फारूक डार ने पूछा- क्या मैं कोई जानवर था, जिसे जीप की बोनट पर बांधकर घसीटा गया?

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जम्मू-कश्मीर में सेना द्वारा मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल किए गए कश्मीरी युवक फारूक अहमद डार ने मेजर को इस कृत्य के लिए सम्मानित करने पर सवाल उठाए हैं। पीड़ित युवक डार ने मेजर लितुल गोगोई को सम्मानित किए जाने पर तीखे सवाल पूछे हैं। डार ने पूछा कि किसी को जीप की बोनट पर बांधकर 28 किलोमीटर तक घसीटना क्या यह बहादुरी का काम है?डार ने कहा कि जीप से बांधकर उसे मानव ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की यह घटना 9 अप्रैल को घटी थी। घटना के बाद कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी गठित की गई और अभी जांच चल रही है। जांच के सिलसिले में पुलिस और सेना मुझे अब भी बुलाती है। इस बीच आरोपी मेजर को सम्मानित किया जाता है।

दरअसल, जांच पूरी तरह से बहाना है। क्या मैं कोई जानवर था, जिसे गाड़ी के आगे बांधकर घुमाया गया था? क्या मैं कोई भैंस या बैल था?’ डार ने आगे कहा कि मामले की जांच को लेकर वे (पुलिस-सेना) कभी गंभीर नहीं थे। मैं एक सामान्य इंसान हूं। किसी को मेरी परवाह क्यों होगी?

बता दें कि श्रीनगर में 9 अप्रैल को वोटिंग के दौरान बीड़वाह समेत कई इलाकों में वोटिंग बूथ पर हिंसा हुई थी। इसी दौरान मेजर लितुल गोगोई ने पत्थरबाजी कर रहे लोगों की भीड़ से कथित रूप से डार को पकड़कर जीप के आगे बांधकर मानव ढाल बनाया था। इसका वीडियो वायरल होने पर सेना की काफी आलोचना हुई थी।

हालांकि, युवक को आर्मी की जीप से बांधकर मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करने वाले राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर नितिन लीतुल गोगोई ने घटना पर चुप्पी तोड़ी है। गोगोई ने मंगलवार को मीडिया के सामने आकर पूरी घटना की जानकारी दी। साथ ही कहा कि उनका यह कदम स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए उठाया गया था।गोगोई ने कहा कि अगर बेहद हिंसक हो चुकी भीड़ पर वे फायरिंग करवाते तो कम से कम 12 लोगों की जान चली जाती। बता दें कि गोगोई वही अफसर हैं, जिन्हें हाल ही में सेना प्रमुख ने आतंकवाद निरोधी कार्रवाई के लिए सम्मानित किया है। सेना ने साफ किया है कि उनके इस सम्मान से जीप वाली घटना का कोई संबंध नहीं है, लेकिन इस मामले पर राजनीति शुरू हो गई है।

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