कश्मीर के मुद्दे पर मलाला यूसुफजई पर भड़की बिग बॉस की पूर्व प्रतियोगी वीना मलिक, ट्विटर पर किया अनफॉलो

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हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाली रिएलिटी शो ‘बिग बॉस’ की पूर्व प्रतियोगी व पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक ने कश्मीर विवाद को लेकर अब नोबेल विजेता मलाला युसुफ़ज़ई को निशाने पर लिया है। यही नहीं, उन्‍होंने उन्हें ट्विटर पर अनफॉलो तक कर दिया। पाकिस्तानी अभिनेत्री का मानना है कि मलाला ने कश्मीर मुद्दे पर सही रुख नहीं अपनाया है।

वीना मलिक

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वीना इस बात पर नाराज हैं कि मानवाधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली मलाला ‘भारत के कब्जे वाले कश्मीर’ के विशेष दर्जे में बदलाव पर चुप क्यों हैं। वीना ने मलाला को संबोधित करते हुए ट्वीट किया, ‘मुझे हैरत हो रही है कि अगर तुम कश्मीर के मसले से परिचित हो तो तुमने अभी तक इस पर भारत को क्यों नहीं कुछ कहा। मैं तुम्हें अनफॉलो कर रही हूं।’ वीना ने यह ट्वीट आठ अगस्त की देर रात को किया था।

वीना के ट्वीट के बाद मलाला ने भी ट्वीट किया लेकिन उन्होंने शांति की बात करते हुए भारत या पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। उन्‍होंने कश्मीरियों को ‘अपने मुल्क दक्षिण एशिया’ का निवासी बताया। इसके बाद वीना को मलाला के ट्वीट का पता चला तो फिर उन्‍होंने मलाला द्वारा दक्षिण एशिया को देश कहे जाने की खिल्ली उड़ाई। उन्होंने लिखा, “अच्छा तो मलाला का संबंध एक ऐसे मुल्क से है जो अभी अभी अस्तित्व में आया है।”

मलाला यूसुफजई ने अपने ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट किया है, जिसमें उन्होंने लिखा, ‘जब मैं बच्ची थी, जब मेरे माता-पिता बच्चे थे, जब मेरे दादा-दादी युवा थे, तब से ही कश्मीर के लोग युद्ध वाली हालत के बीच जी रहे हैं, पिछले सात दशकों में कश्मीर के बच्चे हिंसा के बीच ही बड़े हुए हैं, मैं कश्मीर के बारे में इसलिए फ़िक्र करती हूं, क्योंकि दक्षिण एशिया मेरा घर है, वो घर है, जिसे मैं 1.8 बिलियन लोगों के साथ शेयर करती हूं, जिनमें कश्मीरी भी शामिल हैं, हम अलग संस्कृति, धर्म, भाषा, खान-पान और रीति-रिवाज को रिप्रेजेंट करते हैं, और मुझे विश्वास है कि हम सब शांति से रह सकते हैं, अलग-अलग भिन्नता के सभी लोग दुनिया को जो भी तोहफे देते हैं, मैं जानती हूं हम उसकी कद्र कर सकते हैं।

बता दें कि, मलाला का संबंध पाकिस्तान से है और 2012 में उन्हें स्वात में स्कूल से लौटते वक्त गोली मारी गई थी क्‍योंकि उन्होंने लड़कियों की शिक्षा के लिए आवाज उठाई थी। इलाज के लिए उन्हें ब्रिटेन ले जाया गया जहां उन्होंने आगे की पढ़ाई की। बच्चों की शिक्षा की दिशा में काम करने के लिए साल 2014 में उन्हें भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था।

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