अचानक से बड़ी संख्या में अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो में मची खलबली

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भारतीय खूफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में अचानक से बड़ी संख्या में अधिकारियों के ट्रांफसर (हस्तांतरण) को लेकर खलबली मच गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय खूफिया एजेंसी के इतिहास में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा देश के अलग-अलग राज्यों में कार्यरत अधिकारियों के इतने बड़े स्तर पर पहली बार ट्रांफसर का फैसला लिया गया है।

समाचार चैनल टाइम्म नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार के नई ट्रांसफर नीति के तहत खुफिया ब्यूरो में काम करने वाले करीब 500 अधिकारियों का एकाएक ट्रांफसर किया जा रहा है। टाइम्स नाउ के मुताबिक देश के अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले आईबी के अधिकारियों को तीन श्रेणियों के तहत ट्रांसफर किया जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक पहली श्रेणी में उन अधिकारियों का ट्रांसफर होगा जो एक ही जगह पर पिछले 20 सालों से काम कर रहे हैं, जबकि दूसरी सूची में उन पुलिस अफसरों को शामिल किया गया, जो बाद में खुफिया ब्यूरो में शामिल हो गए थे और पांच साल पूरे कर चुके हैं। वहीं, तीसरी सूची में उन अधिकारियों को शामिल किया गया है जो एक ही स्थान पर 15 साल से कार्यरत हैं।

यह खबर आने के बाद इंटेलिजेंस ब्यूरो में खलबली मच गई है। दरअसल, मोदी सरकार के इस नई ट्रांफसर नीति से अधिकारी इस लिए परेशान हैं, क्योंकि पिछले 20 सालों से तमिलनाडु में काम कर रहे दर्जनों अधिकारियों को अब मतदान के लिए कर्नाटक भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि अचानक से कर्नाटक जाने का मतलब है कि वहां के स्थानीय भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी है, जो उन्हें नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान किसी भी खुफिया जानकारी के लिए बहुत ही जरूरी है। तमिल भाषा के सक्षम अधिकारियों को अब कर्नाटक भेजने का मतलब है कि उन्होंने वहां के स्थानीय भाषा का ज्ञान प्राप्त करना पड़ेगा, जो इतने कम समय में काफी मुश्किल साबित होगी।

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