बड़े फायदे के लिए छोटी परेशानियों को झेलना पड़ेगा, अर्थव्यवस्था पर बोले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

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उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने मौजूदा आर्थिक परिदृश्य पर शुक्रवार को कहा कि दीर्घकालिक लाभ के लिए देश को अल्पकालिक परेशानी झेलनी होगी। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति धीमी हुई है और चीन भी अपनी अर्थव्यवस्था में शिथिलता का सामना कर रहा है, लेकिन इस सबके बीच भारत की स्थिति अच्छी है।

 वेंकैया नायडू

नायडू की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर सरकार पर हमले कर रहे हैं। नायडू ने कहा, ‘अल्पकालिक चीजें…कुछ समस्या होगी। नि:संदेह आपको दीर्घकालिक लाभ के लिए अल्पकालिक परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

मैं इसमें नहीं जाना चाहता। कुछ लोग हैं जो बहस कर रहे हैं, अपनी दक्षता का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे भूल रहे हैं कि उन्होंने क्या किया है, क्या किया जाना है, क्या किए जाने की आवश्यकता है।’ उन्होंने कहा कि जहां तक विदेशी और आर्थिक नीतियों की बात है तो व्यापक आम सहमति होनी चाहिए।

आपको बता दे कि इससे पूर्व मोदी सरकार की खराब आर्थिक नीतियों पर हो रहे हमलों के बीच अब बीजेपी सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने यशवंत सिन्हा का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाने पर लिया था। सिन्हा ने कहा है कि प्रधानमंत्री को सामने आना चाहिए और सवालों के जवाब देने चाहिए।

देश में गिरती और अर्थ व्यवस्था और मंदी को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने विकत्त मंत्री अरुण जेटली पर देश की अर्थ व्यवस्था को चौपट करने का आरोप लगाया है। पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा के द्वारा अर्थव्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों से मोदी सरकार बैकफुट पर हैं।

शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट कर कहा कि लगातार उठ रहे सवालों का जवाब देने के लिए अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जनता और मीडिया के सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम को एक प्रेस कान्फ्रेंस बुलानी चाहिए, जिससे पता लगे कि वह मध्यम वर्ग, व्यापारी और छोटे कारोबारियों के का ख्याल रखते हैं।

इससे पूर्व भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष अमित शाह के उस दावे को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के ग्रोथ में तकनीकी कारणों से गिरावट आई है। न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, एसबीआई रिसर्च ने कहा है कि सितंबर 2016 से अर्थव्यवस्था में सुस्ती है और यह तकनीकी नहीं बल्कि वास्तविक है।

बता दें कि पिछले दिनों अमित शाह ने जीडीपी की वृद्धि दर में गिरावट को तकनीकी बताया था। दरअसल, जून तिमाही में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 5.7 प्रतिशत के तीन साल के निचले स्तर पर आ गई थी। इस मामले में मोदी सरकार की आलोचना होने के बाद अमित शाह ने एक संबोधन में कहा था कि ऐसा कुछ तकनीकी कारणों से हुआ था।

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