगे जो फसलों की सही लागत तय करेगा। उस लागत के हिसाब से हम किसानों को सही कीमत दिलाएंगे। उन्होंने कहा कि मारे गए किसानों के परिजन मुझसे मिले और उपवास तोड़ने को कहा।

उपवास तोड़ने से पहले चौहान ने कहा कि ‘प्रदेश में शांति बहाली हो गई है। कल और आज कोई भी हिंसा की रिपोर्ट मध्यप्रदेश से नहीं आई है। इसलिए अब मैं उपवास तोड़ रहा हूं।’ बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कैलाश जोशी ने चौहान को एक गिलास नारियल पानी पिलाकर उनका उपवास तुड़वाया। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चौहान के इस उपवास को नौटंकी बताया था।

6 किसानों की मौत

बता दें कि राज्य के मंदसौर में मंगलवार(6 जून) को किसान आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में छह किसानों की मौत हो गई थी और कई अन्य किसान घायल हो गये थे। इसके बाद किसान भड़क गये और किसान आंदोलन समूचे मध्य प्रदेश में फैल गया तथा और हिंसक हो गया।

शिवराज सरकार का ‘यू-टर्न’

वहीं, गुरुवार(8 जून) को मध्य प्रदेश सरकार ने आखिरकार मान लिया कि मंदसौर में भड़के किसान आंदोलन में पांच लोगों की मौत पुलिस की गोली से ही हुई थी। राज्य के गृहमंत्री ने स्वीकारा कि किसानों पर पुलिस ने ही गोली चलाई थी।
गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पांच किसानों की मौत पुलिस की गोलीबारी में हुई है। जांच में इसकी पुष्टि हुई है।

बता दें कि इससे पहले इससे पहले पिछले दो दिनों से प्रदेश सरकार पुलिस फायरिंग से इनकार कर रही थी। भूपेंद्र सिंह समते राज्य सरकार के सभी अधिकारी अब तक यही कह रहे थे कि गोली अराजक तत्वों द्वारा चलाई गई थी। किसान लगातार इस दावे को खारिज कर रहे थे।

1 जून आंदोलन कर रहे हैं किसान

बता दें कि मध्यप्रदेश में किसानों ने गुरुवार(1 जून) को शिवराज सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कर्ज माफी और अपनी फसल के वाजिब दाम की मांग को लेकर किसानों की हड़ताल अभी भी जारी है। किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी है। सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा।

किसानों की प्रमुख मांगे

  • स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं।
  • किसानों को फसलों का उचित दाम मिले और समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए।
  • आलू, प्याज सहित सभी प्रकार की फसलों का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
  • आलू, प्याज की कीमत 1500 रुपये प्रति क्वंटल हो।
  • बिजली की बढ़ी हुई दरें सरकार जल्द से जल्द वापस लें।
  • आंदोलन के दौरान किसानों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएं।
  • मंडी शुल्क वापस लिया जाए।
  • फसलीय कृषि कर्ज की सीमा 10 लाख रुपए की जाए।
  • वसूली की समय-सीमा नवंबर और मई की जाए।
  • किसानों की कर्ज माफी हो।
  • मध्यप्रदेश में दूध उत्पादक किसानों को 52 रुपये प्रति लीटर दूध का भाव तय हो।

 

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