संगरूर: 110 घंटे बाद 150 फीट गहरे बोरवेल में फंसे रहे 2 वर्षीय बच्चे को निकाला गया बाहर, लेकिन नहीं बच सकी जान

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पंजाब के संगरूर जिले में 150 फुट गहरे बोरवेल में गिरे दो वर्षीय फतेहवीर सिंह को करीब 110 घंटे बाद मंगलवार (11 जून) सुबह बाहर तो निकाल लिया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अधिकारियों ने बताया कि ‘राष्ट्रीय आपदा मोचन बल’ के कर्मियों ने सुबह करीब साढ़े पांच बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला था। बच्चे को चंडीगढ़ पीजीआई ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की मौत से गुस्साए स्थानीय लोग पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

(Bharat Bhushan / Hindustan Times)

अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के कर्मियों ने सुबह करीब साढ़े पांच बजे बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला। फतेहवीर को चिकित्सीय सुविधा प्रदान करने के लिए डॉक्टरों की एक टीम मौके पर ही मौजूद थी। वेंटिलेटर की सुविधा से युक्त एक एंबुलेंस भी वहां मौजूद थी। हालांकि अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया।

संगरूर उपायुक्त घनश्याम ठोरी ने समचाार एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पुलिस सुरक्षा के बीच बच्चे को चंडीगढ़ के ‘स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान’ (पीजीआईएमईआर) ले जाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को मृत अवस्था में वहां लाया गया था। पीजीआईएमईआर के चिकित्सा अधीक्षक ए. के. गुप्ता ने कहा, ‘‘शव का जल्द ही पोस्टमार्टम कराया जाएगा।’’ उन्होंने बताया कि अस्पताल बयान जारी करेगा। गुप्ता ने बताया कि बच्चे को सुबह अस्पताल लाए जाने के बाद उसे ‘उन्नत बाल चिकित्सा केन्द्र’ ले जाया गया।

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्वीट कर फतेहवीर की मौत पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि एनडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और बाहरी विशेषज्ञों द्वारा लगातार बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे थे। उन्होंने ट्वीट कर आगे लिखा है कि नन्हे फतेहवीर की मौत से बेहद दुखी हूं। मैं वाहेगुरु से प्रार्थना करूंगा कि पीड़ित परिवार को इस त्रासदी से उबरने के लिए शक्ति दे। मैंने सभी जिला कलेक्टरों से खुले बोरवेल को लेकर रिपोर्ट मांगी है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।

125 फुट गहरे बोरवेल में गिरा था बच्चा

फतेहवीर इसी सोमवार को दो साल का हुआ था। वह सात इंच चौड़े और 125 फुट गहरे बोरवेल में गिर गया था। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। फतेहवीर सिंह जिले के भगवानपुरा गांव में अपने घर के पास एक सूखे पड़े बोरवेल में गुरुवार शाम करीब चार बजे गिर गया था। बोरवेल कपड़े से ढका हुआ था इसलिए बच्चा दुर्घटनावश उसमें गिर गया। अधिकारियों ने बताया कि बच्चे की मां ने उसे बचाने की कोशिश की थी लेकिन वह उसे बचा नहीं पाई।

बच्चे को बाहर निकालने के लिए व्यापक स्तर पर एक बचाव अभियान चलाया गया था। अधिकारी बच्चे तक ऑक्सीजन पहुंचाने में तो सफल रहे थे लेकिन वे उस तक खाना-पीना नहीं पहुंचा पाए थे। ठोरी ने मीडिया को बताया कि यह 100 फुट से अधिक गहराई पर एनडीआरएफ द्वारा चलाए गए सबसे कठिन अभियानों में से एक था।

बच्चे को बचाने के लिए बोरवेल के समानांतर एक दूसरा बोरवेल खोदा गया था और उसमें कंक्रीट के बने 36 इंच व्यास के पाइप डाले गए थे। बचाव अभियान में देरी के कारण स्थानीय लोगों ने सोमवार को जिला प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था। सुनाम-मानसा मार्ग को गांववालों ने बाधित कर दिया था।

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