कर्नाटक चुनाव परिणाम: एक्टर उदय चोपड़ा ने ट्वीट कर बताया राज्यपाल वजुभाई का BJP और RSS कनेक्शन, सोशल मीडिया पर मचा हंगामा

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कर्नाटक में मंगलवार (15 मई) को विधानसभा चुनाव के नतीजे तो आ गए लेकिन सरकार किसकी बनेगी ये अब तक साफ नहीं हो पाया है। त्रिशंकु की परिस्थिति में राज्यपाल वजुभाई आर. वाला की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। यही वजह है कि राज्य में चुनाव परिणाम की घोषणा के साथ नया सियासी दंगल शुरू हो गया है। कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर विधायकों को तोड़ने की कोशिश करने का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस सत्ता हथियाने के लिए ‘बैक डोर ऐंट्री’ की कोशिश कर रही है।

दरअसल, मंगलवार दोपहर तक के रुझानों में बहुमत के करीब दिख रही बीजेपी शाम होते-होते सरकार बनाने की दौड़ में पिछड़ गई। यह देख कांग्रेस ने तुरंत जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) को सरकार बनाने के लिए समर्थन दे दिया। जिसके बाद आनन-फानन में बीजेपी और कांग्रेस व जेडीएस गठबंधन ने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। जाहिर है कि अब बहुत कुछ कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला पर निर्भर करेगा कि वह पहले किसे सरकार गठन के लिए आमंत्रित करते हैं।

सरकार बनाने के इंतजार में बैठी बीजेपी और कांग्रेस+जनता दल (सेक्युलर) राज्यपाल वजुभाई के फैसले का इंतजार कर रही हैं। इस बीच बॉलीवुड अभिनेता उदय चोपड़ा भी इस मामले में कुद पड़े हैं। हालांकि उन्हें बीजेपी और पीएम मोदी समर्थक जमकर ट्रोल कर रहे हैं। उदय चोपड़ा को उनके द्वारा कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को लेकर किए गए एक ट्वीट की वजह से दक्षिणपंथी समूह द्वारा जमकर ट्रोल किया जा रहा है।

दरअसल, अभिनेता ने मंगलवार (15 मई) को कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के ऐलान के बाद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा था कि उन्होंने गूगल से यह पता किया है कि राज्यपाल वजुभाई वाला बीजेपी के हैं और अब ऐसे में किस पार्टी की सरकार बनेगी इसके बारे में सब जानते हैं।

उदय चोपड़ा ने ट्वीट कर लिखा, ‘मैंने अभी तुरंत गूगल पर सर्च किया और पाया कि कर्नाटक के राज्यपाल बीजेपी से हैं और आरएसएस से भी संबंध रखते हैं, ऐसे में मुझे लगता है कि हम सबको पता है कि क्या होने वाला है?’ इसके साथ ही उन्होंने विकिपीडिया की एक लिंक भी अपने ट्वीट में शेयर की। उनके इसी ट्वीट को लेकर बीजेपी और मोदी समर्थक सोशल मीडिया पर उनका मजाक बना रहे हैं।

इस ट्वीट के बाद उदय चोपड़ा काफी ट्रोल हुए। कोई उन्हें कानून समझाने लगा तो किसी ने कहा कि बॉलीवुड के लोगों को राजनीति के बारे में न बोलने की नसीहतें देने लगे। कई लोग तो कॉमेंट्स में उदय के लिए मीम्स पोस्ट करने लगे। लगातार ट्रोल होने के बाद उदय चोपड़ा एक फिर ट्वीट कर लिखा, ‘मेरी टाइमलाइन पर इतने सारे ट्रोल। मैं एक भारतीय हूं और अपने देश के बारे में चिंता करता हूं।’

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा की 224 में से 222 सीटों के लिए 12 मई को मतदान हुआ था। 224 सदस्यीय विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 112 सीटें जरूरी हैं। 224 सीटों में से 222 के नतीजे घोषित हो गए हैं और बीजेपी को 104, कांग्रेस को 78, जेडीएस गठबंधन को 38 और अन्य को दो सीटें मिली हैं। ऐसे में कोई भी पार्टी बहुमत के जादुई आंकड़े 112 को नहीं छू सकी है।

104 सीटों के साथ बीजेपी सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से 8 सीट पीछे है। यही देख कांग्रेस ने 78 सीटें होने के बावजूद 38 सीटों वाले जेडीएस को समर्थन देने का दांव चला। थोड़ी देर बाद जेडीएस ने भी समर्थन और एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बनाने की कांग्रेस की पेशकश मंजूर कर ली। कांग्रेस और जेडीएस को मिलाकर 116 सीटें हो जाती हैं, जो बहुमत से 4 ज्यादा है।

PM मोदी के खास रहे हैं राज्यपाल वजुभाई

जाहिर है कि अब बहुत कुछ कर्नाटक के राज्यपाल पर निर्भर करेगा कि वह पहले किसे सरकार गठन के लिए आमंत्रित करते हैं। राज्यपाल जिस पार्टी को पहले सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे, वो अपने हिसाब से विधायकों को ‘जोड़-तोड़ कर’ संख्या बल जुटाने का प्रयास करेगी। यह बहुत संभव है कि जोड़-तोड़ कर कर्नाटक में सरकार बना ली जाए और इसीलिए सभी की नजरें अब राज्यपाल के फैसले पर टिकी हैं। राज्यपाल वजुभाई आर वाला के बारे में यदि आपको पता हो तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी लोगों में से एक रहे हैं।

गुजरात सरकार में वित्त मंत्री और विधानसभा अध्यक्ष रहे वजुभाई ने एक वक्त पीएम मोदी के लिए खुद की सीट भी छोड़ दी थी। ताकि उस समय पहली बार मुख्यमंत्री बने नरेंद्र मोदी 2001 में अपना पहला चुनाव लड़ पाएं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि वह अपनी ‘वफादारी’ साबित करते हैं या फिर दूसरे पक्ष को मौका देते हैं। राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने वाले वजुभाई जनसंघ के संस्थापकों में से एक हैं। पीएम मोदी के करीबी समझे जाने वाले 79 वर्षीय वाला आरएसएस के पुराने स्वयंसेवक हैं और उनके नाम पर गुजरात के वित्त मंत्री के तौर पर 18 बजट पेश करने का रिकॉर्ड है।

बीजेपी की गुजरात इकाई में संकट प्रबंधक की छवि हासिल कर चुके वजुभाई वाला को 1990 के दशक के मध्य में तब प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बनाया गया था जब शंकरसिंह वाघेला ने बगावत कर दी थी और केशुभाई पटेल सरकार गिर गई थी। वह गुजरात के वित्त मंत्री के रूप में 2002 से 2012 तक मोदी के बाद दूसरे नंबर पर थे। केशुभाई पटेल के दौर में भी उनका यही दर्जा था। वाला ने अपने गृह नगर राजकोट से आरएसएस के साथ अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। उस दौरान वह जनसंघ से जुड़े और आपातकाल में जेल में भी गए।

 

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