‘कब्रिस्तान के साथ श्मशान’ वाले बयान पर भड़का विपक्ष, कहा- पद की गरिमा का ख्याल रखें प्रधानमंत्री मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (19 फरवरी) को उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सीएम अखिलेश यादव पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए जमकर हमला बोला। पीएम ने ‘सबका साथ सबका विकास’ का मतलब समझाते हुए कहा कि ‘उत्तर प्रदेश में भेदभाव सबसे बडा संकट है। अन्याय की जडों में भेदभाव है। जिसका भी हक है, उसे मिलना चाहिए चाहे वह किसी भी माता की कोख से पैदा हुआ है। सबको उसका हक मिलना चाहिए। यही है सबका साथ सबका विकास।’

उन्होंने कहा कि ‘अगर गांव में कब्रिस्तान बनता है तो श्मशान भी बनना चाहिए। रमजान में बिजली मिलती है तो दीवाली में भी मिलनी चाहिए। होली में बिजली मिलती है तो ईद पर भी मिलनी चाहिए। कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकार का काम है भेदभाव मुक्त शासन चलाने का। किसी के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए, धर्म और जाति के आधार पर बिल्कुल नहीं।’

पीएम मोदी के इस बयान के बाद राजनीति गलियारों में सियासी पार चढ़ गया है। कांग्रेस और सपा सहित सभी विपक्षी पार्टियों ने पीएम मोदी के इस बयान की आलोचना की है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने मोदी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।

शर्मा ने कहा कि इस तरह के गलत और गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग से भी पीएम के बयान पर संज्ञान लेने का आग्रह किया है। चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री के बयान का संज्ञान लेना चाहिए क्योंकि यह स्पष्ट तौर पर आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।

वहीं पीएम मोदी के इस बयान पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हमला बोलते हुए कहा कि ‘मोदी जी का ये बयान दिखाता है की भाजपा उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार रही है और मोदी जी बहुत नर्वस हैं।’

सपा प्रवक्ता जूही सिंह ने कहा कि पीएम ने फतेहपुर रैली में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया है, हम उसकी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी इसकी शिकायत चुनाव आयोग से भी करेगी।

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