पश्चिम बंगाल: डॉक्टर ने फेसबुक पोस्ट कर खोली स्वास्थ्य विभाग की पोल, ममता सरकार ने किया निलंबित

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पश्चिम बंगाल के एक डॉक्टर को ममता बनर्जी सरकार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक फेसबुक पोस्ट कर आलोचना करना भारी पड़ गया है। जी हां, दरअसल फेसबुक पोस्ट कर डेंगू की भीषण समस्या को लेकर ममता सरकार की लापरवाही की आलोचना करने वाले डॉक्टर को अब स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया है।

ममता बनर्जी
फाइल फोटो- पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, डॉक्टर ने अपने फेसबुक पोस्ट में अधिकारियों द्वारा डेंगू से संबंधित सहीं तथ्यों को छुपाने का आरोप लगाय था, जिसके बाद उसे ममता सरकार निलंबित कर दिया है। दैनिक जागरण में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार को हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा था कि पिछले 35 दिनों में डेंगू से होने वाली 19 मौत के बाद से मृतकों की संख्या नहीं बढ़ी है।

इसी के जवाब में स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के कारणों को लेकर ये कहानी बता दी साथ ही राज्य सरकार ने मौसम को भी इसका जिम्मेवार बताया। अब बताया जाता है कि नॉर्थ 24 परगना के बरसात में स्थित जिला अस्पताल के सीनियर डॉक्टर अरुणाचल दत्ता चौधरी ने अपने फेसबुक पोस्ट में अधिकारियों के बारे में डेंगू के फैलने से संबंधित तथ्यों को छुपाने का जिक्र किया था, जिसके बाद स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ने डॉक्टर को निलंबित कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चौधरी ने फेसबुक पर डेंगू से निपटने में नाकामी को लेकर ममता सरकार की आलोचना की है। साथ ही डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि बरसात के जिला अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में डेंगू के मरीज आ रहे हैं और मरीजों की मौत भी हो रही है।

चौधरी ने आरोप लगाया है कि वहीं डॉक्टरों से कहा जा रहा है डेंगू मरीजों की मौत के कारण के रूप में डेंगू की जगह दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं दर्शायी जाएं, ताकि ममता सरकार डेंगू के कारण मरने वाले लोगों की संख्या कम करके दिखा सके। बता दें कि इससे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने डेंगू को लेकर पहली बैठक के बाद कहा था कि कोलकाता, हावड़ा व साल्टलेक में डेंगू के लिए केंद्र जिम्मेवार है।

क्योंकि, मेट्रो निर्माण, केंद्रीय सरकारी दफ्तरों में सही से सफाई नहीं होने की वजह से डेंगू फैल रहा है। इसके बाद जब उन्होंने डेंगू के लिए मौसम को जिम्मेवार बताया था। साथ ही कुछ उद्योग घरानों पर अफवाह फैलाने का भी आरोप लगाया था। जबकि मृतकों के परिजनों का कहना है कि राज्य सरकार ने जो तर्क दिया है उसमें कोई सच्चाई नहीं है। क्योंकि, वे लोग कहीं नहीं गए थे और डेंगू से पीड़ित होकर मरे हैं।

 

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