कर्नाटक: कांग्रेस विधायक ने कहा- BJP ने नहीं किया था मेरी पत्नी को फोन, टेप को बताया ‘फर्जी’

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पिछले  दिनों से कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस और बीजेपी के बीच सत्ता की कुर्सी के लिए चली रस्साकशी के बीच येल्लापुर से कांग्रेस के विधायक शिवराम हेब्बर ने यह कहकर सभी को चौंका दिया है कि उनकी पत्नी को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से किसी का फोन नहीं आया था। विधायक का कहना है कि कांग्रेस ने जो ऑडियो टेप जारी किया गया था, वह बिल्कुल फर्जी है। टेप में मेरी पत्नी की आवाज नहीं है। अपने राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा फर्जी टेप जारी करने वाले को ‘धिक्कार’ है।

शिवराम हेब्बर ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट लिखकर यह दावा किया है और कांग्रेस के उन दावों को झुठला दिया है, जिसमें वह आरोप लगाई थी कि बीजेपी बहुमत परीक्षण से पहले उनके विधायकों से संपर्क करने का प्रयास कर रही थी। अपनी पोस्ट में शिवराम हेब्बर ने लिखा है कि, ‘मुझे देरी से पता चला कि न्यूज चैनलों में मेरी पत्नी और बीजेपी के लोगों के बीच संदेहास्पद बातचीत की चर्चा है। यह मेरी पत्नी की आवाज नहीं है। मेरी पत्नी ने कोई फोन रिसीव नहीं किया था। जिसने भी यह टेप रिलीज किया है उसपर ‘धिक्कार’ है। ऑडियो टेप फर्जी है और मैं इसकी निंदा करता हूं’।

शिवराम हेब्बर ने अपनी पोस्ट में आगे लिखा है कि, ‘मैं अपने क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे दोबारा मौका दिया। मैं उनके लिए काम करता रहूंगा’। शिवराम हेब्बार ने आखिर में विधानसभा चुनाव में मिली जीत के लिए येल्लापुर की जनता का धन्यवाद किया है।

बता दें कि बहुतम परीक्षण के पहले कांग्रेस ने दावा किया था कि येदियुरप्पा के बेटे ने फोन कर कांग्रेस विधायक शिवराम हेब्बर की पत्नी से उनके पति को येदियुरप्पा को वोट डालने को कहा था। साथ ही कांग्रेस की ओर यह भी आरोप लगाया था कि फोन कर कैबिनेट पद और 15 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई थी।

फ्लोर टेस्ट 19 मई को शाम 5 बजे होना था। इससे पहले कांग्रेस द्वारा ऑडियो जारी किए। कांग्रेस नेता वीएस उग्रप्पा ने दावा किया कि बीजेपी के बीवाई विजेंद्र ने कांग्रेस विधायक की पत्नी को फोन किया और कहा कि वे अपने पति से कहें कि येदियुरप्पा के फेवर में वोट करें। हम आपके पति को मंत्री पद या 15 करोड़ रुपए देंगे।

ढाई दिन में गिरी बीजेपी की सरकार

गौरतलब है कि कर्नाटक में महज ढाई दिन पुरानी बीजेपी की सरकार शनिवार (19 मई) की शाम गिर गई। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने विश्वास मत का सामना किए बगैर ही विधानसभा पटल पर अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। चेहरे पर हार के भाव के साथ येदियुरप्पा ने एक संक्षिप्त भावनात्मक भाषण के बाद विधानसभा के पटल पर अपने निर्णय की घोषणा की। अब जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी 23 मई को नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि येदियुरप्पा सरकार शनिवार शाम चार बजे राज्य विधानसभा में विश्वास मत हासिल करें। इससे पहले राज्यपाल वजुभाई वाला ने येदियुरप्पा को अपना बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया था। येदियुरप्पा के इस्तीफे के कुछ घंटे बाद जद (एस)-कांग्रेस-बसपा गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एच डी कुमारस्वामी ने राज्यपाल वजुभाई वाला से मुलाकात की और उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है।

जद (एस) प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के 58 वर्षीय बेटे ने कहा कि राज्यपाल ने उन्हें बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया है लेकिन उन्होंने कहा, ‘‘हमें 15 दिनों की जरूरत नहीं है।’’ कांग्रेस–जद (एस) गठबंधन ने 224 सदस्यीय विधानसभा में 117 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। दो सीटों पर विभिन्न कारणों से मतदान नहीं हुआ था जबकि कुमारस्वामी दो सीटों से चुनाव जीत थे। गत 15 मई को घोषित चुनाव परिणामों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने के कारण राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो गई थी।

बीजेपी हालांकि 104 सीटें प्राप्त करके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी लेकिन वह बहुमत से कुछ दूर रह गई थी।कांग्रेस 78 सीटों पर जीत दर्ज करके दूसरे स्थान पर रही थी, जबकि जद (एस) को 37 सीटों पर जीत मिली थी। इसके बाद कांग्रेस और जद (एस) ने गठबंधन कर लिया। येदियुरप्पा का सत्ता में रहने का यह सबसे कम समय था। वह 2007 में जब पहली बार मुख्यमंत्री बने थे उस समय केवल सात दिन ही मुख्यमंत्री रहे थे। वह दूसरी बार उस समय मुख्यमंत्री बने थे जब 2008 में कर्नाटक में बीजेपी ने पहली बार अपनी सरकार बनाई थी।

 

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