लश्कर-ए-तैयबा से संबंध के आरोप में यूपी ATS ने 10 लोगों को गिरफ्तार कर हिंदुत्व बिग्रेड के झूठ का किया पर्दाफाश

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उत्तर प्रदेश पुलिस के आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने आतंकवादियों को धन मुहैया कराने के 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी के तार पाकिस्‍तानी आतंकवादी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे। एटीएस का दावा है कि इन लोगों के ताल्लुकात लश्कर-ए-तैयबा से थे और इनको देश विरोधी गतिविधियों के लिए टेरर-फंडिंग की है।

फोटो: amar ujala

एटीएस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोग यूपी के गोरखपुर, लखनऊ, प्रतापगढ़ और मध्य प्रदेश स्थित रिवान के रहने वाले हैं। गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान नसीम अहमद, नयीम अर्शद, संजय सरोज, निरज मिश्रा, साहिल मसीह, उमा प्रताप सिंह, मुकेश प्रसाद, निखिल राय उर्फ मुशर्रफ अंसारी, अंकुर राय और दयानंद यादव के रूप में की गई है।

न्यूज नेशन के मुताबिक एटीएस आईजी असीम अरुण ने कहा ने कहा कि, ‘लश्कर-ए-तैयबा का एक सदस्य लगातार इन लोगों के साथ संपर्क में था, जो लगातार फर्जी खातों में पाकिस्तान से पैसे भेजता था। इन लोगों को पैसा पहुंचाने का निर्देश दिया जाता था। पैसा ट्रांसफर करने के लिए यह लोग 10 से 20 प्रतिशत तक का कमीशन लेते थे। जांच में अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन सामने आया हैं।’

इन लोगों के पास से बड़ी मात्रा में एटीएम कार्ड, फर्जी सिम, पासबुक, लैपटॉप और 42 लाख रुपये बरामद हुआ है। इससे पहले गुप्‍त सूचना के बाद यूपी एटीएस ने लखनऊ, गोरखपुर और प्रतापगढ़ में ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की है। इस छापेमारी में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

असीम कुमार अरुण ने बीबीसी को बताया कि, “टेरर फ़ंडिंग के मामले में पिछले साल कुछ लोग गिरफ़्तार हुए थे, जो आईएसआई के लिए जासूसी करते थे।” उन्होंने आगे बताया कि, ”उनको पैसा जिस तरह से आता था और जिन नंबरों से उन्हें फ़ोन आते थे, उनकी हम छानबीन कर रहे थे। 24 मार्च को जो गिरफ़्तारियां हुई हैं, वो पिछली साल हुई गिरफ़्तारियों का ही एक अंश है।”

असीम अरुण ने बताया है कि गिरफ़्तार किए गए 10 लोगों में से चार लोग (उमा प्रताप, संजय, नसीम और नईम) ऐसे हैं जिन्हें सीधे पाकिस्तान से ऑर्डर मिलता था कि वो फ़र्ज़ी बैंक अकाउंट खोलें और टेरर फ़ंडिंग के लिए भारत में पैसा जमा करें। छह लोग ऐसे हैं जो पाकिस्तान से सीधे संपर्क में नहीं थे। लेकिन वो फ़र्ज़ी बैंक खातों में पैसे का लेनदेन कर रहे थे। उन्हें लगता रहा होगा कि वो किसी मनी सप्लाई रैकेट के लिए काम कर रहे हैं लेकिन उनका पैसा भी आतंकवाद के लिए ही इस्तेमाल होना था।

बता दें कि इससे पहले पिछले साल पाकिस्तान की खूफिया एजेंसी आईएसआई को जानकारी देते हुए जासूसी करने वाले 11 लोगों को मध्य प्रदेश एंटी टेरेरिज्म स्क्वॉड (एटीएस) की टीम ने गिरफ्तार किया था। इस मामले में गिरफ्‍तार एक आरोपी ध्रुव सक्सेना ‘भारतीय जनता युवा मोर्चा’ के आईटी सेल का सदस्य था।

मध्य प्रदेश के बाद अब यूपी में भी हिंदू समुदाय से जुड़े युवाओं की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी समर्थकों और हिंदुत्व बिग्रेड द्वारा भारतीय मुसलमानों को आतंकी समर्थक होने का आरोप लगाने वालों का पर्दाफाश हो गया है। लोगों का कहना है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता। इसलिए अब हिंदुत्व बिग्रेड द्वारा भारतीय मुसलमानों को शक के नजरिए से देखना बंद कर देना चाहिए। वहीं सोशल मीडिया पर कुछ मीडिया पर इस खबर को दबाने का भी आरोप लगा रहे हैं।

 

 

 

 

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