जब नीतीश कुमार ने जीएसटी के लिए स्‍पेशल ऑफर के साथ वित्त मंत्री अरुण जेटली को किया फोन

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सरकार को वस्‍तु एवं सेवा बिल पास करने के लिए आखरी समय अप्रैल 2017 दिया गया है. सरकार इस बिल के पास होने पर काफी खुश है और इसका जश्न भी मनाया जा रहा है, यहाँ तक की प्रधानमंत्री के सत्ता में अाने के बाद की यह सबसे सफल जीत बताई जा रही है.

अब लोकसभा में इसके पास होने का रास्‍ता आसान हो गया है क्‍योंकि सरकार वहां बहुमत में है. उसके बाद जीएसटी को देश के 29 राज्‍यों में से कम से कम 15 राज्‍यों से पारित होना आवश्‍यक है. सरकार चाहती है कि यह काम अगले 30 दिनों के भीतर पूरा हो जाए.

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बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के वैसे तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मधुर संबंध नहीं हैं, लेकिन उन्‍होंने कहा कि वे अपनी तरफ से जो कर सकते हैं, जीएसटी के लिए वह करने को तैयार हैं.

 NDTV कि एक खबर के अनुसार, विधानसभा का मॉनसून सत्र गुरुवार को समाप्‍त हो चुका है लेकिन नीतीश कुमार ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को फोन कर प्रस्‍ताव दिया कि जीएसटी को पास करने के लिए वह सदन का विशेष सत्र भी बुला सकते हैं. मुख्‍यमंत्री ने पहले कहा था कि जीएसटी लागू होने से बिहार के राजस्‍व में हर साल करीब 8000 करोड़ रुपये का इजाफा होगा.

संसद और उसके बाद राज्‍य जिसे पारित करने की प्रक्रिया में हैं वह एक संविधान संशोधन है जो सरकार को नई कर शक्ति प्रदान करेगा. बाद में जीएसटी की नई दर और उसके पैमाने को लेकर नया कानून अलग से रिव्‍यू के लिए भेजा जाएगा.

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राज्‍य सरकारें व्‍यापक रूप से जीएसटी का समर्थन कर रही हैं क्‍योंकि इससे केंद्रीय करों के उनके हिस्‍से में बढ़ोतरी होगी और अतर्राज्‍यीय व्‍यापार और सुगम हो जाएगा. राज्‍यों के प्रतिनिधि जीएसटी की दर तय करने के लिए वित्त मंत्री के साथ सहयोग करेंगे. हालांकि सरकार के मुख्‍य आर्थिक सलाहकार ने 18 फीसदी की दर का सुझाव दिया है लेकिन वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है इसकी दर इससे ज्‍यादा हो सकती है. मुख्‍य विपक्षी दल कांग्रेस ने कहा है कि अगर जीएसटी की दर 18 फीसदी से अधिक होती है तो वह इसका विरोध करेगी.

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चूंकि जीएसटी खपत पर लागू होता है, इसलिए चीजों का उत्‍पादन करने वाले राज्‍यों को होने वाले नुकसान की भरपाई 5 साल तक केंद्र द्वारा किए जाने का भरोसा दिया गया है.

विशेषज्ञ कह रहे हैं कि एक नए आईटी सिस्‍टम को स्‍थापित करना, हजारों टैक्‍स कर्मियों को प्रशिक्षण देना और कंपनियों को होने वाले बदलावों के बारे में बताना जीएसटी को समय पर लागू करने की राह में सबसे बड़ी चुनौती साबित होंगे.

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