…जब RBI ने भारतीय नागरिक को घोषित कर दिया NRI, नोटबंदी से पीड़ित इस शख्स की कहानी पढ़ हैरान रह जाएंगे आप

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा की थी। दो सप्ताह बाद अगले महीने 8 नवंबर को नोटबंदी के दो साल पूरे हो जाएंगे। विपक्ष ने तभी नोटबंदी के फैसले के कारण अर्थव्यवस्था की हालत बुरी होने, बेरोजगारी बढ़ने और सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी कम होने की आशंका जताई थी और जितने भी नोटबंदी के बाद के रिपोर्ट आए उसमें यह साबित भी हुआ। नोटबंदी से पीड़ित लोग अभी भी अपनी-अपनी कहानी शेयर कर रहे हैं।

नोटबंदी
फाइल फोटो

मोदी सरकार के इस फैसले के पीड़ित एक शख्स की कहानी सुनकर आप हैरान हो जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात के अहमदाबाद के रहने वाले अशोक कुमार बाबूलाल पटेल ने ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में नोटबंदी के दौरान उन्होंने जो संघर्ष किया उसकी दर्दनाक कहानी शेयर किया। अशोक कुमार के मुताबिक, नोटबंदी को लेकर दायर की गई एक आरटीआई के दौरान आरबीआई ने उन्हें भारतीय नागरिक से एनआरआई घोषित कर जवाब देने से इनकार कर दिया।

हालांकि काफी संघर्ष के बाद उन्हें भारतीय नागरिक के तौर पर पहचान मिल गई, लेकिन यह कहानी देश के सभी नागरिकों को पढ़ना चाहिए। दरअसल, नोटबंदी के दौरान अशोक कुमार किसी निजी काम की वजह से भारत से बाहर ऑस्ट्रेलिया के सिडनी में थे। अन्य लोगों की तरह उनके पास भी 13 हजार रुपये के पुराने नोट थे, लेकिन देश के बाहर होने की वजह से वह अपना नोट बदल नहीं पाए।

हालांकि जब वापस देश आए तो उन्हें पता चला कि रिजर्व बैंक ने नोटबंदी के समय देश से बाहर गए नागरिकों को पुराने नोट बदलने के लिए 31 मार्च तक का समय दिया है। यह खबर सुनकर उन्होंने राहत की सांस ली। और अहमदाबाद से चलकर जब वह मुंबई के आरबीआई ऑफिस पहुंचे लेकिन वहां नोट बदलवाने के लिए दफ्तर के बाहर भारी भीड़ थी, क्योंकि देश के कई हिस्सों से लोग वहां नोट बदलवाने के लिए आए थे।

(अशोक कुमार बाबूलाल पटेल)

अन्य लोगों की तरह वह भी वहां करीब 6 से 7 घंटे तक लाइन में लगे रहे। जब उनका नंबर आया तो आरबीआई के कर्मचारियों ने कहा कि आपका पैसा एक सप्ताह के अंदर अकाउंट में चला जाएगा। फिर अशोक मुंबई से अहमदाबाद वापस आ गए। घर आने के बाद अशोक कुमार अपने पैसे का इंतजार एक-दो सप्ताह नहीं बल्कि छह महीने तक करते रहे लेकिन पैसा वापस नहीं आया। फिर आरटीआई के जरिए उन्होंने पैसे के बारे में जानकारी मांगी तो आरबीआई ने इन्हें एनआरआई घोषित कर दिया।

इसके बाद भी उन्होंने साहस नहीं छोड़ा और देश के राष्ट्रपति, वित्त मंत्रालय और आरबीआई को इमेल भेजा। इमेल का सिलसिला भी काफी दिनों तक जारी रहा, अशोक के मुताबिक उन्होंने 92 रिमाइंडर डाले। हालांकि उनका संघर्ष काम आया और आखिरकार इसी महीने 11 अक्टूबर 2018 को उनका 13 हजार रुपये आरबीआई ने उनके खाते में डाल दिया। आरबीआई ने पैसा तो एकाउंट में डाल दिया, लेकिन अभी तक अशोक के किसी भी सवालों का जवाब नहीं दिया है।

अभी भी पीड़ित का परिवार आरबीआई से कई सवालों का जवाब मांग रहा है। उनके बेटे पराग पटेल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काफी नाराज हैं। वह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के उस दावों से सहमत हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा स्कैम है। वह आरबीआई से अपने पैसे का ब्याज और जितना समय व पैसा बर्दाद हुआ है उसका मुआवजा मांग रहे हैं।

पीएम मोदी द्वारा किए गए नोटबंदी से कम नहीं हुआ काला धन

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वित्त वर्ष 2017-18 के एनुअल रिपोर्ट में कहा है कि 8 नवंबर 2016 को नोटबंदी लागू होने के बाद 1000 और 500 रुपए के पुराने नोट तकरीबन वापस आ गए हैं। आरबीआई के मुताबिक नोटबंदी लागू होने के बाद बंद किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों का 99.3 प्रतिशत बैंको के पास वापस आ गया है। इसका तात्पर्य है कि बंद नोटों का एक काफी छोटा हिस्सा ही प्रणाली में वापस नहीं आया।

गौरतलब है कि सरकार ने कहा था कि इसके पीछे मुख्य मकसद कालाधन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है, लेकिन आरबीआई की रिपोर्ट ने सरकार के दावों पोल खोलकर रख दी है। आरबीआई के अनुसार अब तक कुल 15 लाख 31 हजार करोड़ रुपए के पुराने नोट वापस आ गए हैं। जबकि नोटबंदी से पहले कुल 15 लाख 41 हजार करोड़ रुपए की मुद्रा प्रचलन में थी।

इसका मतलब है कि बंद नोटों में सिर्फ 10,720 करोड़ रुपये ही बैंकों के पास वापस नहीं आए हैं। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 की रात को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा की थी।

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