विजय रुपानी के ‘झूठ’ का हुआ पर्दाफाश, अहमद पटेल ने 2013 में अस्पताल से दे दिया था इस्तीफा

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गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले सूरत में दो संदिग्ध की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान छिड़ गया है। बीजेपी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद अहमद पटेल पर कई संगीन आरोप लगाते हुए राज्यसभा से इस्तीफे की मांग की।

अहमद पटेल
file photo- कांग्रेस नेता अहमद पटेल

शुक्रवार को राज्य के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि, भरुच के जिस अस्पताल से बुधवार को अरेस्ट किए गए ISIS के संदिग्ध आतंकी जुड़े हैं, अहमद पटेल उस अस्पताल के ट्रस्टी रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मांग की है कि वो अहमद पटेल से इस्तीफा लें।

जनता का रिपोर्टर ने तथ्यों की पड़ताल करते हुए कुछ पत्र हासिल किए है जिससे पता चलता है कि कांग्रेस राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने सितंबर 2013 में उस अस्पताल से इस्तीफा दे दिया था। इसका प्रभावी रूप से मतलब है कि पटेल का चार साल से अस्पताल प्रबंधन से कोई लेना-देना नहीं है।

वहीं अस्पताल ने रूपानी के दावों को एक विस्तृत बयान के जरिए खारिज कर दिया है। अस्पताल प्रबंधन ने कहा है कि अहमद पटेल और उनके परिवार का इस मामले से कोई संबंध नहीं है। अस्पताल के बयान के मुताबिक पटेल, जब भी उन्हें प्रबंधन द्वारा अनुरोध किया गया था, एक सांसद के रूप में मदद की।

वहीं दूसरी ओर अहमद पटेल के करीबी सुत्रों ने बताया है कि अस्पताल के ओर से आए बयान के बाद साफ होता है कि अहमद पटेल का इस पूरे मामले से कोई लेना देना नहीं है। जिससे कि स्पष्ट हो जाता है कि, मुख्यमंत्री विजय रुपाणी के झूठ से पर्दा उठ चुका है।

बता दें कि, इससे पहले विजय रुपाणी के द्वारा अहमद पटेल पर लगाए गए आरोप के बाद कांग्रेस पार्टी ने तुरंत इसका जवाव देते हुए इसे बेबुनियाद करार दिया था। कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि सीएम अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए इस तरह के आरोप लगे रहे हैं। रणदीप सुरजेवाला ने कहा था कि अहमद पटेल ने अस्पताल से इस्तीफा दे दिया था, इसके बाद वो किसी भी तरह अस्पताल से नहीं जुड़े रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर खुद अहमद पटेल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए बीजेपी से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर राजनीति न करने को कहा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि बीजेपी के सभी आरोप बेबुनियाद है। ये मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है इसलिए चुनाव को दिमाग में रखकर इस पर राजनीति न करे। साथ ही उन्होंने कहा है कि आतंकियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

बता दें कि, अहमदाबाद के खाडिया इलाके में दो संदिग्धों को गुजरात एटीएस ने बुधवार को पकड़ा था। जिनके नाम  कासिम टिम्बरवाला(31) ओर उबेद मिर्ज़ा(29) है। इसमे से एक संदिग्ध अंकलेश्वर के एक अस्पताल में लैब टेक्नीशियन के रूप में काम करता था, जबकि उबेद मिर्ज़ा सूरत में वकील के रूप में प्रेक्टिस कर रहा था।

 

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