‘ऊना की दर्दनाक घटना पर PM मोदी मौन क्यों हैं, इस घटना की जवाबदेही कौन लेगा?’

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गुजरात में दूसरे चरण का मतदान 14 दिसंबर को होना है, दूसरे चरण के मतदान के लिए राजनीतिक दल के नेता पूरे जोर-शोर से राज्य में चुनाव प्रचार कर मतदाओं को रिझाने में लगे हुए है। इसी बीच, कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने दिन का सवाल अभियान को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंगलवार (12 दिसंबर) को अपना 14वां सवाल पूछा। अपने इस सवाल में उन्होंने दलितों का मुद्दा उठाया है।

PHOTO: (MARK SCHIEFELBEIN/AFP/Getty Images)

उन्होंने कहा कि गुजरात के दलितों को केवल असुरक्षा ही मिली है, उनके पास न जमीन है, न रोजगार है, न स्वास्थ और न शिक्षा है। साथ ही उन्होंने कहा कि ऊना की घटना पर पीएम मोदी मौन क्यों हैं? इस घटना की जवाबदेही कौन लेगा? राहुल ने कहा कि दलितों के लिए कानून तो बहुत बनाए गए लेकिन ऐसे कानूनों को कब लागू किया जायेगा?

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि, न जमीन, न रोजगार, न स्वास्थ्य, न शिक्षा, गुजरात के दलितों को मिली है बस असुरक्षा। ऊना की दर्दनाक घटना पर मोदी जी हैं मौन इस घटना की जवाबदेही लेगा फिर कौन? कानून तो बहुत बने दलितों के नाम कौन देगा मगर इन्हे सही अंजाम?

दरअसल, राहुल गांधी सोशल मीडिया के जरिए लगातार ट्वीट कर पीएम मोदी और बीजेपी पर निशाना साधते रहे हैं। ऐसे में बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने यह नई रणनीति तैयार की है, जिसके तहत गुजरात विधानसभा चुनाव तक राहुल पीएम मोदी से रोजाना एक सवाल करेंगे।

बता दें कि इससे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पीएम मोदी से 13 सवाल पूछ चुके हैं। इनमें राहुल ने बीजेपी के चुनावी वादों, स्वास्थ्य का मुद्दा, गुजरात पर कर्ज, निजी बिजली कंपनियों को फायदा, शिक्षा, महिला सुरक्षा और रोजगार संबंधी मुद्दों पर पीएम से जवाब मांगा है।

गौरतलब है कि, राज्य में दूसरे चरण के मतदान के लिए 14 दिसंबर को वोट डाले जाएंगे, इस चरण में 14 जिलों की 93 सीटों के लिए मतदान होगा। बता दें कि, पहले चरण के लिए 9 दिसंबर को वोट डाले जा चुके हैं, पहले चरण में 68 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। वोटों की गिनती हिमाचल प्रदेश विधानसभा के साथ ही सोमवार (18 दिसंबर) को होगा।

बता दें कि, पिछले साल ऊना में मरी गाय की खाल निकालने पर चार दलितों की बेरहमी से पिटाई की गई थी। जिसके बाद यह घटना आग की तरह फैल गई थी। इसके विरोध में दलितों ने गुजरात के सरकारी कार्यालयों के सामने मरी गायें डाल दी थीं। साथ ही गुजरात समेत देशभर में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए थे।

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