‘वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे के बीच ‘समलैंगिक संबंध’ थे’, कांग्रेस सेवादल की किताब में किए दावों पर विवाद, BJP ने किया पलटवार

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अखिल भारतीय कांग्रेस सेवादल ने गुरुवार को मध्‍य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में ‘‘वीर सावरकर कितने ‘वीर’?’’ नाम से एक किताब वितरित की है, जिसमें राजनीतिक हिंदूवादी विचारधारा के जनक कहे जाने वाले विनायक दामोदर सावरकर पर सवाल उठाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि हिंदू महासभा के सह-संस्‍थापक सावरकर और राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के हत्‍यारे गोडसे के बीच शारीरिक संबंध थे। इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस और शिवसेना पर निशाना साधा है।

वीर सावरकर

‘वीर सावरकर कितने ‘वीर’?’ नामक इस बुकलेट में सावरकर से जुड़े तमाम घटनाओं, सवालों और विवादों के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें कांग्रेस ने सावरकर की जिंदगी से जुड़ी तमाम घटनाओं का जिक्र किया था। इसमें इस बात का जिक्र है कि वीर सावरकर ब्रह्मचर्य ग्रहण करने से पहले नाथूराम गोडसे से होमोसेक्‍सुअल संबंध थे। इसके अलावा भी कई ऐसी बात है जिसको लेकर भाजपा ने घोर आपत्ति जताई है।

वहीं, इस विवादित बुकलेट के बारे में कांग्रेस नेता लालजी देसाई का कहना है कि बुकलेट में भी जो बातें कही गई हैं, लेखक ने सुबूतों के आधार पर लिखे हैं। यह मसला हमारे लिए बहुत मायने नहीं रखता है। हमारे देश में तो अब हर किसी को अपनी प्राथमिकताएं तय करने का कानूनी अधिकार है।

कांग्रेस की इस बुकलेट पर प्रहार करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि कांग्रेस और इसके सहयोगी लगातार वीर सावरकर को बदनाम कर रहे हैं जबकि महाराष्‍ट्र में शिवसेना मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज है। यह कुछ और नहीं बल्कि कांग्रेस द्वारा उद्धव ठाकरे को अपमानित करने का एक तरीका है, जिनके पिता महान बाला साहेब ठाकरे वैचारिक मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करते थे।

वहीं, मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष एवं सांसद राकेश सिंह ने कांग्रेस सेवा दल के कार्यक्रम में सावरकर को लेकर बांटे गए साहित्य पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, ‘कांग्रेस मतिभ्रम के दौर से गुजर रही है। वह समझ नहीं पा रही कि किसका विरोध करें और किसका समर्थन करें।’ उन्होंने कहा कि इस दौर में कांग्रेस के नेता उन राष्ट्र भक्तों को निशाना बनाने से नहीं चूक रहे जो राष्ट्रभक्त विशेष रूप से बहुसंख्यक आबादी के हितचिंतक रहे हैं। (इंपुट: भाषा के साथ)

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