पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में ये नहीं बताया कि भारत ने 2012 में ही ए-सैट क्षमताओं को हासिल कर लिया था

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (27 मार्च) को देश को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज अंतरिक्ष महाशक्ति बन गया है। भारत ने दुश्मन के सैटेलाइट को अंतरिक्ष में ही मार गिराने की क्षमता हासिल कर दुनिया की चौथी अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने अंतरिक्ष में एंटी मिसाइल से एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराते हुए आज अपना नाम अंतरिक्ष महाशक्ति के तौर पर दर्ज करा दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार सुबह राष्ट्र के नाम संदेश में कहा ,‘‘मिशन शक्ति के तहत स्वदेशी एंटी सैटेलाइट मिसाइल ‘ए-सैट’ से तीन मिनट में एक लाइव सैटेलाइट को मार गिराया गया।’’ उन्होंने कहा कहा कि भारत अंतरिक्ष में निचली कक्षा में लाइव सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता रखने वाला चौथा देश बन गया है। अब तक यह क्षमता केवल अमेरिका, रूस और चीन के ही पास थी।

जैसे ही पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपना संबोधन पूरा नहीं किया, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और मीडिया सहित उनके समर्थकों ने इस उपलब्धि के लिए वैज्ञानिकों के साथ-साथ प्रधानमंत्री को भी श्रेय दिया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा कि ‘मिशन शक्ति’ को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए सभी वैज्ञानिकों को बधाई। भारत एक विश्व नेता बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल ‘सुपर इकॉनमिक पावर’ बन रहा है, बल्कि ‘सुपर साइंस पावर’ भी बन गया।

लेकिन गडकरी या बीजेपी समर्थक मीडिया ने यह नहीं बताया कि भारत ने 2012 में ही ए-सैट क्षमताओं को हासिल कर लिया था। जी हां, भारत ने यह क्षमता वर्ष 2012 में ही हासिल कर ली थी जब अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण किया गया था लेकिन आरोप है कि राजनीतिक इच्‍छाशक्ति की वजह से इसके परीक्षण की अनुमति नहीं दी गई थी। इंडिया टुडे से बात करते हुए, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रमुख वीके सारस्वत ने खुद इसका खुलासा किया था।

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में सारस्वत से पूछा गया था कि क्या डीआरडीओ के पास अंतरिक्ष में सैटेलाइट्स को तबाह करने की क्षमता है? इस पर सारस्वत ने हां में जवाब देते हुए कहा था कि एंटी सैटेलाइट सिस्टम को लेकर जो तैयारियां होनी चाहिए, वे पूरी हैं। सारस्वत ने कहा था कि वे अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ के पक्षधर नहीं हैं, लेकिन इसकी तैयारी होनी चाहिए। ऐसा वक्त आ सकता है कि इसकी जरूरत पड़ जाए।

तत्कालीन डीआरडीओ प्रमुख ने इंटरव्यू में आगे कहा था कि भारत के एंटी सैटेलाइट सिस्टम को थोड़ा ‘फाइन ट्यून’ किए जाने की जरूरत है, लेकिन इसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि वह इसके लिए परीक्षण का रास्ता नहीं चुनेंगे, क्योंकि इससे तबाह हुए सैटेलाइट के टुकड़ों से दूसरे सैटेलाइटों को खतरा पैदा हो सकता है।

इसे डीआरडीओ द्वारा पुष्टि की गई थी, जिसमें कहा गया था कि भारतीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा कार्यक्रम उपग्रह-विरोधी हथियार विकास को शामिल कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, ए-सैट मिसाइल सिस्‍टम अग्नि मिसाइल और एंडवांस्‍ड एयर डिफेंस (AAD) सिस्‍टम का मिश्रण है। भारत ने वर्ष 2012 के आसपास ही इन दोनों को मिलाकर अपना एंटि सैटलाइट ए-सैट मिसाइल सिस्‍टम बना लिया था।

बता दें कि पीएम मोदी ने कहा कि हमने जो नई क्षमता हासिल की है, यह किसी के खिलाफ नहीं है बल्कि तेज गति से बढ़ रहे हिन्दुस्तान की रक्षात्मक पहल है। उन्होंने वैज्ञानिकों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि इससे किसी अंतरराष्ट्रीय कानून या संधि का उल्लंघन नहीं हुआ है।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत हमेशा से अंतरिक्ष में हथियारों की होड़ के विरूद्ध रहा है और इससे (उपग्रह मार गिराने से) देश की इस नीति में कोई परिवर्तन नहीं आया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि शांति एवं सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए एक मजबूत भारत का निर्माण जरूरी है और हमारा उद्देश्य शांति का माहौल बनाना है, न कि युद्ध का माहौल बनाना।

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