वरुण गाँधी 3600 किसानों का कर्ज़ा माफ़ और सौ पक्के बना कर रच दिया एक नया इतिहास

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उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री उम्मीदवारी के लिए पोस्टर वार के कारण चर्चा में रहने वाले भाजपा के ‘सुल्तानपुर’ से सांसद वरुण गांधी आज यानी 18 अक्टूबर को एक नया इतिहास रचने वाले हैं। जी हाँ वरुण ने तय कर लिया है कि एक संसदीय क्षेत्र की पहचान में बंधे रहने की बजाय वह यूपी के बड़े हिस्से में जाने जाएंगे।

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वरुण गांधी 18 अक्टूबर को 100 मकान अपने संसदीय क्षेत्र सुल्तानपुर के अलग अलग गांवों में ग़रीब लोगों को सौंपने जा रहे हैं। वरुण ने इन्‍हें अपने प्रयास और स्थानीय लोगों की मदद से बनवाया है। किसी सरकारी योजना की मदद नहीं ली है। वह देखना चाहते थे कि क्या लोगों की मदद से ये काम हो सकता है। ये 100 घर लोगों को सौपने के बाद अब वे 5000 ऐसे घर बनाने की चुनौती पर काम करने जा रहे हैं। इस आवास में 15 गुुणे 12 का एक कमरा व एक बाथरूम है। प्रशासन की ओर से स्वच्छता कार्यक्रम के तहत एक शौचालय भी दिया गया है। वरुण गाँधी की ओर से बनवाए जाने आवास पर डेढ़ लाख रुपये खर्च आया।

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देश के युवा सांसद की ये कोशिश लोग भले ही राजनीतिक नज़रिये से देख सकते है, लेकिन आत्महत्या के लिए मजबूर और बदहाली के हासिये पर खड़े गरीब किसानों से उन्होंने दिल का रिश्ता जोड़ लिया है।

वरुण कि ज़िंदादिली की ये कहानी यहीं नहीं ख़त्म होती है, इस हफ्ते के दैनिक हिंदुस्तान में छपी ख़बर के अनुसार, वरुण गांधी ने लोगों की मदद से 3600 किसानों को कर्ज़मुक्त किया है।

NDTV की खबर के अनुसार, वरुण ने अपनी तरफ से डेढ़ करोड़ दिए हैं लेकिन इस पहल के बाद वो पहले ऐसे सांसद होंगे जो सच में गरीबो और ज़रूरतमंदों के दिलों पर राज़ करेंगे।

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किसानों का कर्जमुक्त कराने में वरुण की रणनीति 

3600 किसानों को कर्ज़मुक्त करना कोई साधारण बात नहीं है लेकिन आखिर कैसे वरुण गाँधी ने और उनकी टीम ने यह काम इतनी आसानी से किया जो किसी सांसद के लिए अपने 5 साल के कार्यकाल में न कर पाना एक बेहद ही शर्मनाक बात है।

वरुण और उनकी टीम ने सर्वे कराया कि आत्महत्या करने वाले किसानों की कर्ज़ की क्या स्थिति है जिसमे बाद यह पता चला कि  40 फीसदी ऐसे हैं जिनकी 3 -4 साल से फ़सल बर्बाद हो रही है और। इस जानकारी के आधार पर एक पैमाना बना कि उन किसानों की मदद की जाएगी जो तीन चार साल से कर्ज़ नहीं चुका पा रहे हैं। बैंकों से जानकारी जुटाई गई। पता चला कि किसी ज़िले से डेढ़ सौ तो किसी ज़िले से तीन सौ किसान वरुण के बनाए पैमाने में फिट होते हैं।

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वरुण गाँधी का ये कदम वाक़ई एक बार फिर गरीब लोगों को राजनेताओं पर यक़ीन करने में मदद करेगा लेकिन सवाल यहाँ ये भी है कि सिर्फ वरुण गाँधी ही क्यों? क्या देश के और सांसदों का ये फ़र्ज़ नहीं? क्या कोई राजनेता मानवता से ऊपर उठ कर नहीं सोच सकता, और सोचना ही क्यों(ज़्यादातर तरह एक चुनावी जुमला) कर क्यों नहीं सकते?

क्या आप सोच सकते हैं वो गरीब परिवार आज कैसा महसूस करेगा जिसका परिवार कभी पक्के मकान में नहीं रहा है।

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