दिल्ली में जागरूक लोगो के होसलों ने खोले गरीब बच्चों के लिए शिक्षा के नए आयाम

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भारत सरकार ने बच्चों के लिए फ्री और जरूरी शिक्षा देने के लिए क़ानून तो बनाया है लेकिन आज भी ऐसे लाखो गरीब बच्चे है जो शिक्षा से वंचित है। झुग्गियों में रहने वाले इन बच्चों की ज़िंदगी या तो भीख मांगने या फिर कूड़ा बीनने में गुजर जाती है। गरीबी और माँ बाप की लापरवाही ऐसे बच्चों को पढ़ाई से महरूम कर देती है।

ऐसे हालात में राजधानी दिल्ली के चंद जागरूक लोगो ने उम्मीद की नयी अलख जगाई है। ये लोग अपने खर्च पर बिना किसी सरकारी या गैर सरकारी मदद से झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित बना रहे है। इस अनूठे सामाजिक सरोकार के सिरमौर है उत्तरी दिल्ली के रहने वाले अजय सचदेवा।

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दिल्ली की झुग्गियों में हज़ारो परिवार गरीबी के दलदल में रहते है। ये ज़्यादातर लोग अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजते। वजह है पैसे की कमी। ये अपने बच्चों को कूड़ा बीनने, भीख मांगने या फिर अपराध के रास्ते पर धकेल देते है।

वैबसाइट कोबरापोस्ट के मुताबिक ऐसे मुश्किल हालात में दिल्ली के कुछ जिम्मेदार लोगो ने झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को शिक्षित बनाने का बीड़ा उठाया है। राजधानी की रामा रोड पर मेट्रो पिलर के पास ये लोग इन गरीब बच्चों को पढ़ाते है। बच्चों के दिन की शुरुआत सरस्वती वंदना, योगा और व्यायाम से होती है।

एक घंटे की इस क्लास के बाद इन बच्चों को रिफ्रेशमेंट के तौर पर जूस दिया जाता है ताकि इनमें एनर्जि बनी रही। इन बच्चों की फ़िजिकल एक्टिविटी की बखूबी देखरेख कर रहे है विकास कटियाल

फ़िजिकल एक्टिविटी के बाद अब बारी आती है पढ़ाई की। जमीन पर कालीन बिछाकर बच्चों को पाठशाला का अनुभव दिया जाता है। हिन्दी, अँग्रेजी और गणित के अलावा इन गरीब बच्चों को नैतिक शिक्षा भी दी जाती है। हर रोज दो घंटे की क्लास के बाद बच्चों को हल्का रिफ्रेशमेंट देकर इनकी छुट्टी कर दी जाती है।

8 से 10 बच्चों के साथ शुरू हुआ ये सफ़र कुछ साल में ही सौ का आकड़ा पार कर चुका है और इन लोगो ने अब इस काम को एक संस्था का रूप दे दिया है। आज ये बाल विकास संस्था यहां पढ़ने वाले गरीब बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए सरकारी और निजी स्कूलो में दाखिला दिलाने में भी मदद कर रही है।

इस अनोखी पहल की शुरुआत करने वाले इन लोगो के लिए ये सफ़र आसान नहीं रहा। सरकार की बेरुखी के अलावा बच्चों के माँ बाप को समझाना काफी चुनौती भरा रहा। लेकिन इनके हौसले डगमगाये नहीं और ये सफ़र आज एक कारवां बन चुका है।

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