सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास रचने वाली कनकदुर्गा पर उनकी सास ने किया जानलेवा हमला! अस्पताल में भर्ती

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सैकड़ों साल पुरानी परंपरा तोड़ते हुए केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर इतिहास रचने वाली दो महिलाओं में से एक कनकदुर्गा पर तथाकथित रूप से उनकी सास ने उनपर जानलेवा हमला किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सिर पर चोट लगने के चलते कनकदुर्गा को एक स्थानीय अस्तपाल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की वजह से उनकी सास नाराज थीं। आपको बता दें कि 2 जनवरी को ‘प्रतिबंधित’ उम्र वाली कनकदुर्गा और बिंदू नाम की दो महिलाओं ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर भगवान अयप्पा के दर्शन किए थे।

(REUTERS FILE PHOTO)

हालांकि, महिलाओं के प्रवेश के बाद पूरे राज्य में जमकर हंगामा हुआ था और मंदिर को शुद्धीकरण के लिए कुछ देर के लिए बंद किया गया था। इन दोनों महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर में दर्शन किए थे जिसमें पिछले साल शीर्ष अदालत ने 10 से 50 साल की महिलाओं के सबरीमाला में प्रवेश की पाबंदी को असंवैधानिक करार देते हुए इस प्रतिबंध को हटा दिया था।

मंदिर में प्रवेश के बाद से कनकदुर्गा अलग-अलग जगहों पर रह रही थीं। उन्हें डर था कि जो लोग उनका विरोध कर रहे हैं वह उन पर हमला कर सकते हैं। उन्हें दक्षिणपंथी विचाधारा के प्रदर्शनकारियों से लगातार धमकियां मिल रही थीं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनकदुर्गा जब मंगलवार सुबह अपने घर पहुंची तो उनकी सास ने उन पर हमला बोल दिया। बताया जा रहा है कि सास ने उनके सिर पर वार किया है, जिस वजह से कनकदुर्गा को सिर पर चोट आई है। फिलहा वह अस्पताल में भर्ती हैं। हालांकि चोट ज्यादा गंभीर नहीं है।

करनदुर्गा की हालत स्थिर बनी हुई है और उन्हें मेडिकल टेस्‍ट के लिए अस्‍पताल रेफर किया गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कनकदुर्गा पर जिस वक्त हमला हुआ, उस वक्त उनके घर के बाहर पुलिसकर्मी मौजूद थे, चूंकि हमला घर के अंदर हुआ इसलिए कोई पुलिसकर्मी कनकदुर्गा को बचा नहीं सके। बता दें कि महिलाओं के मंदिर में प्रवेश के बाद राज्य में काफी प्रदर्शन हुआ था। सीपीआईएम और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई थी, जिसमें एक 55 वर्ष के बरीमाला कर्म समिति के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी।

महिलाओं ने रचा इतिहास

गौरतलब है कि रजस्वला आयु वर्ग की दो महिलाओं कनकदुर्गा (44 वर्ष) और बिंदू (42 वर्ष) ने हिन्दूवादी संगठनों की तमाम धमकियों की परवाह न करते हुए 2 जनवरी 2019 को तड़के भगवान अयप्पा के सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर सदियों पुरानी परंपरा तोड़ दी। कनकदुर्गा और बिंदू पुलिस की निगरानी वाले पवित्र मंदिर में पहुंचीं। काले परिधान पहने और चेहरों को ढकी महिलाओं ने तड़के तीन बजकर 38 मिनट पर मंदिर में प्रवेश किया।

बिंदू कॉलेज में लेक्चरर और भाकपा (माले) कार्यकर्ता हैं। वह कोझिकोड जिले के कोयिलैंडी की रहने वाली है। वहीं, कनकदुर्गा मलप्पुरम के अंगदीपुरम में एक नागरिक आपूर्ति कर्मी हैं। वे दोनों 24 दिसंबर को सबरीमाला आई थीं। इससे पहले चेन्नई के एक संगठन ने 11 महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने से रोक दिया था और अयप्पा मंत्रोच्चारण कर रहे श्रद्धालुओं ने उन्हें वहां से लौटा दिया था।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 10 वर्ष से 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बावजूद इस आयुवर्ग की कोई बच्ची या युवती श्रद्धालुओं एवं दक्षिणपंथी संगठनों के विरोध के कारण मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को माकपा नीत एलडीएफ सरकार ने लागू करने का फैसला किया। इसके बाद से मंदिर में 10 से 50 साल आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

 

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