विजय माल्या की वापसी के लिए ब्रिटिश उच्चायोग को लिखा गया पत्र

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समाचार एजेंसी वेबवार्ता के अनुसार जांच एजेंसियों की पकड़ से दूर भाग रहे विजय माल्या आगे बच पाना मुश्किल हो जाएगा। पासपोर्ट निरस्त करने के बाद विदेश मंत्रालय ने विजय माल्या को वापस प्रत्यर्पित (डिपोर्ट) करने का अनुरोध किया है।

ईडी के अनुरोध पर माल्या के खिलाफ अदालत पहले ही गैर जमानती वारंट जारी कर चुकी है। माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस को मिले बैंकों के कर्ज के दुरूपयोग का आरोप है। माल्या के खिलाफ सारी कार्रवाई ईडी के अनुरोध पर ही हो रही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि ब्रिटेन के हाई कमिशन को पत्र लिखकर विजय माल्या के प्रत्यर्पण के मांग की गई है। इसके लिए माल्या पर ब्रिटेन के वीजा नियमों के उल्लंघन का हवाला भी दिया गया है। उन्होंने कहा कि विजय माल्या टूरिस्ट वीजा पर ब्रिटेन गए थे। खुद माल्या ने कहा था कि वे एक कांफ्रेंस में भाग लेने के लिए ब्रिटेन आए हैं, जिसकी अनुमति टूरिस्ट वीजा पर नहीं दी जाती है।

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इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने अपने पत्र में माल्या के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी, पासपोर्ट रद्द होने और जांच एजेंसियों के सामने पूछताछ के लिए नहीं हाजिर होने की बात कही है। गौरतलब है कि ईडी तीन बार विजय माल्या को सम्मन जारी कर पूछताछ के लिए हाजिर होने का मौका दे चुका है। लेकिन माल्या ने हाजिर होने में असमर्थता जताते रहे। इसके बाद ईडी ने विदेश मंत्रालय से माल्या का पासपोर्ट रद्द करा दिया और मुंबई की अदालत से गैर जमानती वारंट भी ले लिया।

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यही नहीं, ईडी निदेशक करनल सिंह ने खुद विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर माल्या के ब्रिटेन से प्रत्यर्पण के लिए कूटनीतिक प्रयास करने का आग्रह किया था। माल्या की डूब चुकी कंपनी किंगफिशर एयरलाइंस पर बैंकों के 9000 करोड़ रुपये बकाया है। बैंकों का आरोप है कि किंगफिशर एयरलाइंस के लिए दिए गए कर्जे का माल्या ने दुरूपयोग किया और दूसरी कंपनियों में लगा दिया।

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उन्होंने जानबूझकर किंगफिशर एयरलाइंस को डूब जाने दिया ताकि बैंकों का कर्ज लौटाना नहीं पड़े। इस मामले में आइडीबीआइ से लिए गए 900 करोड़ रुपये के कर्ज की जांच ईडी मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत कर रहा है।

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