वर्ल्‍ड इकॉनोमिक फोरम के पायदान पर नीचे आया भारत, एक अंक गिरी भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था की रेटिंग

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आज ही पूर्व वित्त मंत्री यंशवत सिन्हा ने बेखौफ होकर कहा कि ‘वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अर्थव्यवस्था का ‘कबाड़ा’ कर दिया है। जबकि BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि आप देश में चारों तरफ घूमकर देखिए कहीं हताशा-निराशा और बेरोजगारी-परेशानी का वातावरण नहीं है।

अर्थव्‍यवस्‍था

विश्व आर्थिक मंच के वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सूचकांक में इस साल भारत का यह स्थान है जो हालांकि पिछले साल की तुलना में एक स्थान नीचे हैं। इस सूचकांक में दुनिया की सर्वाधिक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था स्विट्जरलैंड है। मंच की नवीनतम ‘वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता रपट’ में कुल 137 अर्थव्यवस्थाओं के बीच आकलन किया गया है। इसमें स्विट्जरलैंड शीर्ष पर है जिसके बाद अमेरिका दूसरे और सिंगापुर तीसरे स्थान पर है। इस रपट में पिछले साल भारत का स्थान 39वां था जो इस वर्ष 40 है जबकि पड़ोसी मुल्क चीन 27वें स्थान पर है।

जबकि इससे पहले पूर्व वित्त मंत्री ने इन्‍हीं आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि नोटबंदी के फैसले से देश को आर्थिक नुकसाना उठाना पड़ा है। पी चिदंबरम के मुताबिक आरबीआई ने कहा कि कुल 1544,000 करोड़ रुपए के 1,000 और 500 रुपए में से 16000 करोड़ रुपए के नोट वापस नहीं लौटे, जो कि लगभग 1 प्रतिशत के बराबर है। ऐसे में आरबीआई को शर्म करनी चाहिए कि उसने नोटबंदी का समर्थन किया।

रपट में कहा गया है, ‘‘पिछले दो साल में लंबी छलांग लगाने के बाद इस वर्ष भारत की स्थिति स्थिर रही है।’’ साथ ही प्रतिस्पर्धा के कई मानकों में इसकी स्थिति बेहतर हुई है जिसमें बुनियादी ढांचा क्षेत्र में इसका स्थान 66वां, उच्च शिक्षा एवं प्रशिक्षण में 75वां और तकनीक तौर पर तैयार देशों में 107वां स्थान है जो इन क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश को दिखाता है।

आपको बताते इससे पूर्व भारत में आई आर्थिक मंदी पर चिंता व्यक्त करते हुए विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने जीडीपी के नवीनतम आंकड़ों पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी, जिसमें कहा गया था कि भारत के विकास में गिरावट “बहुत चिंताजनक” हैं। बसु ने कहा नोटबंदी के इस राजनीतिक फैसले की देश को एक भारी कीमत चुकानी होगी जिसका भुगतान देशवासियों को करना पड़ेगा।

भाषा की खबर के मुताबिक, रपट के अनुसार सूचना एवं संचार तकनीक संकेतक क्षेत्र में भी भारत का प्रदर्शन बेहतर हुआ है। विशेषकर प्रति व्यक्ति इंटरनेट का उपभोग, मोबाइल फोन और ब्रांडब्रैंड कनेक्शन और स्कूलों में इंटरनेट की पहुंच के मामले में यह सुधरा है।

हालांकि आर्थिक मंच की रपट में कहा गया है कि निजी क्षेत्र के लिए भारत में कारोबार करने के संदर्भ में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है। रपट के अनुसार, नवोन्मेष के क्षेत्र में भारत का स्थान 29 और तकनीकी तौर पर तैयार देश के मामले में 107 है। इन दोनों के बीच का यह अंतर एक बड़ी समस्या है। इसके चलते भारत अपनी तकनीकी क्षमता का उपयोग अपनी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए करने में सक्षम नहीं होगा।

ब्रिक्स समूह देशों में चीन और रूस दोनों ही भारत से ऊपर हैं। इस सूची में रूस का स्थान 38वां है। दक्षिण एशिया के पड़ोसी मुल्कों में भूटान 85वें, श्रीलंका 85वें, नेपाल 88वें, बांग्लादेश 99वें और पाकिस्तान 115वें स्थान पर है।

यशवंत सिन्हा ने तंज कसते हुए कहा, ‘प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि उन्होंने गरीबी को काफी करीब से देखा है। ऐसा लगता है कि उनके वित्त मंत्री ओवर-टाइम काम कर रहे हैं जिससे वह सभी भारतीयों को गरीबी को काफी नजदीक से दिखा सकें।’

यशवंत सिन्हा के इस तंज पर PM मोदी को गौर करना चाहिए। PM मोदी हमेशा अमीरों के साथ खड़े होकर गरीबों की बात करते हुए दिखाई देते है। अमित शाह और PM मोदी को पूर्व अंतर्राष्ट्रीय एथिलीट अजीत वर्मा  का यह वीडियो देखना चाहिए जो देश की सच्चाई को सामने रख देता है। वीडियो में हम देखते है कि एक गरीब बुर्जग को जब दिनभर तलाश करने के बावजूद कहीं काम नहीं मिलता तो वह अपनी पुरानी उधड़ी हुई पतलून को सिलने लग जाता है। उसी समय अजीत वर्मा ने उससे बात करते हुए यह वीडियो बना लिया। वह व्यक्ति वीडियो में बताता है कि मैं कोई भिखारी नहीं हूं। आज कहीं काम नहीं मिला इसलिए अपनी पेंट सीने लगा हूं।

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