“जो पाकिस्तान 70 वर्षो में नहीं कर सका, वह मोदी-शाह की जोड़ी ने पांच साल में कर दिखाया”

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आगामी लोकसभा चुनाव में सभी विपक्षी दलों को साथ लाने की पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कवायद के तहत शनिवार (19 जनवरी) को कोलकाता में आयोजित विशाल रैली में प्रमुख विपक्षी दलों के नेता एक मंच पर नजर आए और उन्होंने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को उखाड़ फेंकने की हुंकार भरी। इस दौरान संयुक्त विपक्ष के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के मुद्दे पर ममता ने कहा कि विपक्षी दल एकसाथ मिलकर काम करने का वादा करते हैं और प्रधानमंत्री कौन होगा इस पर फैसला लोकसभा चुनाव के बाद होगा।

आयोजक के रूप में एक तरह से इस रैली की अगुवाई कर रही ममता ने कहा कि मोदी सरकार की ‘एक्सपायरी डेट (उपयोग करने की अवधि)’ खत्म हो गई है। उन्होंने कहा कि राजनीति में शिष्टता होती है लेकिन भाजपा इसका पालन नहीं करती और जो बीजेपी के साथ नहीं होता उसे वे चोर बता देते हैं। रैली में ममता ने ‘बदल दो, बदल दो, दिल्ली की सरकार बदल दो’ का नारा भी दिया।

वहीं, यूनाइटेड इंडिया रैली में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने लोगों से केंद्र की ‘‘खतरनाक’’ बीजेपी सरकार को किसी भी कीमत पर हराने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश गंभीर संकट के दोराहे पर है। देश और लोकतंत्र को बचाने के लिए मोदी सरकार को तुरंत बदलने की जरूरत है। केजरीवाल ने कहा कि 70 साल में जो काम पाकिस्तान नहीं कर सका, वो मोदी और शाह की जोड़ी ने पांच साल में कर दिखाया। इस जोड़ी ने हिंदू और मुसलमान को लड़ा दिया, भाई को भाई को भाई से लड़ा दिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी पर देश में नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को यहां कहा कि 2019 का लोकसभा चुनाव नए प्रधानमंत्री को चुनने के लिए नहीं होगा, बल्कि तानाशाह बीजेपी सरकार को हटाने के लिए होगा। आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक केजरीवाल ने कहा कि जो सच में देश के बारे में सोचते हैं और खुद को एक सच्चा भारतीय मानते हैं, उन्हें मोदी-शाह की जोड़ी को हटाने के बारे में सोचना चाहिए।

आप प्रमुख ने कहा, “कई लोग मुझसे पूछते हैं कि अगर मोदी प्रधानमंत्री नहीं बनेंगे तो फिर कौन प्रधानमंत्री बनेगा। मैं आप सभी को कहना चाहता हूं कि 2019 का चुनाव प्रधानमंत्री चुनने के लिए नहीं होगा, बल्कि मोदी-शाह की जोड़ी को हटाने के लिए होगा।” दोनों पर देश में नफरत फैलाने का आरोप लगाते हुए केजरीवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने बीते पांच वर्ष में वह कर दिखाया, जो पाकिस्तान 70 वर्षो में नहीं कर सका।

उन्होंने कहा, “बीते 70 वर्षो में, पाकिस्तान ने देश को कमजोर करने का लगातार प्रयास किया है, पाकिस्तान इन सालों में देश में नफरत फैलाने में नाकाम रहा, लेकिन मोदी-शाह की जोड़ी ने इसे पांच वर्षो में ही कर दिया। उन्होंने देश में नफरत का बीज बो दिया। दोनों मिलकर देश को बर्बाद कर देंगे। वे देश को बांट देंगे।” केजरीवाल ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने शासन में देश को तबाह कर दिया।

केजरीवाल ने कहा, “देश के युवा नाखुश हैं। उन्होंने मोदी को वोट दिया, क्योंकि उन्होंने रोजगार देने का वादा किया था। मोदी ने नौकरी देने के बदले, नोटबंदी लागू कर दिया, जिससे देश में 1.25 करोड़ नौकरियां समाप्त हो गईं।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश में महिला, किसान, दलित और मुस्लिम खुश नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अपने जीवन के अंत तक सत्ता में रहने के लिए एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी के कानून को बदल डाला था। केजरीवाल ने कहा, “उसी प्रकार मोदी-शाह की जोड़ी देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है।”

केजरीवाल ने कहा, “शाह ने हाल ही में एक रैली में कहा था अगर बीजपी 2019 में जीत जाएगी तो, वे 2050 तक सत्ता में रहेंगे।” उन्होंने कहा, “अगर मोदी दोबारा सत्ता में आ गए तो, बीजेपी संविधान बदल देगी और लोकतंत्र व चुनाव को समाप्त कर देगी।” पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने भी केजरीवाल को परेशान करने के लिए मोदी-शाह की जोड़ी पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “केजरीवाल लोगों के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन वे केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल दिल्ली सरकार को परेशान करने के लिए कर रहे हैं।”

जनसैलाब की मौजूदगी में हुई इस रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एवं जनता दल सेक्यूलर प्रमुख एच डी देवेगौड़ा, तीन वर्तमान मुख्यमंत्री- चंद्रबाबू नायडू (तेलुगु देशम पार्टी), एचडी कुमारस्वामी (जनता दल सेक्यूलर) और अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी), छह पूर्व मुख्यमंत्री- अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी), फारुख अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला (दोनों नेशनल कांफ्रेंस), बाबूलाल मरांडी (झारखंड विकास मोर्चा), हेमंत सोरेन (झारखंड मुक्ति मोर्चा) और इसी हफ्ते भाजपा छोड़ चुके गेगांग अपांग, आठ पूर्व केंद्रीय मंत्री- मल्लिकार्जन खड़गे (कांग्रेस), शरद यादव (लोकतांत्रिक जनता दल), अजित सिंह (राष्ट्रीय लोक दल), शरद पवार (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, शत्रुघ्न सिन्हा और राम जेठमलानी ने हिस्सा लिया। इनके अलावा, राजद नेता एवं बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी, बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रतिनिधि एवं राज्यसभा सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा, पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और जानेमाने दलित नेता एवं गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी भी मंच पर नजर आए।

 

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