‘मुझे गर्व है अपने पति पर और ऐसे हर आदमी पर जो रिपब्लिक टीवी का बहिष्कार करता है, झूठ का बहिष्कार होना ही चाहिए’

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दिल्ली की सर्दियां सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रेमियों के लिए बेहतरीन वक़्त होता है। साहित्य और संगीत की अनेकों अनेक गोष्ठियां चलती रहती हैं। कल दोपहर मेरे पति अपूर्व ने सोचा क्यूं ना संसद मार्ग पे हो रही जिगनेश मेवानी की रैली देखी जाए। राजनैतिक रैलियों में नए पन की उम्मीद लिए वो रैली में पहुंचे और युवा जोश, सूझ-बूझ से काफ़ी प्रभावित हुए।मेरे पति जो एक तथाकथित ‘ऊंची’ जाती के हिंदू हैं, उन्हें लगा कि गर्व से ख़ुद को ‘चमार’ कहने वाले लड़कों में एक ख़ूबसूरत भारतीय जज्बा था। वे कह रहे थे कि वे हर जाती और धर्म के आम आदमी के ख़िलाफ़ होने वाले शोषण का विरोध करते हैं। देश भक्ति का इससे बड़ा सबूत नहीं हो सकता।

देश को जात-पात और धर्म-ईमान से बांटने वालों के ख़िलाफ़ अगर सब एकजुट होकर खड़े हो जाएं, तो सत्ता पक्ष को जवाब देना ही होगा। कोई भी संवेदनशील और समझदार व्यक्ति इन वक्तव्यों से प्रभावित होता ही। सब कुछ ठीक ही चल रहा था कि रिपब्लिक टीवी की एक महिला पत्रकार वहां आ पहुंची और भीड़ में इस नीयत से दाख़िल हुई कि किसी पे कुछ आरोप लगा सके।

उसने भीड़ से कोई सवाल नहीं पूछा, ना ही कोई बात की! उसके साथ एक वीडियो कैमरा भी था जो सब रिकॉर्ड कर रहा था। आस-पास खड़े सभी लोगों ने, जिनमें अपूर्व भी थे, रिपब्लिक टीवी से दूर होने के लिए कहना शुरू किया, “गो अवे, रिपब्लिक टीवी!” (दूर हटो, रिपब्लिक टीवी)। वे देख रहे थे कि इस चैनल के पत्रकार सिर्फ़ मसाले की तलाश में रहते हैं।

लेकिन कल रात, रिपब्लिक टीवी के सबसे झूठे पत्रकार अरनब गोस्वामी ने मेरे पति की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि वे उस महिला पत्रकार को परेशान कर रहे थे। उस निचले तबके के पत्रकार ने और भी कई पुरुषों की तस्वीर दिखायी और उन सब पे झूठे इल्ज़ाम लगाए। मेरा ख़ून खौल रहा था। इस तरह की मानहानि और वो भी एक झूठे-मक्कार आदमी के हाथों? ये मैं क़तई बर्दाश्त नहीं कर सकती।

अरनब गोस्वामी ने जान-बूझकर पूरा वीडियो नहीं दिखाया। उसने सिर्फ़ तस्वीरें दिखायी ताकि किसी की बातचीत ना सुनायी दे। घटियापन का आलम ये था कि उसने भाजपा के झूठे प्रवक्ता संबित पात्रा के अलावा किसी को बोलने का मौक़ा ही नहीं दिया। गोस्वामी जिगनेश मेवानी के समर्थकों से सवाल करता रहा कि क्या वे ऐसे साथियों पे गर्व करते हैं?

जिगनेश मेवानी के समर्थक स्टेज पर थे और नीचे हो रही गतिविधियों से अनजान थे, इसलिए वे अरनब के सवालों का जवाब नहीं दे पाए। मैं जवाब देती हूं, “हां, मुझे गर्व है अपने पति पर और ऐसे हर आदमी पर जो रिपब्लिक टीवी का बहिष्कार करता है!” झूठ का बहिष्कार होना ही चाहिए।

गोस्वामी से पूछना है “इंडिया वॉंट्स टू नो, वीडियो क्यूं छुपा रहे हो? झूठ किसके दम पे बोल रहे हो? इतना गिरा हुआ काम क्यूं कर रहे हो?” उस बेचारी महिला पत्रकार की कोई ग़लती नहीं है। गोस्वामी जैसा बॉस तो इस तरह के काम करवाता ही होगा। कब तक ये शोषण चलेगा? मैं गोस्वामी, झूठों के स्वामी, से जवाब मांगती हूं।

(इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में दी गई कोई भी तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार ‘जनता का रिपोर्टर’ के नहीं हैं)

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