उत्तर प्रदेश: मकोका की तर्ज पर ‘यूपीकोका’ विधेयक विधानसभा में पेश, जानिए क्यों इस कानून हो रहा है विरोध?

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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने राज्य में गैंगस्टर, माफियाओं और संगठित अपराध पर नकेल कसने के मकसद से बुधवार (20 दिसंबर) को विधानसभा में उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण विधेयक 2017 (यूपीकोका) पेश कर दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रश्नकाल के तुरंत बाद सदन में विधेयक पेश किया। बता दें कि राज्य मंत्रिपरिषद ने हाल ही में विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी थी।

PHOTO: TOI

यूपीकोका के विधेयक का प्रारूप महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून-1999 (मकोका) का गहन अध्ययन करके तैयार किया गया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा ने पिछले सप्ताह राज्य कैबिनेट की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा था कि प्रदेश में कानून का राज कायम करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

इसके लिये जरूरी है कि प्रदेश में गुंडागर्दी, माफियागिरी और समाज में अशांति फैलाने वाले तत्वों को चिनित कर उनके खिलाफ विशेष अभियान के तहत कठोर कार्रवाई हो। यूपीकोका को इसी मकसद से लाया जा रहा है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती सहित विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि राजनीतिक बदले की भावना से इस विधेयक का दुरूपयोग हो सकता है।

उन्होंने आशंका जतायी कि इस विधेयक का दुरूपयोग अल्पसंख्यकों, गरीबों और समाज के दबे कुचले लोगों के खिलाफ हो सकता है। शर्मा ने बताया कि हाई कोर्ट में संगठित अपराधियों, माफियाओं और अन्य सफेदपोश अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण के सम्बन्ध में दायर याचिका पर 12 जुलाई 2006 को पारित आदेश के क्रम में माफियाओं की गतिविधियों तथा राज्य सरकार के कार्यों में हस्तक्षेप पर अंकुश लगाने के लिये कानून का प्रारूप न्याय विभाग की सहमति से तैयार किया गया है।

उन्होंने बताया था कि इस विधेयक में 28 ऐसे प्रावधान हैं जो पहले से लागू गैंगस्टर एक्ट में शामिल नहीं हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित कानून के तहत दर्ज मुकदमों की सुनवाई के लिये विशेष अदालतें बनेंगी। मंत्री ने बताया कि विधेयक के परीक्षण के लिये गृह विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गयी थी। इसमें अपर पुलिस महानिदेशक अपराध तथा विशेष सचिव न्याय विभाग को भी शामिल किया गया था।

इस समिति द्वारा परीक्षण के दौरान हाई कोर्ट के पारित निर्णय तथा महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून-1999 (मकोका) का भी गहन अध्ययन करके इस विधेयक का प्रारूप तैयार किया गया है। पूरे प्रदेश में संगठित अपराध करने वाले गिरोहों पर नियंत्रण एवं उनकी गतिविधियों की निगरानी के लिये गृह विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संगठित अपराध नियंत्रण प्राधिकरण के गठन का प्रावधान भी किया गया है।

शर्मा ने बताया कि यह प्राधिकरण स्वत: संज्ञान लेकर अथवा शिकायत होने पर संगठित अपराधियों की गतिविधियों की छानबीन करेगा तथा इसके लिये प्राधिकरण शासन की कोई भी फाइल देखने के लिये अधिकृत होगा। गौरतलब है कि वर्ष 2007 में बसपा प्रमुख मायावती की सरकार ने यूपीकोका कानून लेकर आना चाहती थी, लेकिन उस वक्‍त केंद्र में यूपीए सरकार थी और उसने इस कानून को मंजूरी नहीं दी थी।

कानून का हो रहा है विरोध

बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती ने बुधवार को आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार द्वारा यूपी में महाराष्ट्र के मकोका की तर्ज पर बनाये गये यूपीकोका का इस्तेमाल सर्वसमाज के गरीबों, दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि इस कारण बसपा इस नए कानून का विरोध करती है तथा व्यापक जनहित में इसे वापस लेने की मांग करती है।

यूपीकोका (उत्तरप्रदेश कंट्रोल ऑफ आर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत संगठित रूप में होने वाले अपराध को निशाना बनाया जाएगा। इस कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को 6 महीने से पहले जमानत नहीं मिले सकेगी। आरोपी की पुलिस रिमांड 30 दिन के लिए ली जा सकती है, जबकि बाकी कानूनों के तहत 15 दिन की रिमांड ही मिलती है। इसके अलावा अपराधी को पांच साल की सजा और अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान होगा।

यूपी में कानून का राज कायम करने के नारे के साथ सत्ता में आई योगी सरकार यूपीकोका को अपराध के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बता रही है। लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिमों को टारगेट करने वाला कानून बता रहे हैं। दरअसल, 2007 में जब बसपा सरकार आने के बाद ऐसा ही कानून लाया गया। इसी दौरान आजमगढ़ जैसे दूसरे कुछ इलाकों में आतंकवाद से जुड़े संदिग्धों की गिरफ्तारियां हुईं, जिसके काफी विरोध हुआ था। जिसके बाद मायावती को कानून वापस लेना पड़ा।

इस कानून के तहत कम से कम सात साल की कैद और 15 लाख रुपये का जुर्माना और अधिकतम सजा-ए-मौत और 25 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। आतंकवाद, हवाला, अवैध शराब कारोबार, बाहुबल से ठेके हथियाने, फिरौती के लिए अपहरण, अवैध खनन, वन उपज के गैरकानूनी ढंग से दोहन, वन्यजीवों की तस्करी, नकली दवाओं के निर्माण या बिक्री, सरकारी व गैरसरकारी संपत्ति को कब्जाने और रंगदारी या गुंडा टैक्स वसूलने सरीखे संगठित अपराधों में यूपीकोका लागू किया जाएगा।

 

 

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