पश्चिम बंगाल: टाइम्स ऑफ इंडिया ने BJP कार्यकर्ताओं की हत्या मामले में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के कथित संलिप्तता वाली खबर को किया डिलीट

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पश्चिम बंगाल के पुरूलिया जिले में पिछले महीने के आखिरी में 31 मई को 20 वर्षीय युवक त्रिलोचन महतो का शव पेड़ से लटकता हुआ पाया गया था। युवक का शव उसके घर के नजदीक पेड़ पर लटका पाया गया। बीजेपी ने दावा कि त्रिलोचन महतो पार्टी का कार्यकर्ता था। पार्टी कार्यकर्ता की हत्या के लिए बीेजपी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टी ने कम्युनिस्ट शासन की हिंसक विरासत को भी पीछे छोड़ दिया है।जिले के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि त्रिलोचन महतो के शव के निकट बांग्ला भाषा में लिखा एक नोट मिला है, जिसमें लिखा हुआ है कि उसे हाल ही में राज्य में हुए पंचायत चुनाव में ‘बीजेपी के लिए काम करने के लिए दंडित किया गया है।’ अधिकारी ने नोट के हवाले से बताया, ‘तुम सिर्फ 18 साल के हो लेकिन तुम बीजेपी से जुडे हुए हो और इसने तुम्हारी जान ले ली। मैं तुम्हें पंचायत चुनाव से वक्त से ढूंढ़ रहा था और अब तुम मारे गए।’

उन्होंने बताया कि मंगलवार शाम युवक घर से मुश्किल से तीन किलोमीटर दूर ही गया था लेकिन वापस नहीं लौटा। उसने रात में अपने भाई को फोन करके बताया था कि उसे अगवा कर लिया गया है। और उसे बचाने को कहा था। अमित शाह ने शाह ने ट्वीट किया, ‘पश्चिम बंगाल के बलरामपुर में हमारे युवा कार्यकर्ता, त्रिलोचन महतो की निर्मम हत्या से गहरा दुख हुआ। संभावनाओं से भरा एक युवा जीवन राज्य के संरक्षण में बर्बरता से छीन लिया गया। उन्हें पेड़ से लटका दिया गया क्योंकि उनकी विचारधारा राज्य प्रायोजित गुंडों से अलग थी।’

वहीं, पुरुलिया जिले में 20 वर्षीय बीजेपी कार्यकर्ता त्रिलोचन महतो का शव पेड़ से लटका हुआ मिलने के तीन दिन बाद शनिवार (2 जून) सुबह एक और व्यक्ति का शव बरामद किया गया। इस शव की पहचान 32 साल के दुलाल दास के तौर पर की गई, जिनके बारे में भी कहा गया कि वो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। दुलाल कुमार का शव एक विद्युत पारेषण टॉवर से लटका मिला। बीजेपी ने आरोप लगाया कि ये मौतें ‘राजनीतिक हत्याएं’ है। उन्होंने घटनाओं की सीबीआई जांच की मांग की।

इन दोनों बीजेपी कार्यकर्ताओं की कथित हत्याओं को लेकर जारी घमासान के बीच इस महीने की शुरुआत में देश की प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने अपनी वेबसाइट पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें दावा किया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत मामले में हिंदूवादी संगठन बजरंग दल के 11 सदस्यों को कथित तौर पर गिरफ्तार किया गया है।

लेकिन सिर्फ एक दिन बाद ही टाइम्स ऑफ इंडिया की वेबसाइट से यह रिपोर्ट अचानक गायब हो गई। अखबार ने न केवल वेबसाइट से इस खबर को हटा दिया बल्कि खबर के साथ शामिल उस वीडियो रिपोर्ट को भी डिलीट कर दिया, जो खबर के साथ दिख रहा था। दोनों लिंक पर क्लिक करने पर ‘404 पेज मौजूद नहीं है’ आ रहा है। आप नीचे वीडियो के जरिए भी टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा हटाए गए खबर के बारे में विस्तृत जानकारी ले सकते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हत्या के मामलों पर अपनी रिपोर्ट को डिलीट किए जाने के बाद की कई सवाल उठ रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की कथित संलिप्तता वाली खबर फर्जी थी? या बजरंग दल के खिलाफ खबर प्रकाशित करने के बाद टाइम्स ऑफ इंडिया पर किसी ने दबाव बनाकर रिपोर्ट को हटवा दिया? अब सोशल मीडिया पर उठ रहे इन सवालों का जवाब टाइम्स ऑफ इंडिया ही दे सकता है।

 

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