महाराष्ट्र: मॉब लिंचिंग पर पीएम मोदी को चिट्ठी लिखने वाले 6 छात्रों को यूनिवर्सिटी ने किया निष्कासित

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महाराष्ट्र में एक विश्वविद्यालय ने देश में बढ़ रहे मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या) की बढ़ती घटनाओं और बलात्कार के आरोपी नेताओं को कथित तौर पर संरक्षण दिए जाने के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध प्रदर्शन और चिट्ठी लिखने के लिए छह छात्रों को निष्कासित कर दिया है। महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (MGAHV) ने अपने आदेश में कहा कि छह छात्रों को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के लिए निष्कासित किया जा रहा है, जो वर्तमान में राज्य में 2019 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर लागू है।

महाराष्ट्र
फाइल फोटो

9 अक्टूबर को जारी एक आदेश में विश्वविद्यालय के कार्यकारी रजिस्ट्रार राजेश्वर सिंह ने बताया कि धरना देने वाले छात्रों को ‘2019 विधानसभा चुनाव आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन और न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने’ की वजह से निकाला गया है। निकाले गए छात्र चंदन सरोज (एम फिल, सोशल वर्क), नीरज कुमार (पीएचडी और पीस स्टडीज), राजेश सारथी और रजनीश अंबेडकर (वुमंस स्टडीज), पंकज वेला (एमफिल) और वैभव पिंपलकर (डिप्लोमा, महिला स्टडीज डिपार्टमेंट) हैं।

निकाले गए 6 छात्रों में से एक चंदन सरोज ने बताया कि 9 अक्टूबर को आयोजित इस धरने में करीब 100 छात्र शामिल थे। उनका आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिर्फ कुछ खास लोगों को निशाना बनाते हुए तीन दलित और तीन ओबीसी छात्रों पर कार्रवाई की। उनका दावा है कि अगड़ी जाति के कई छात्र भी उनके समर्थन में थे।

वहीं, विश्वविद्यालय के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स असोसिएशन ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा है कि राजेश सारथी AISA कार्यकर्ता है। संगठन ने यूनिवर्सिटी से अपना आदेश वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि छात्रों से उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं छीनी जा सकती।

Seditions and Suspensions Can Not Hide the Truth of Today’s Regime! Thousands More Will Speak out!AISA demands that…

Posted by AISA – All India Students' Association on Thursday, October 10, 2019

वहीं, द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कार्यकारी वाइस चांसलर कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि, ‘महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में लागू मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के दौरान समूहों में प्रदर्शन पर लगे प्रतिबंध के मद्देनजर यह कार्रवाई की गई है। हमारी चिट्ठी में हमारा रुख पूरी तरह साफ है।’

वहीं चंदन सरोज ने कहा, ‘कुछ दिनों पहले, हमने हमारे फेसबुक पेज पर ऐलान किया था कि हम विरोध जाहिर करते हुए पीएम को चिट्ठी लिखेंगे। कुछ छात्रों ने कहा कि कि प्रशासन की इजाजत के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। इसलिए 7 अक्टूबर को हमने उन्हें चिट्ठी दी। उन्होंने इजाजत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि चिट्ठी में तारीख नहीं है। उन्होंने कभी भी आचार संहिता के बारे में कुछ नहीं बताया।’

उन्होंने बताया कि छात्रों ने कैंपस स्थित गांधी की प्रतिमा पर इकट्ठा होने की योजना बनाई। चंदन ने बताया, ”9 अक्टूबर को ही बसपा के संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि भी थी। लेकिन उन्होंने मूर्ति तक जाने वाले गेट को बंद कर दिया। जब करीब 100 छात्र गेट के नजदीक धरना दे रहे थे, कार्यकारी रजिस्ट्रार राजेश्वर सिंह, कार्यकारी वीसी केके सिंह और प्रॉक्टर मनोज कुमार रात 9 बजे पहुंचे। उन्होंने हमें धमकाते हुए बुरे तरीके में बात की। हम कहते रहे कि हम जो कर रहे हैं, उसमें कुछ भी असंवैधानिक नहीं है और कैंपस में कोई चुनाव आचार संहिता नहीं लागू हो सकती। लेकिन उन्होंने हमारी कोई बात नहीं सुनी।”

चंदन सरोज ने आगे बताया, ‘देर रात, जब ऑफिस बंद रहते हैं, उन्होंने खास तौर पर तीन दलित और तीन ओबीसी छात्रों के खिलाफ ही लेटर जारी किया जबकि वहां बहुत सारे अगड़ी जाति के छात्र हमारे समर्थन में खड़े थे। हमने आगे बढ़ने का फैसला किया और 10 अक्टूबर को पीएम को चिट्ठी पोस्ट कर दी।’

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