1965 के युद्ध में पाक के छक्के छुड़ाने वाले अब्दुल हमीद को लोगों ने दी श्रद्धांजलि, जानें उनकी हैरतंगेज कहानी

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भारत-पाकिस्तान के बीच वर्ष 1965 में हुई युद्ध में अपनी तोपों से दुश्मनों के दांत खट्टे कर युद्ध के परिणाम को भारत के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभाने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कंपनी क्वॉर्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद की आज (10 सितंबर) 52वीं पुण्यतिथि है। सोशल मीडिया सहित देश भर में आज अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि दी जा रही है।

कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद भारतीय सेना की चार ग्रेनेडियर में एक सिपाही थे, जिन्होंने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान खेमकरण सैक्टर के आसल उत्ताड़ में लड़े गए युद्ध में अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करते हुए देश के लिए शहीद हो गए। हमीद को मरणोपरान्त भारत का सर्वोच्च सेना पुरस्कार परमवीर चक्र मिला।

मरने से पहले परमवीर अब्दुल हमीद ने मात्र अपनी ‘गन माउंटेड जीप’ से उस समय अजेय समझे जाने वाले पाकिस्तान के ‘पैटन टैंकों’ को नष्ट किया था। एक साधारण से दिखने वाले इस शख्स ने 8 सितंबर 1965 को पाकिस्तान के उन फौलादी टैंको को मोम की तरह पिघला दिया, जिन पर देश के दुश्मनों को बहुत नाज था।

आखिर क्या हुआ था उस रात?

युद्ध के दौरान 8 सितंबर 1965 की रात पाकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया। पाकिस्तानी फौज को जवाब देने के लिए भारतीय सेना के जवान मुस्तैदी हो गए। उन भारतीय जवानों ने वीर अब्दुल हमीद भी पंजाब के तरन तारन जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। पाकिस्तान ने उस समय के अपराजेय माने जाने वाले ‘अमेरिकन पैटन टैंकों’ के साथ ‘खेम करन’ सेक्टर के ‘असल उताड़’ गांव पर हमला कर दिया।

साधारण टैंकों से किया पाक का मुकाबला

विकिपीडिया के मुताबिक, भारतीय सैनिकों के पास न तो टैंक थे और नहीं बड़े हथियार, लेकिन उनके पास था ‘भारत माता’ की रक्षा के लिए लड़ते हुए मर जाने का हौसला। भारतीय सैनिक अपनी साधारण ‘थ्री नॉट थ्री रायफल’ और एल.एम्.जी. के साथ पैटन टैंकों का सामना करने लगे। हवलदार वीर अब्दुल हमीद के पास ‘गन माउनटेड जीप’ थी जो पैटन टैंकों के सामने मात्र एक खिलौने के सामान थी।

पाक फौज में मची भगदड़

रिपोर्ट के अनुसार, वीर अब्दुल हमीद ने अपनी जीप में बैठ कर अपनी गन से पैटन टैंकों के कमजोर अंगों पर एकदम सटीक निशाना लगाकर एक-एक कर धवस्त करना शुरू कर दिया। उनको ऐसा करते देख अन्य सैनकों का भी हौसला बढ़ गया और देखते ही देखते पाक फौज में भगदड़ मच गई। वीर अब्दुल हमीद ने अपनी ‘गन माउनटेड जीप’ से सात पाकिस्तानी पैटन टैंकों को नष्ट किया था।

भागने लगे पाक सैनिक

देखते ही देखते भारत का ‘असल उताड़’ गांव पाकिस्तानी पैटन टैंकों की कब्रगाह बन गया। लेकिन भागते हुए पाकिस्तानियों का पीछा करते वीर अब्दुल हमीद की जीप पर एक गोला गिर जाने से वे बुरी तरह से घायल हो गए और अगले दिन 9 सितंबर को वह शहीद हो गए, लेकिन उनके स्वर्ग सिधारने की आधिकारिक घोषणा 10 सितंबर को की गई थी।

उस लड़ाई में पाकिस्तान की तरफ से परवेज मुशर्रफ भी लड़ रहे थे, और उन्हें भी पाकिस्तानी फौज के साथ जान बचाकर भागना पड़ा था। वीर अब्दुल हमीद के फौलादी हौसले से प्रेरित होकर अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने दूरदर्शन के धारावाहिक परमवीर चक्र में हवलदार अब्दुल हमीद की भूमिका निभाई थी।

यूपी के गाजीपुर में हुआ जन्म

वीर अब्दुल हमीद का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव में 1 जुलाई 1933 में एक साधारण दर्जी परिवार में हुआ था। उनके पिता लांस नायक उस्मान फारुखी भी ग्रेनेडियर में एक जवान थे। अब्दुल हमीद 27 दिसंबर 1954 को चार ग्रेनेडियर में भर्ती हुए, और अपने सेवा काल में सैन्य सेवा मेडल, समर सेवा मेडल और रक्षा मेडल से सम्मान प्राप्त किया था।

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