‘हिजाब’ के कारण नौकरी नहीं देने का मामला: छात्रा बोली- हमें किसी के खिलाफ शिकायत नहीं करनी, लेकिन इस भेदभाव पर चर्चा होनी चाहिए

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इस्लामोफोबिया का डर दुनियाभर में देखा जा रहा है, अब हमारे देश में भी इसी आधार पर भेदभाव देखने को मिल रहा है। जिसका ताजा नमूना राजधानी दिल्ली के एक अनाथालय में देखने को मिला है, जहां एक मुस्लिम छात्रा को नौकरी के लिए केवल इसलिए अयोग्य घोषित कर दिया गया, क्योंकि वह ‘हिजाब’ पहनती है। अनाथालय को चलाने वाले गैर सरकारी संगठन (NGO) का कहना है कि एक किलोमीटर की दूरी से ही कोई बता देगा कि आप (छात्रा) मुस्लिम महिला हो।

Photo-Indian Express

जी हां, इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज (TISS) की एक छात्रा को दिल्ली के एक एनजीओ ‘दिल्ली ऑर्फेनेज’ ने नौकरी देने से इनकार कर दिया। मना करने के पीछे तर्क ये दिया गया है कि छात्रा को एक किलोमीटर दूर से देखकर भी कोई ये बता देगा कि वे एक मुस्लिम महिला हैं।

इस मामले में ‘जनता का रिपोर्टर’ से बातचीत में आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक सौरभ भारद्वाज ने कहा कि अगर हमारे पास पीड़ित शिकायत करती है तो हम कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि संविधान में सबको बराबर का हक दिया गया है। कोई भी व्यक्ति धर्म या लिंग के आधार पर किसी को नौकरी देने से इनकार नहीं कर सकता।

हालांकि, जब ‘जनता का रिपोर्टर’ ने पीड़ित छात्रा ने पूछा कि क्या आप इस मामले में दिल्ली सरकार से शिकायत कर एनजीओ के खिलाफ कार्रवाई करना चाहती हैं? इस पर छात्रा ने कहा कि हमें अवाम तक आवाज पहुंचानी थी कि ऐसा हो रहा है और इस भेदभाव पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें किसी के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करनी है।

छात्रा ने कहा कि मैं समाधान का हिस्सा बनना चाहता हूं, समस्या का नहीं। उन्होंने कहा कि मैं खुद को पीड़िता नहीं मानती हूं, मैं इस कहानी को मशहूर होने या सहानुभूति पाने के लिए शेयर नहीं किया है। ये सिर्फ मेरी कहानी नहीं है। छात्रा ने कहा कि मुझे बस इस भेदभाव का समाधान चाहिए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, निदाल ज़ोया (27) नाम की छात्रा है जो बिहार की राजधानी पटना से ताल्लुक रखती हैं। एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नौकरी की जानकारी मिलने के बाद ज़ोया ने अपना रेज़्यूमे एनजीओ को मेल किया। जिसके जवाब में एनजीओ के सीईओ हरीश वर्मा ने रेज़्यूमे स्वीकार करते हुए निदाल को प्रोजेक्ट प्रपोज़ल भेजने को कहा। जिसके बाद जोया ने ठीक वैसा ही किया।

हरीश वर्मा ने अपने ई-मेल के जवाब में जोया के इंग्लिश से प्रभावित होकर उनकी तारीफ भी की। लेकिन बाद में हरीश ने लिखा कि उनका एनजीओ रिलिजन फ्री होगा, जिसकी वजह से वे चाहते हैं कि बाकी धर्म के लोग उसमें ज़रूर आएं और अपनी योग्यता साबित करें। साथ ही हरीश वर्मा ने लिखा कि आपके (जोया) पहनावे की वजह से कोई एक किलोमीटर दूर से भी बता देगा कि आप एक मुस्लिम महिला हैं।

जिसके जवाब में निदाल ने हरीश वर्मा से पूछा कि इस रिलिजन फ्री अनाथालय में एडिमिशन पाने वाली लड़कियों को पूजा करने या नमाज़ पढ़ने की इजाज़त होगी या नहीं? इसके जवाब में हरीश ने लिखा कि इससे उन्हें सदमा लगा है कि जोया की प्राथमिकता रूढ़िवादी इस्लाम है ना कि इंसानियत। वे आगे लिखते हैं कि वे अपने अनाथालय में किसी तरह की धार्मिक गतिविधी नहीं होने देंगे।

जोया, जो पहले भी हिजाब के कारण बहिष्कार का सामना कर चुकी है, उन्होंने लिखा कि वह एक मुसलमान महिला है इसलिए अपने सिर को ढकने के लिए वह हिजाब पहनती है, क्योंकि यह मेरी प्राथमिकता है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद ने कहा कि अगर जोया निजी तौर पर शिकायत करती हैं दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि जोया ने किसी के खिलाफ शिकायत करने से इनकार कर दिया है।

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