बीजेपी सांसद हुकुम सिंह का दूसरा दावा भी फर्ज़ी, इस साल कैराना में फ़िरौती की सिर्फ एक वारदात हुई

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शाहनवाज़ मलिक, शामली

कैराना विवाद में बीजेपी सांसद हुकुम सिंह का दावा एक बार फिर झुठा साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया था कि रंगदारी की वजह से कैराना में हिंदू कारोबारियों पलायन कर रहे हैं। अपने इस दावे को पुख़्ता करने के लिए उन्होंने 348 लोगों की लिस्ट भी जारी की है लेकिन पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक साल 2016 में फिरौती की महज़ एक वारदात दर्ज की गई है।

शामली पुलिस के एडिशनल एसपी एके झा ने बताया है कि 7 मार्च 2016 को कैराना के एक कारोबारी निखिल से एक लाख की रंगदारी मांगी गई लेकिन 11 मार्च को मुलज़िम गिरफ़्तार कर लिया गया था। उसकी शिनाख़्त सुभाष के रूप में हुई थी। इसके अलावा इस साल कैराना में रंगदारी की कोई वारदात नहीं हुई है।

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रिकॉर्ड्स बताते हैं कि कैराना इलाक़ा हमेशा से शांत रहा है लेकिन बीते पांच साल में यहां हालात बदले हैं। 2010 में मुक़ीम काला गैंग यहां रंगदारी की वजह से सुर्ख़ियों में आया। गैंग ने शामली, सहारनपुर और पानीपत में ताबड़तोड़ कई वारदात अंजाम दी लेकिन अब इन्हें लगभग ख़त्म किया जा चुका है। मुक़ीम काला की गैंग में कुल 29 क्रिमिनल थे। इनमें से चार मुठभेड़ में मार दिए गए जबकि सरगना मुक़ीम समेत 24 जेल में बंद हैं और एक फ़रार है।

एडिशनल एसपी एके झा कहते हैं कि इस गैंग से मुसलमानों से भी रंगदारी वसूली है। 2013 में रंगदारी नहीं देने की वजह से सहारनपुर में दो मुसलमानों की हत्या भी इन्होंने की है। लिहाज़ा, ये कहना सही नहीं है कि ये गैंग सिर्फ हिंदू कारोबारियों को टारगेट करता है।

इस गैंग में मुक़ीम का छोटा भाई वसीम भी शामिल हो गया था। फिलहाल ये भी जेल में बंद है। वसीम ने ही इस साल 7 मार्च को कैराना के एक कारोबारी निखिल से एक लाख रुपए की रंगदारी मांगी थी। रकम वसूलने का काम वसीम ने गैंग के सदस्य सुभाष और बाबू को दे रखा था। कैराना पुलिस ने 11 मार्च को सुभाष को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। अफसर एके झा कहते हैं कि इस वारदात में भी सुभाष और बाबू मुस्लिम नहीं हैं, फिर ऐसे दावे करने के क्या मायने हैं?

वहीं सांसद हुकुम सिंह ने इन तमाम रिकॉर्ड्स को दरकिनार करते हुए कैराना से सटे कांधला इलाक़े की भी एक लिस्ट जारी की है। यहां भी यही दावा किया गया है कि डर की वजह से 150 हिंदू पलायन कर गए हैं लेकिन कांधला पुलिस स्टेशन से रिकॉर्ड खंगालने पर यहां भी हुकुम सिंह के दावा खोखला नज़र आता है।

कांधला पुलिस के स्टेशन ऑफिसर साहेब सिंह के मुताबिक इस साल उनके एरिया में फिरौती के दो केस दर्ज किए गए हैं लेकिन दोनों वारदात में मुलज़िम और जिनसे फिरौती मांगी गई, वे हिंदू हैं। एक मामले में जेल में बंद विपुल खूनी ने कपड़े के कारोबारी विजेंद्र सिंह ने फिरौती मांगी जबकि दूसरे मामले में सुरेंद्र काला अपने ही ख़ानदान के एक दवा कारोबारी को फिरौती के लिए फोन कर दिया था।

साहेब सिंह ने बताया कि एक हफ़्ता पहले यहां एक महिला से 40 हज़ार लूट लिए गए थे। इसमें अनवर और समीर की गिरफ्तारी करके कैश बरामद किया गया लेकिन अनवर और समीर ने महिला से लूटपाट इसलिए नहीं की कि वो हिंदू हैं। महिला बैंक से कैश निकालकर ला रही थीं और दोनों मुलज़िमों ने मौक़ा देखकर उनसे रुपए छीन लिए थे।

कांधला पुलिस ने कहा है कि उनके इलाक़े की जारी लिस्ट की तफ़्तीश की जा रही है लेकिन अभी तक डर की वजह से पलायन का कोई मामला सामने नहीं आया है।

शामली पुलिस बताती है कि 2014 में कैराना में रंगदारी मांगने वालों का ख़ौफ़ काफ़ी बढ़ गया था। रंगदारी मांगने वाले शटर से नीचे से चिट्ठी डालकर चले जाते थे कि इतने रुपयों का इंतज़ाम हो जाना चाहिए। 10 लाख की रंगदारी नहीं देने पर दो कारोबारी राजेंद्र और शिवकुमार की अगस्त 2014 में हत्या कर दी गई थी। राजेंद्र के बुज़ुर्ग पिता महेश चंद्र कहते हैं कि बेशक़ अपराधी गिरफ़्तार कर लिए गए हैं लेकिन उन्हें मुआवज़ा चाहिए। हमारा कारोबार चौपट हुआ है और मरने वालों के बच्चे भी अनाथ हो गए हैं।

अफसर एके झा कहते हैं कि कानून व्यवस्था देशभर में समस्या है। अपराधी पैदा होते तो पुलिस उनपर लगाम कसती है। कैराना में पुलिस इस गैंग को पिछले साल ही तबाह कर चुकी है लेकिन अब इसे दूसरा रंग दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि बेहतर मौक़ों की तलाश में वो बड़े शहरों का रुख़ करते ही हैं। पुरानी दिल्ली के जामा मस्जिद इलाक़े में सर्राफ़े की बड़ी-बड़ी दुकानें मुस्लिम कारोबारियों की हैं। इनमें ज़्यादातर कैराना से ही पलायन करके दिल्ली गए हैं।

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