‘अटल जी को दारूबाज बोलने वाले सुब्रमण्यम स्वामी को राज्यसभा, आडवाणी को गिरफ्तार करने वाले आरके सिंह कैबिनेट मंत्री’

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार(3 अगस्त) को अपने मंत्रिपरिषद का बहुप्रतीक्षित विस्तार किया, जिसमें नौ नये चेहरों को शामिल किया गया और चार मंत्रियों धर्मेन्द्र प्रधान, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण और मुख्तार अब्बास नकवी को कैबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नति मिली। जबकि मंत्रिपरिषद विस्तार में अश्विनी कुमार चौबे, वीरेंद्र कुमार, शिव प्रताप शुक्ला, अनंत कुमार हेगड़े, राज कुमार सिंह, हरदीप पुरी, गजेंद्र सिंह शेखावत, सत्यपाल सिंह और के जे एल्फॉस ने राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली।इस फेरबदल में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व गृह सचिव और बिहार के आरा से बीजेपी सांसद राज कुमार सिंह उर्फ आरके सिंह को लेकर हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कैबिनेट में किए गए इस बड़े बदलाव के तहत आरके सिंह को स्वतंत्र प्रभार का बिजली राज्य मंत्री बनाया गया है। साथ ही उनके पास नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार भी होगा।

लालकृष्ण आडवाणी को किया था गिरफ्तार

मोदी सरकार द्वारा आरके सिंह को मंत्री बनाए जाने के बाद उनके कुछ पिछले कारनामों को याद कर सोशल मीडिया यूजर्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं। दरअसल, आरके सिंह वही शख्स हैं, जिन्होंने 1990 में सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा पर निकले भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी का रथ बिहार के समस्तीपुर में रोक दिया था। इतना ही नहीं सिंह ने आडवाणी को गिरफ्तार भी कर लिया था। आरके सिंह उस समय समस्तीपुर के जिलाधिकारी थे।

उस वक्त बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने 30 अक्तूबर 1990 को समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था। जिसके बाद आरके सिंह ने रथयात्रा के दौरान लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस घटना के बाद बीजेपी ने तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, जिससे सरकार गिर गई थी।

वर्ष 1975 बैच के बिहार कैडर के 64 वर्षीय आईएएस अधिकारी आर के सिंह जून 2011 में केंद्रीय गृह सचिव बने थे और दो साल बाद जून 2013 में हो गए। जिसके बाद उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया और 2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार के आरा से सांसद बनकर आए है। सांसद बनने से पहले सिंह की गिनती भारत के कड़क नौकरशाह के तौर पर होती थी।

RSS पर भी साध चुके हैं निशाना

इतना ही नहीं आरके सिंह ने केंद्रीय गृह सचिव पद पर रहते हुए समझौता एक्सप्रेस और मालेगांव धमाके में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ(RSS) से जुड़े संगठनों और लोगों के नाम होने की बात सामने आने की बात कही थी। जनवरी 2013 के बयान दिया था कि इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि संदिग्ध आतंकवादी कभी न कभी RSS के कैंपों के साथ जुडे रहे हैं। हालांकि, बीजेपी में शामिल होने के बाद सिंह अपने बयान से पलटी मार गए थे। उन्होंने कहा था कि ये विचार उनके नहीं, सरकार के थे।

BJP पर लगाया था टिकट बेचने का आरोप

इसके अलावा आरके सिंह कई मौकों पर अपनी बयानबाजी से पार्टी की फजीहत करा चुके हैं। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान सिंह ने आरोप लगाया था कि पार्टी की प्रदेश इकाई पैसे लेकर टिकट बांट रही है। साथ ही कहा था कि बीजेपी पैसे लेकर अपराधियों और दागियों को टिकट दे रही है। बीजेपी सांसद ने NDTV से बातचीत में कहा था कि मैं दागियों के लिए प्रचार नहीं करूंगा।

पार्टी में टिकट वितरण पर सवाल उठाते हुए आरके सिंह ने कहा था कि, ‘जिस तरह टिकट बंटवारा हुआ, मुझे लगा कि कार्यकर्ताओं की नाराजगी में दम हैं। आप अपराधियों को टिकट दे रहे हैं। उन मौजूदा विधायकों की टिकट काटी जा रही है, जो नेताओं की जी-हुजूरी नहीं करते। आखिर, अपराधियों को टिकट देकर बिहार को साफ प्रशासन कैसे दिया जा सकता है। फिर हममें और लालू में क्‍या फर्क रह जाएगा। हालांकि, अब मोदी सरकार में सिंह को जगह दिया जाना बीजेपी नेतृत्व के उन पर भरोसे का संकेत है।

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