पश्चिम बंगाल: पंचायत चुनाव मामले में ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, BJP और CPM को झटका

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 अगस्त) को पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार को राहत देते हुए पंचायत चुनाव की निर्विरोध जीती गई लगभग 20,000 से अधिक सीटों पर हुए चुनावों के नतीजे जारी करने का फैसला सुनाया है। पंचायत चुनाव में इन सीटों को लेकर विवाद था, लेकिन अब शीर्ष अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को नतीजे जारी करने का आदेश दे दिया है। ममता बनर्जी सरकार को राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीपीआई (एम) और बीजेपी की याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा है कि निर्विरोध जीती हुई सीटों पर दोबारा पंचायत चुनाव नहीं होंगे। पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनावों में जिन 20 हजार सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ था, वहां चुनाव रद्द करने की बीजेपी और माकपा की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं की। बहरहाल, कोर्ट ने उन लोगों को चुनाव याचिकाएं दायर कर चुनाव को चुनौती देने की अनुमति दी जिन्हें नामांकन पत्र दायर करने से रोक दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि नामांकन दाखिल नहीं करने देने के आरोप से संबंधित चुनाव याचिका 30 दिनों के अंदर दाखिल की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 20,159 सीटों के नतीजे घोषित करने पर लगी रोक हटा दी है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनावों के नतीजे घोषित कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले में यह भी अंकित किया है कि ईमेल या व्हाट्सएप्प से नामांकन नहीं किया जा सकता। ये कानून में नहीं है। याद दिला दें कि पिछली सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने संकेत दिया था कि अदालत जांच करेगी कि क्या बिना विरोध चुनाव होना चुनाव की निष्पक्षता को नष्ट करता है या नहीं।

बीेजपी की दोबारा पंचायत चुनाव की मांग पर ममता सरकार ने विरोध करते हुए कहा था कि बीजेपी की राज्य में कोई उपस्थिति नहीं है। चुनाव में हिंसा दोबारा मतदान के लिए आधार नहीं हो सकता। अगर ऐसा हुआ तो हर उम्मीदवार जो जीत नहीं सकता वह हिंसा करा सकता है और चुनाव रुकवा सकता है।

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