बाबरी मस्जिद विध्वंस मामला: आरोप तय होने के बाद कांग्रेस ने उमा भारती से मांगा इस्तीफा

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अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार(30 मई) को भारतीय जनता पार्टी(बीजेपी) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत सभी 12 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। इन सभी पर मस्जिद गिराने की साजिश रचने के आरोप में केस चलेगा। Uma Bharti

वहीं, आरोप तय होने के बाद कांग्रेस ने केंद्रीय मंत्री उमा भारती के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि 12 आरोपियों में से एक उमा भारती केंद्रीय कैबिनेट मंत्री हैं। आरोप पत्र दायर किए जाने के बाद उन्हें अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे आना चाहिए और कानून व संविधान के शासन का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी दोषी हैं उन्हें देश के कानून के अनुसार बिना डर या पक्ष के सजा मिलनी चाहिए। इस आदेश के बाद साल 2013 से अब तक इस मामले में 185 स्थगन लिए गए हैं। देश के कानून से शीघ्रता से न्याय मिलना चाहिए और दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

वहीं, केंद्रीय मंत्री एम वेंकैया नायडू ने बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं का जोरदार बचाव करते हुए विश्वास जताया कि वे बेदाग निकलेंगे। नायडू ने कहा कि आरोपों का सामना कर रहे बीजेपी नेता निर्दोष हैं और वे बेदाग निकलेंगे। उन्होंने यह भी जिक्र किया कि राजग सरकार ने बीजेपी के शीर्ष नेताओं के खिलाफ मामले को वापस लेने के लिए कदम नहीं उठाया।

आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत सभी आरोपियों पर आरोप तय

बता दें कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत सभी 12 आरोपी 6 दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आपराधिक साजिश के आरोप में मुकदमे का सामना करेंगे। लखनउ की एक विशेष अदालत ने आरोपियों के खिलाफ मंगलवार(30 मई) को आरोप तय किए।

अब आपराधिक साजिश के गंभीर आरोपों के तहत उनके खिलाफ मुकदमा चलेगा। निचली अदालत ने 2001 में उनके खिलाफ ये आरोप हटा दिए थे और 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने 19 अप्रैल को उनके खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप को बरकरार रखने का आदेश दिया था।

मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही विशेष जज सुरेन्द्र कुमार यादव ने सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लेने का आदेश दिया, हालांकि बाद उनकी जमानत अर्जी मंजूर कर ली। सभी को 50-50 हजार के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया।

अदालत ने सभी मुल्जिमों की तरफ से आरोप से बरी करने की याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि छह दिसंबर 1992 को मस्जिद ढहाए जाने के समय सभी मुल्जिम वहां मौजूद थे। उनके द्वारा विवादित ढांचे को आपराधिक षड्यंत्र के तहत ध्वस्त किया गया। इसलिए याचिका खारिज की जाती है।

अब सभी के खिलाफ धारा-120 बी (आपराधिक साजिश रचने), गैरकानूनी जमावड़ा करने, धार्मिक भावनाएं भड़काने और राज्य व देश की अखंडता पर दुष्प्रभाव डालने वाले कार्य करने के अपराध में मुकदमा चलाया जाएगा। इस आरोपियों में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, विष्णु हरि डालमिया, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, राम विलास वेदांती, बैकुंठ लाल शर्मा, चंपत राय बंसल, महंत नृत्य गोपालदास, धरम दास और सतीश प्रधान।

 

 

 

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