उन्नाव रेप कांड: पीड़िता की हालत अभी भी बेहद नाजुक, पीड़िता के परिवार द्वारा 35 बार की गई थी शिकायत, लेकिन पुलिस ने नहीं की कोई कार्रवाई

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सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हुई उन्नाव की रेप पीड़ता की हालत लगातार नाजुक बनी हुई है। किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी) द्वारा मंगलवार शाम जारी बुलेटिन में कहा गया है कि पीड़िता को गंभीर चोटें आई हैं और उसकी स्थिति नाजुक है। वह अभी भी वेंटीलेटर पर है। मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, पीड़िता का ब्लड प्रेशर गिर रहा है। दुर्घटना की वजह से फेफड़ों में भी चोटें आई हैं। साथ ही दाहिने कॉलर की हड्डी भी टूटी है।

केजीएमयू ट्रामा सेंटर के प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया, “अभी भी पीड़िता की हालत कल जैसी ही बनी हुई है। उसकी हालत में अभी कोई सुधार नहीं आया है। पीड़िता को वेंटीलेटर पर रखा गया है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उसकी सेहत पर नजर बनाए हुए है। फ्रैक्च र और ब्लीडिंग से पीड़िता की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है। फेफड़ों में ब्लीडिंग की वजह से भी स्थिति गंभीर है।”

इस बीच, लखनऊ के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा पीड़िता का हालचाल जानने मंगलवार को ट्रामा सेंटर पहुंचे। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “पीड़िता के बेहतर इलाज के लिए केजीएमयू में विशेषज्ञ डॉक्टरों का पैनल लगा हुआ है। यहां के आलावा बाहर से भी विशेष डॉक्टरों की टीम पीड़िता को देख रही हैं।”

डीएम ने कहा कि बेहतर इलाज के लिए पीजीआई और एम्स के भी सम्पर्क में भी हैं, और जरूरत पड़ी तो पीड़िता को एयरलिफ्ट करके बेहतर इलाज मुहैया कराया जाएगा। जिलाधिकारी ने बताया कि “पीड़िता के चाचा रायबरेली जेल में हैं और उनकी पैरोल स्वीकृत हो चुकी है। जैसे ही उच्च न्यायालय से आदेश जारी होगा, आगे की व्यवस्था की जाएगी।”

पीड़िता के परिवार द्वारा 35 बार की गई थी शिकायत

इस बीच यूपी पुलिस की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्नाव पीड़िता के एक रिश्तेदार का कहना है कि पीड़िता के परिवार ने पिछले एक साल में 35 पुलिस शिकायतें दर्ज कराईं थी। अखबार के मुताबिक, पीड़िता के परिवार ने पुलिस और प्रशासन को दी गई अपनी 35 लिखित शिकायतों में कहा था कि उन्हें अभियुक्त की ओर से हमले या नुकसान की आशंका है, लेकिन इन अर्जियों के बावजूद पुलिस ने उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

परिवार ने ये आशंका भी जताई थी कि मामले के मुख्य अभियुक्त और भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर या उनके साथी उन्हें निशाना बना सकते हैं। पीड़िता के रिश्‍तेदार ने अखबार बताया, “हम डर में जी रहे हैं। पिछले साल सीबीआई जांच शुरू करने के बाद से ही हमें जान से मारने की धमकियां मिल रही थी। डर इतना ज्यादा था कि हमने माखी स्थित अपना घर तक छोड़ दिया।” उन्‍नाव के एसपी एमपी वर्मा ने भी स्‍वीकार किया कि पुलिस को 33 शिकायतें मिली थीं लेकिन ‘उनमें कोई दम नजर नहीं आया, इसलिए उन्‍हें खारिज कर दिया गया।’

 

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